Opinion

कोरोना से उत्पन्न संकट का सामना सिर्फ मुफ्त राशन के भरोसे नहीं किया जा सकता

Faisal Anurag

तो क्या प्रधानमंत्री ने छठ का उल्लेख बिहार चुनावों को ध्यान में रख कर नहीं किया? प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद यह सवाल राजनीति और सोशल मीडिया में पूछा जा रहा है. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में दीपावली के साथ छठ का उल्लेख किया था. प्रधानमंत्री के बहुप्रचारित संबोधन के बाद उन तमाम लोगों को भारी निराशा हुई है जो कुछ ठोस एक्शन प्लान की उम्मीद लगाए हुए थे. पूरे संबोधन की खास बात सिर्फ यह रही कि अन्न योजना की समय सीमा का विस्तार नवंबर तक कर दिया गया है.

प्रधानमंत्री की इस घोषणा के बाद बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गरीबों को मुफ्त राशन देने की योजना का विस्तार जून 2021 तक कर दिया है. और केंद्र से प. बंगाल विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल भी अगले साल पूरा हो रहा है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लगे हाथ इस योजना का श्रेय खुद ले लिया है.

यह प्रतिस्पर्धा बताती है कि आमलोगों की परेशानी को ले कर किस तरह के राजनीतिक दावंपेच खेले जा रहे हैं. यह सब उस समय हो रहा है जब भारत अमेरिका और ब्राजील के बाद तीसरा ऐसा देश है जहां हर दिन आने वाले कोरोना केस की संख्या विस्फोटक होती जा रही है.

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केंद्र ने तो राज्यों के कोर्ट में बॉल डाल दिया है. और राज्यों के प्रबंधन कौशल को लेकर अनेक सवाल पूछे जा रहे हैं. इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि इस समय लोगों को खाद्य सामग्री की फौरी जरूरत है. लेकिन यही केवल पर्याप्त कदम नहीं है. जिससे वर्तमान संकट से उबरा जा सकता है. अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने मार्च में ही सरकार को सुझाव दिया था कि वह लोगों तक राशन पहुंचाने का प्रबंध करे. अनेक अर्थशास्त्रियों ने इस तरह के सुझाव दिए थे.

सरकार की चुनौती यह है कि वह हरेक तक राशन पहुंचाने की व्यवस्था को सुदृढ करे. जिसमें कोताही को ले कर अनेक तथ्य सामने आ चुके हैं. हालांकि प्रधानमंत्री ने कहा है कि 80 करोड़ लोगों तक अन्न पहुंचाया जाएगा. और इस मद में  90 हजार करोड़ खर्च किया जाएगा. 225 रु महीने का मुफ्त राशन, 5 महीने तक! 90 हजार करोड़ रु 80 करोड़ गरीब लोगों के लिये! 225 रु महीना!

लेकिन अन्न योजना मात्र से ही गरीबों और श्रमिकों की समस्या का निदान नहीं हो पाएगा. आर्थिक विशेषज्ञों की इस राय को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस दौर में सरकार को एक बड़े  एक्शन प्लान के साथ लोगों का भरोसा जीतना चाहिए. जिसमें लघु एवं मध्यम उद्योंगों के साथ उनके सरोकार को धान में रखना चाहिए. पत्रकार पुष्यमित्र ने ठीक ही सवाल उठाया है : लेकिन इतने से काम चलने वाला नहीं. यह तो बस भुखमरी से बचाव का इंतजाम है. अभी देश को फिर से खड़ा करने की जरूरत है. इस आपदा से सिर्फ गरीब नहीं, मध्यम वर्ग भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

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छोटे कारोबारी फिर से खड़े नहीं हो पा रहे. प्राइवेट जॉब वाले बेरोजगार हो रहे हैं. उसके बारे में भी इतनी ही गंभीरता से सोचने की जरूरत है. MSME को  मात्र लोन देने से बात नहीं बनेगी. जब तक बाजार में खरीदार नहीं होंगे बाजार फिर से उठेगा नहीं. अगर सामान बिकेगा नहीं तो कौन उत्पादन करने का रिस्क लेगा. छंटनी के शिकार लोगों के लिए अभी सरकार कुछ नहीं सोच रही. अगर यही हाल रहा तो लोगों में हताशा बढ़ेगी. खुदकुशी के मामले तो लगातार सामने आ रहे हैं. सरकार को जल्द कुछ सोचना चाहिये. अगर वह कुछ नहीं करती है तो इस फैसले को चुनावी स्टंट ही कहा जायेगा.

झारखंड में ही लॉकउाउन और अनलॉकउाउन में सुसाइड करने वालों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गयी है.  मंगलवार को ही मात्र 24 घंटे में झारखंड के विभिन्न हिस्सों में 12 व्यक्तियों के आत्महत्या करने की खबर आयी है. खबरों के अनुसार इसमें छह लोग बेरोजगारी के कारण आत्महत्या करने के लिए बाध्य हुए हैं. मरने वाले की उम्र 40 साल से कम ही है. इसमें दो छात्र भी हैं. जाहिर है लोगो की समस्या कहीं ज्यादा गहरी है. भूख से मरने की संभावना को रोक देना ही पर्याप्त नहीं है. केंद्र सरकार को यह समझने की जरूरत है कि वह समग्रता में इस संकट को देखे और उसके समाधान का एक्शन प्लान तैयार करे.

इसके लिए जरूरी है कि विधानसभाओं के चुनाव से नजर हटा कर संकट को देखा जाए. बिहार में ही 30 लाख माइग्रेंट वापस लौटे हैं. लेकिन राज्य में रोजगार नहीं मिलने के कारण वे फिर वापस जा रहे हैं. घर उन्हें बेहद तकलीफ से लौटना पड़ा था. लेकिन वापसी के लिए तो प्लेन तक मुहैया कराया जा रहा है. स्पष्ट है कि सरकारों की घोषणाओं और वास्तविक स्थिति में बहुत फर्क है. और इसका खामियाजा नागरिकों को झेलना पड़ रहा है. यहां तक कि कोरोना वायरस से निपटने के तरीकों पर भी जानकारों के सवालों के जबाव देने के बजाय उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है. आवाज उठाने वाले कई डाक्टरों के साथ तो अपराधियों से जैसे सलूक किए जाने की खबरें वायरल हो चुकी हैं.

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