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…तो देश की तकदीर बदल जायेगी, मोदी सरकार का ब्लू प्रिंट स्ट्रैटजी फॉर न्यू इंडिया @75   

मोदी सरकार को अपने थिंक टैंक नीति आयोग से पांच साल का ब्लूप्रिंट मिला है, जिसमें 2022-23 तक अर्थव्यवस्था को 4 ट्रिल्यन डॉलर का बनाने का लक्ष्य रखा गया है. स्ट्रैटजी फॉर न्यू इंडिया @75 नाम के इस ब्लू प्रिंट को गुरुवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली और नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने जारी किया है.

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NewDelhi : मोदी सरकार को अपने थिंक टैंक नीति आयोग से पांच साल का ब्लूप्रिंट मिला है, जिसमें 2022-23 तक अर्थव्यवस्था को 4 ट्रिल्यन डॉलर का बनाने का लक्ष्य रखा गया है. स्ट्रैटजी फॉर न्यू इंडिया @75 नाम के इस ब्लू प्रिंट को गुरुवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली और नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने जारी किया है.  इसमें कुल 41 अध्याय हैं. इसे चार खंडों चालक (ड्राइवर्स), बुनियादी ढांचा, समावेश और राजकाज में बांटा गया है. इसके तहत हर परिवार को पक्का मकान, पानी कनेक्शन, शौचालय और 24×7 बिजली आपूर्ति, कुल कार्यबल के मौजूदा कुशल श्रम को 5.4 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करना, जलमार्ग के जरिए माल ढुलाई को दोगुना तक बढ़ाना, नैशनल हाईवेज की कुल लंबाई को दोगुना करना और भारतीय रेलवे के लिए अलग रेग्युलटेर की व्यवस्था की जायेगी. यह कुछ ऐसे कदम हैं, जो सरकार पांच साल में 15 अगस्त, 2022 तक पूरा करना चाहती है, जब देश आजादी के 75वें वर्ष का जश्न मना रहा होगा यदि मोदी सरकार अगले साल लोकसभा चुनाव में जीतकर दोबारा सत्ता में आती है तो इन लक्ष्यों को हासिल करना उसका मुख्य अजेंडा होगा.

 आर्थिक वृद्धि दर औसतन आठ फीसदी रखने का लक्ष्य

नीति आयोग के ब्लू प्रिंट में 2018-23 के बीच आर्थिक वृद्धि दर को औसतन आठ फीसदी रखने का लक्ष्य है.  ऐसा हुआ तो भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा 2.7 ट्रिल्यन से बढ़कर 2022-23 तक 4 ट्रिल्यन डॉलर की हो जायेगी. इसके साथ ही 2030 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय किया गया है. इस क्रम में निवेश दर को जीडीपी के 36 फीसदी और टैक्स जीडीपी अनुपात को 22 फीसदी तक बढ़ाने का टारगेट रखा गया है.  कहा गया है कि देश अब आर्थिक संक्रमण के दौर को पूरा करने के करीब है और इसके साथ प्रति व्यक्ति आय 2022-23 में बढ़कर 3,000 डॉलर हो जायेगी जो 2017-18 में 1,900 डॉलर था. ब्लू प्रिंट में कहा गया है कि 2022 तक सभी परिवारों के पास पक्का मकान हो, जिसमें पानी कनेक्शन, शौचालय और 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो.

ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार का विस्तार कर  किसानों की आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है. आयोग ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरक, बिजली और फसल बीमा आदि के लिए अलग-अलग सब्सिडी देने के बजाय प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए प्रति एकड़ जमीन के लिए शुरू में ही सब्सिडी देने पर विचार किया जा सकता है. नीति आयोग ने ब्रॉड गेज का शतप्रतिशत विद्युतीकरण, माल गाड़ियों की औसत रफ्तार को 2016-17 के 24 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर प्रति घंटा और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की औसत रफ्तार को 60 किलोमीटर से बढ़ाकर 80 किलोमीटर प्रति घंटा करना होगा.

न्यूनतम मजदूरी का अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा

2022-23 तक डिजिटल क्षेत्र में असामनता दूर करने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचा की अहमियत को रेखांकित किया गया है. 2022 तक सरकारी सेवाओं की डिजिटल माध्यम से आपूर्ति और शत प्रतिशत डिजिटल साक्षरता का लक्ष्य रखा गया है. कहा गया है कि इलेक्ट्रानिक्स और आईटी मंत्रालय को डेटा की सुरक्षा, सुरक्षित डिजिटल लेन-देन तथा शिकायतों के निपटान के लिए एक व्यापक साइबर सुरक्षा रूपरेखा विकसित करने की जरूरत है.  नीति आयोग ने श्रम सुधारों को पूरा करने, महिला कार्यबल की भागीदारी बढ़ाने, न्यूनतम मजदूरी लागू करने, रोजगार आंकड़ा संग्रह में सुधार और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने का सुझाव दिया है. मजदूरी के बारे में कहा गया है कि सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर पर न्यूनतम मजदूरी का अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए और न्यूनतम वेतन कानून, 1948 को सभी रोजगार में लागू किया जाना चाहिए.

बिजली क्षेत्र में सुधार के लिए स्मार्ट ग्रिड को बढ़ावा देने, बिजली की नीलामी, बिजली वितरण कंपनियों का निजीकरण, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए सब्सिडी का भुगतान और बिजली आपूर्ति के लिए 100 प्रतिशत मीटर लगाने की बात कही गयी है. कंपनियां अगर बिजली कटौती करती हैं तो उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है.

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