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अधिकारियों की लापरवाही से ऊर्जा विभाग को लगा 1.60 करोड़ का चूना, जांच के बाद इंजीनियरों पर कार्रवाई की अनुशंसा

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Ranchi : जमशेदपुर में लगातार हो रही बिजली की चोरी के बाद विभाग ने एसआईटी गठित कर जांच करायी. जांच रिपोर्ट से जो खुलासे हो रहे हैं, वे चौंकानेवाले हैं. जांच के बाद बिजली चोरी का तो पता चल ही रहा है, यह भी साबित हो रहा है कि बिजली विभाग का बेड़ा गर्क करने में और कोई नहीं, बल्कि बिजली विभाग के ही अधिकारी अहम भूमिका निभा रहे हैं. जमशेदपुर में अधिकारियों की मिलीभगत की वजह से विभाग को करीब 1.60 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. एडीजे अनिल पालटा की एक सदस्यीय एसआईटी ने जांच में ऐसी करीब 10 कंपनियों को आइडेंटिफाई किया है, जिन्होंने बिजली कनेक्शन लेने से पहले विभाग को देनेवाली सिक्यूरिटी मनी में गड़बड़ी की है. विभाग को 1.60 करोड़ रुपये की चपत लगी है. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जमशेदपुर और आस-पास बिजली विभाग के काम को देखनेवाले अपने काम को लेकर कितने संजीदा हैं.

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किसने कितने की लगायी चपत

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी दस कंपनियों का पर्दाफाश हुआ है, जिन्होंने बिजली कनेक्शन लेने के एवज में विभाग को सिक्यूरिटी मनी देने में गड़बड़झाला किया है. बता दें कि विभाग कंपनी की सहूलियत के लिए सिक्यूरिटी मनी किस्तवार भी लेता है. इसके एवज में कंपनी विभाग को पीडीसी (पोस्ट डेटेड चेक) देती है. इस मामले में कई कंपनियों के पीडीसी भी बाउंस कर गये. लेकिन विभाग की तरफ से कंपनियों पर कार्रवाई नहीं की गयी.

  • हिमाद्री स्टील प्राइवेट लिमिटेड : कंपनी ने विभाग के 36 लाख रुपये, जो सिक्यूरिटी मनी के तौर पर देने थे, उसे बकाया रखा था. बाद में कंपनी ने 21 लाख रुपये विभाग को दिये. जांच शुरू होते देख कंपनी ने और 15 लाख रुपये विभाग में जमा करवाये.
  • जगदंबा इंगोटेक स्टील प्राइवेट लिमिटेड : कंपनी ने सिक्यूरिटी मनी के 2.40 लाख रुपये बकाया रखे हैं.
  • हरिओम स्मेलटॉन प्राइवेट लिमिटेड : कंपनी ने सिक्यूरिटी मनी के 36 लाख रुपये बकाया रखे थे. बाद में 18 लाख रुपये विभाग को दिये. अभी भी कंपनी पर विभाग के 18 लाख रुपये बकाया हैं.
  • मां तारा इंगोट इंडस्ट्री : कंपनी ने सिक्यूरिटी मनी के 69.30 लाख रुपये बकाया रखे हैं.
  • केएवाईएस मैन्युफैक्चर लिमिटेड : कंपनी ने सिक्यूरिटी मनी के 16.56 लाख रुपये बकाया रखे हैं. 2012 के बाद से कंपनी ने भुगतान करना बंद कर दिया.
  • स्टैंड कमोडिटी प्राइवेट लिमिटेड : कंपनी ने सिक्यूरिटी मनी के 16.17 लाख रुपये बकाया रखे हैं. वर्ष 2000 के बाद से ही कंपनी ने भुगतान करना बंद कर दिया.
  • बालाजी इंडस्ट्री : कंपनी ने सिक्यूरिटी मनी के 10 लाख रुपये बकाया रखे हैं. 2008 के बाद से कंपनी ने भुगतान करना बंद कर दिया.
  • डिवाइन एलॉय प्राइवेट लिमिटेड : कंपनी ने सिक्यूरिटी मनी के 7.20 लाख रुपये बकाया रखे हैं. 2010 के बाद भुगतान करना बंद कर दिया.
  • लॉर्ड बालाजी मैन्युफैक्चर एंड स्टील : कंपनी ने सिक्यूरिटी मनी के तीन लाख रुपये बकाया रखे हैं. मई 2005 के बाद से भुगतान करना बंद कर दिया.

अधिकारियों ने रजिस्टर तक मेनटेन नहीं किया

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इस पूरे प्रकरण में विभाग के अधिकारी शक के घेरे में हैं. माना जा रहा है कि बिना विभाग की मर्जी से कंपनी इतनी बड़ी राशि को दबाये नहीं रख सकती है. वहीं, जांच रिपोर्ट में यह बात भी सामने आयी है कि जिन अधिकारियों को हिसाब का लेखा-जोखा रखना था, उन्होंने रजिस्टर तक ठीक से रखना मुनासिब नहीं समझा. जांच के दौरान कोई भी रजिस्टर अपडेट नहीं पाया गया. गौर करनेवाली बात यह है कि कानून के मुताबिक ऐसी कंपनियों से राशि 1.5 फीसदी ब्याज के साथ वसूल करने का प्रावधान है, लेकिन अधिकारियों ने राशि वसूलने की बजाय कंपनी की सहूलियत के लिए रजिस्टर तक को मेनटेंड नहीं रखा.

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अधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा

जांच रिपोर्ट में पूरी गड़बड़ी का जिम्मेदार इलेक्ट्रिकल एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, सप्लाई और सीएनआर (कॉमर्शियल एंड रेवेन्यू) को बताया गया है. इलेक्ट्रिकल एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, सप्लाई और सीएनआर की ही जिम्मदारी होती है कि कनेक्शन के एवज में सिक्यूरिटी मनी की वसूली करें. अगर कोई कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो उस कंपनी पर कार्रवाई करें. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जांच रिपोर्ट में इन दोनों अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई करने की अनुशंसा की गयी है.

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