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खास खबर : जामताड़ा को टक्कर दे रहे हैं जमशेदपुर के साइबर अपराधी, बैंक खाते से पलक झपकते उड़ा देते हैं रकम

Raj Kishore

Sanjeevani

Jamshedpur :  झारखंड का जामताड़ा जिला देश भर में साइबर अपराधियोंं की करतूतों के चलते कुख्यात है, तो अब झारखंड की औद्योगिक राजधानी कहा जानेवाला जमशेदपुर भी इसी राह पर चल पड़ा है. आंकड़ों की गवाही है कि यही गति जारी रही, तो वह दिन दूर नहीं, जब जामताड़ा के सिर से यह बदनुमा धब्बा हट कर जमशेदपुर के माथे पर चिपक जायेगा. यहां एक ऐसा मामला भी आ चुका है, जब 90 दिनों में साइबर अपराधियों ने दो करोड़ की संपत्ति बना ली थी. यह अलग बात है कि पांचों आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ गये थे. इतना ही नहीं, एक साइबर अपराधी ने गुवहाटी से तीन करोड़ रुपये उड़ा लिए थे. हालत यह है कि मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम भी यहां साइबर अपराधियों की तलाश में पहुंच चुकी है. जी हां, हम बात कर रहे हैं लौहनगरी जमशेदपुर की. इसे इस्पात नगरी के रूप में भी जाना जाता है. शहर में उद्योग और व्यवसाय जगत से जुड़े नामी-गिरामी लोग तो हैं ही, शिक्षा, खेल और कला के क्षेत्र में भी शहर के लोगों ने देश-दुनिया में अपना परचम लहराया है. जमशेदपुर में अपराध भी कम नहीं होते हैं. आपराधिक गिरोहों के बीच भिड़ंत में फायरिंग से लेकर हत्या के अलावा चोरी, छिनतई जैसी घटनाएं भी शहर में आम रही है, लेकिन फिलहाल शहर में सबसे अधिक साइबर अपराध में ही बढ़ोत्तरी होती दिख रही है.  जमशेदपुर में आये दिन साइबर अपराधी किसी न किसी के बैंक खाते से उनकी गाढ़ी कमाई उड़ा रहे हैं. यहां आये दिन साइबर अपराधी किसी न किसी तरह लोगों को झांसा देकर बैंक खातों से उनकी गाढ़ी कमाई उड़ा रहे हैं. पुलिस मामले की जांच में जुटती है, कुछ मामलों में पुलिस को सफलता भी मिली है, लेकिन अधिकांश मामलों में साइबर अपराधी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाते हैं. इससे पुलिस की चुनौती बढ़ गयी है, वहीं शहर के लोगों की चिंता भी साइबर अपराधियों ने बढ़ा दी है.

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डॉक्टर-नर्स और पुलिस अधिकारी भी हो चुके हैं शिकार

हालत यह है कि साइबर अपराधी डॉक्टर और नर्स को भी अपना शिकार बना चुके हैं. वहीं पुलिस अधिकारी को भी शिकार बनाने से नहीं चूके हैं. मामला 8 जून 2021 को सामने आया था, जब साइबर अपराधियों ने टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) के डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार और नर्स विलासी कौर को ठगी का शिकार बनाया था. प्लेन का टिकट कैंसिल कराने के नाम पर डॉक्टर के अकाउंट से एक लाख 12 हजार रुपये उड़ा दिये थे, जबकि पासबुक अपडेट करने के नाम पर नर्स के अकाउंट से 70 हजार रुपये की अवैध निकासी कर ली गयी थी. इसे लेकर बिष्टुपुर साइबर थाना में मामला दर्ज किया गया था. इसके अलावा जिले के एक वरीय पुलिस अधिकारी के फर्जी फेसबुक एकाउंट साइबर अपराधियों ने बना लिया था. कुछ मामलों में पुलिस अधिकारी का फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर लोगों से किसी बहाने रुपयों की ठगी का प्रयास का भी मामला आ चुका है. हालांकि समय रहते लोगों को सचेत कर देने से लोग ठगी के शिकार होने से बच गए. इसके अलावा राजनीतिक दल से जुड़े लोगों के फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाने के मामले भी सामने आ चुके हैं.

समय के साथ बदलता गया अपराध करने का तरीका

बदलते समय के साथ लोगों को जाल में फांसने के लिए साइबर अपराधी ठगी के तरीके भी बदलते रहे हैं. एक समय था, जब बैंक अधिकारी बनकर या केवाईसी अपडेट करने के नाम पर किसी को फोन कर उनका बैंक डिटेल लेकर रुपये उड़ाने के मामले ज्यादा आते थे. लेकिन अब तो ऐसे भी मामले सामने आने लगे हैं, जिसमें न तो किसी को कॉल आता है और न तो ओटीपी या मैसेज ही आता है. बावजूद इसके उनके खाते से रुपये की अवैध निकासी हो जाती है. ताजा मामला शनिवार को ही उजागर हुआ है. बागबेड़ा कॉलोनी के विनोद कुमार सिंह को साइबर अपराधियों ने इसी तरह से साढ़े चालीस हजार की ठगी का शिकार बनाया. इतना ही नहीं, साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका निकाला है.

भूत-प्रेत और जिन्न से धनवान बनाने का लालच देकर ठगी

साइबर अपराधियों ने भूत-प्रेत और जिन्न से धनवान बनाने का लालच देकर ठगी का सबसे नया तरीका भी अपनाया था. मामला 6 दिसंबर 2020 को शहर में सामने आया था. मामला 72 सौ रुपये में जिन्न बेचने का था. अपराधी यह कहकर लोगों को झांसे में लेते पाये गये गये कि जिन्न को खुश करके वे जल्द धनवान बन सकते हैं. उस जिन्न का नाम सिलफान रखा था. उसी के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा था. हालांकि इसमें अपराधी ज्यादा सफल नहीं हो पाये.

साइबर ठगी के हाल में घटे कुछ मामलों पर नजर डालते हैं – 

  1. तीन महीने में 500 लोगों से कर ली थी ठगी
    तीन महीने में करीब 500 लोगों के खाते से ठगी कर अपने अपराधियों ने अकाउंट में 2,12,67000 रुपए का ट्रांजेक्शन कर लिया था. मामला करीब साल भर पहले तब सामने आया, जब साइबर पुलिस ने सिदगोड़ा के निवासी विकास कुमार तिवारी, गोलमुरी निवासी सविंदर सिंह, रिषभ भारती, बिरसानगर निवासी दिलप्रीत सिंह और जगजीत सिंह गिल को धर-दबोचा था. सभी कम समय में ज्यादा पैसे की लालच में साइबर क्राइम से जुड़े थे. साइबर पुलिस ने अपराधियों के पास से कई एटीएम, पासबुक, चेकबुक, पैन कार्ड, आधार कार्ड जब्त किया था. पुलिस ने पांचों आरोपियों का अकाउंट फ्रीज कर उन्हें जेल भेज दिया था.
  2. क्रेडिट कार्ड का सीपीपी डिएक्टिवेट कराने के नाम पर 1.42 लाख की ठगी
    बिष्टुपुर थाना क्षेत्र के रामदास भट्टा निवासी शेखर राव को 15 जनवरी 2021 को एक नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को बैंक का अधिकारी बताया. उसने कहा गया कि उसके क्रेडिट कार्ड का सीपीपी एक्टीवेट हो गया है. उसे डिएक्टिवेट कराने की बात कहकर अपने जाल में कॉल करनेवाले ने फांस लिया. फिर ओटीपी लेकर उनके खाते से 1.42 लाख रुपये की अवैध निकासी कर ली गयी. उसके बाद मामला बिष्टुपुर थाना पहुंचा.
  3. केवाइसी अपडेट कराने के नाम पर एक लाख से अधिक की ठगी
    सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के भालूबासा की रहनेवाली शर्मीला चक्रवती से केवाइसी अपडेट कराने के नाम एक लाख 2480 रुपये की ठगी कर ली गई थी. इसे लेकर भुक्तभोगी ने बिष्टुपुर साइबर थाना में मोबाइल नंबर 6295518332, 6202253785 के धारक के खिलाफ मामला दर्ज कराया था. मामला बीते जून महीने का है. महिला के मोबाइल पर 26 जून की दोपहर मैसेज आया था. फिर गूगल प्ले स्टोर से टीम व्यूअर क्विक स्पोर्ट एप डाउनलोड कराकर खाते से रुपये की निकासी कर ली गयी थी.
  4. तीन करोड़ के ट्रांजेक्शन के मामले में शहर पहुंची थी गुवाहाटी पुलिस
    असम के गुवाहाटी की क्राइम ब्रांच की पुलिस तीन करोड़ के ट्रांजेक्शन के मामले में शहर पहुंची थी. यहां पुलिस टीम ने गोविंदपुर थाना क्षेत्र में छापेमारी कर कमेश पाल को हिरासत में लिया था. वह स्थानीय स्टील स्ट्रीप्स व्हील्स कंपनी के अधीन एक ठेका कंपनी में कर रहा था. वैसे आरोपी मूल रूप से वह झारखंड के गढ़वा जिले कांडी थाना क्षेत्र का रहनेवाला था. मामला कांडी स्थित उसके बैंक खाते से जुड़ा था.

मुंबई क्राइम ब्रांच ने दो जगहों पर दी थी दबिश

मुंबई क्राइम ब्रांच की पुलिस टीम ने अक्टूबर 2021 में बागबेड़ा और राहरगोड़ा में दो जगहों पर दबिश दी थी. मामला जमशेदपुर के साइबर ठग महेश पोद्दार से जुड़ा था. साइबर अपराधियों ने मुंबई में नौकरी का झांसा देकर लोगों को ठगी का शिकार बनाया था. इस मामले मुख्य आरोपी पुलिस के हाथ नहीं आया. हालांकि उसे लेकर राहरगोड़ा के दो लोगों से पूछताछ की गई थी.

साइबर अपराधियों से बचाव के लिए अपनायें ये तरीके

  • कोई भी ऑनलाइन स्कीम, जिसमें पैसे जीतने और प्राइस मिलने की बात हो तो उसके लालच में न पड़े और उन पर बिलकुल भी विश्वास न करे.
  • किसी को भी अपने बैंक खाते, एटीएम और क्रेडिट कार्ड से जुड़े डिटेल्स न दे.
  • स्पैमिंग और फिशिंग मेल के बारे में पूरी तरह से जानें और कभी भी अनजान व्यक्ति के मैसेज या ईमेल में दिये गये लिंक पर क्लिक न करें.
  • इंटरनेट के जरिए होने वाले विभिन्न साइबर क्राइम की जानकारी इकट्ठा करें, जिससे आप उसके प्रति जागरूक रहेंगे.
  • किसी भी वेबसाइट अपना पर्सनल डिटेल्स शेयर न करे, सिर्फ वेरीफाइड साइट्स पर ही करे.
  • किसी भी सॉफ्टवेयर या एप्प को डाउनलोड करने से पहले अच्छे से कनफर्म कर ले कि कहीं आप कुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं.
  • सेफ सर्फिंग करने के अलावा ऑनलाइन शॉपिंग करते समय सतर्क रहें. केवल विश्वसनीय साइट्स ही चुनें.

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