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केंद्र से मिले 284 करोड़ में निगम को 10 करोड़ भी नहीं, पूरी रांची में कोरोना वायरस फैला तो जिम्मेदार कौन : मेयर

  • पेयजल की किल्लत देख नगर विकास विभाग से मांगे गये 19.77 करोड़ का भुगतान अबतक नहीं
  • सीमित संसाधनों से हिंदपीढ़ी के तीन वार्डों 21,22,23 में निगम करा कर सैनिटाइजेशन और सफाई कार्य, अन्य वार्डों में कोरोना संक्रमण फैलने से स्थिति होगी भयावह

Ranchi : रांची की मेयर आशा लकड़ा ने एक बार फिर हेमंत सरकार पर कोरोना से लड़ाई में रांची नगर निगम को कोई मदद नहीं देने का आरोप लगाया है. मेयर ने कहा है कि राज्य की जेएमएम-कांग्रेस सरकार निगमकर्मियों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है. आज राजधानी को साफ रखने में सभी कर्मी बिना सुरक्षा कवज के काम कर रहे हैं. कोरोना से लड़ाई के लिए 8 अप्रैल को राज्य सरकार को एक पत्र लिख कर 10 करोड़ की आर्थिक मदद मांगी थी. लेकिन पिछले दिनों हुई कैबिनेट की बैठक में इसपर कोई निर्णय नहीं हुआ, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है. जबकि केंद्र सरकार ने राज्य को कोरोना से लड़ाई के लिए 284 करोड़ रुपये की मदद दी है.

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निगम कक्ष में आयोजित एक प्रेस वार्ता में मेयर ने कहा कि अपने सीमित संसाधनों से निगम हिंदपीढ़ी के तीन वार्डों 21, 22 और 23 में सैनिटाइजेशन औऱ सफाई संबंधी कामों पर विशेष ध्यान दे रहा है. अगर समय रहते सरकार निगम को संसाधन नहीं दे और पूरे शहर में कोरोना का संक्रमण फैले, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा.

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प्रति माह खर्च बढ़ कर 5 से 7 करोड़ हुआ, गठबंधन सरकार को नहीं है चिंता

आशा लक़ड़ा ने कहा कि कोरोना से लडाई में रांची नगर निगम की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है. इस भूमिका को देखते हुए भी निगम अभी अपने सीमित संसाधनों से काम कर रहा है. अभी करीब 2400 निगमकर्मी बिना सुरक्षा किट (पीपीई किट) के सफाई काम कर रहे है. वहीं राजधानी के एक-एक घऱ, अपार्टमेंट व स्लम क्षेत्रों को सैनिटाइज करने के लिए निगम को सोडियम हाइपोक्लोराइट, ब्लीचिंग पाउडर सहित हैंडगण सैनिटाइजर स्प्रे मशीन की आवश्यकता है.

इसी तरह निगमकर्मियों को मार्च-अप्रैल और मई माह में प्रोत्साहन राशि के रूप में अतिरिक्त 2000 रुपये, कोरोना से संक्रमित होने पर चिकित्सकीय खर्च सहित मृत्यु होने पर 10 लाख रुपये देने का प्रावधान किया गया है, ताकि इन कर्मियों का मनोबल नहीं टूटे. इससे निगम का प्रति माह खर्च बढ़ कर 5 से 7 करोड़ हो गया है. लेकिन सरकार को निगम को आर्थिक मदद देने की तनिक भी चिंता नहीं है.

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पेयजलापूर्ति से जुड़ा 19.77 करोड़ रुपये का भुगतान भी नहीं

मेयर ने कहा कि गर्मी में राजधानीवासियों को पानी की किल्लत देख नगर विकास विभाग से 19.77 करोड़ रुपये (19,77,81,321 करोड़) मांगे गये थे. यह राशि वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2020-21 के लिए था. इसके लिए निगम की ओर से दो बार सरकार से पत्राचार भी किया गया है. आशा लकड़ा ने कहा कि यह राशि इसलिए मांगी गयी थी क्योंकि निगम द्वारा वसूल किये जानेवाले वाटर यूजर चार्ज की राशि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को दी जा रही है. इससे निगम के सामने जलापूर्ति संबंधी नयी योजनाएं ( mini HYDTW और HYDTW  बोरिंग, पुराने चापाकल की मरम्मति कराने, टैंकर से लोगों को पानी देने) शुरू करने में काफी परेशानी हो रही है.

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