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मियाद पूरी हो गयी, नहीं बन पाया रांची तारामंडल, अब अप्रैल 2019 तक कार्य पूरा होने का दावा

  • दो फरवरी 2014 को हुआ था शिलान्यास, जुलाई 2017 थी निर्माण कार्य की डेडलाइन
  • 26 करोड़ की लागत से बन रहा तारामंडल
  • कार्यकारी निदेशक का दावा- काम अब अंतिम चरण में
  • कर्मचारियों ने दावा का किया खंडन

Ranchi : चिरौंदी स्थित रांची साइंस सेंटर कैंपस में झारखंड के पहले तारामंडल के निर्माण कार्य की मियाद पूरी हो चुकी है. इसका शिलान्यास दो फरवरी 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया था. जुलाई 2017 तक की इसकी डेडलाइन थी. लेकिन, 19 माह बीतने के बाद भी कार्य पूरा नहीं हो सका है. यहां तक कि अभी भी कार्य जारी है. इस पर साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन काउंसिल के कार्यकारी निदेशक जीएसपी गुप्ता बताते हैं कि इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण निर्माण कार्य अभी तक अधूरा है, लेकिन निर्माण कार्य अंतिम चरण में है. इलेक्ट्रिफिकेशन का काम चल रहा है. तारामंडल के अंदर लगायी गयी सभी वैज्ञानिक तकनीक को असेंबल किया जा चुका है. उन्होंने दावा किया है कि मार्च या अप्रैल 2019 तक इसे चालू कर दिया जायेगा. उनके बयान से उलट यहां पर कार्य कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि कई कार्य अभी भी पूरे नहीं हो सके हैं. यहां आनेवाले लोगों के लिए जो सड़क निर्माण है, वही अब तक अधूरा है. ऐसे में अधिकारियों के दावे पर सवाल उठ रहा है कि आखिर इसका निर्माण कब तक पूरा हो सकेगा.

26 करोड़ की लागत से बन रहा तारामंडल

रांची के चिरौंदी में बन रहा तारामंडल राज्य का पहला तारामंडल है. इसकी निर्माण लागत करीब 26 करोड़ रुपये है. इसका डिजाइन क्रिएटिव म्यूजियम डिजाइन (सीएमडी) ने किया है, जो केंद्र सरकार की नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम की इकाई है. इसके निर्माण में केंद्र द्वारा राज्य सरकार को सब्सिडी दी गयी है. यह तारामंडल कोलकाता स्थित विश्व के दूसरे सबसे बड़े बिरला तारामंडल की तर्ज पर बन रहा है. कोलकाता के इंजीनियरों की टीम पिछले पांच वर्षों से इस काम को अंजाम देने में लगी है.

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पानी की समस्या बन रही सबसे बड़ी बाधा

निर्माणाधीन तारामंडल का निर्माण कार्य देख रहे इंजीनियर का कहना है कि इसके निर्माण में कई तरह से परेशानी सामने आयी है. इसमें सबसे अधिक परेशानी पानी को लेकर है. पानी की समस्या से निपटने के लिए यहां पर चार डीप बोरिंग की गयी, लेकिन चारों फेल हो गयी. इससे निर्माण का काम काफी प्रभावित रहा. ऐसे में टैंकर की मदद से बोड़ेया नदी से पानी लाकर काम चलाया जा रहा है, लेकिन इसमें बहुत परेशानी हो रही है.

एस्ट्रोनॉमी गैलरी है सबसे बड़ी विशेषता

साइंस सिटी में बन रहे इस तारामंडल की सबसे बड़ी खासियत यहां बन रही एस्ट्रोनॉमी गैलरी है. इसमें एस्ट्रोनॉमी से संबंधित चीजों को रखा जायेगा. इसमें अमेचर खगोल विज्ञान क्लब भी होगा. इसकी विशेषता यह है कि लोग ब्लैक होल, बिग बैंग थ्योरी आदि का ज्ञान यहां प्राप्त कर पायेंगे. इसी में दुनियाभर की खगोलीय घटनाएं दिखायी जायेंगी. इसमें एक समय में 8500 तारे स्क्रीन पर दिखाये जा सकेंगे. इसके लिए तारामंडल में हायर एएनएसआई लूमन कैपेसिटी प्रोजेक्टर लगाया जा रहा है. इसमें एक साथ 160 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी.

जल्द होगा काम पूरा, सरकार है प्रयासरत : जीएसपी गुप्ता

कार्यकारी निदेशक जीएसपी गुप्ता का कहना है कि इस तारामंडल का काम जोर-शोर से चल रहा है. पहले इसके लिए जो तय समय सीमा थी, वह बीत गयी है. सरकार प्रयासरत है कि जल्द ही इसका निर्माण कार्य पूरा हो. मार्च-अप्रैल तक तारामंडल बनकर तैयार हो जायेगा. इसके बाद इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जायेगा.

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