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32 आदिवासी संगठनों की कोर कमेटी ने किया ऐलान, सरना कोड नहीं मिला तो झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित चार राज्यों में करेंगे चक्का जाम

21 मार्च को मोरहाबादी मैदान में अंतरराष्ट्रीय सरना सम्मेलन होगा

Ranchi : राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान के बैनर तले 32 आदिवासी संगठनों की कोर कमेटी ने ऐलान किया है कि सरना कोड की मांग पूरी नहीं होने पर झाऱखंड, छत्तीसगढ़, ओड़िशा और असम में चक्का जाम कर दिया जायेगा.

इसके अलावा मोरहाबादी मैदान में 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरना सम्मेलन का आयोजन भी होगा. इसमें भारत के अलावा, नेपाल, बांग्लादेश और भूटान में रहनेवाले सरना धर्मावलंबी भी शामिल होंगे. सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए रांची में दो सौ चार पहिया वाहनों से रैली भी निकाली जायेगी.

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राज्य और केंद्र को अपनी ताकत दिखायेंगे

हरमू मैदान में आयोजित कोर कमेटी की बैठक के बाद डॉ करमा उरांव ने मीडिया से कहा कि हम लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रैली का आयोजन करेंगे. 1 मार्च को होनेवाली इस रैली में राज्य के साथ केंद्र सरकार को भी हमारी ताकत का एहसास होगा.

हम प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, जनजातीय मामलों के मंत्री के अलावा के विपक्ष की नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित अन्य के समक्ष अपने मुद्दों को रखेंगे. उन्होंने कहा कि दिल्ली में संसद मार्च की भी योजना है पर कोरोना की वजह से उसकी तिथि अभी निर्धारित नहीं की गयी है.

हमारे आंदोलन से कई राज्यों में हलचल है

धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने कहा कि हम लोगों के आंदोलन से देश के कई राज्यों में हलचल है. पश्चिम बंगाल के कोलकाता में इंडोर स्टेडियम में हमारी अभूतपूर्व रैली हुई थी. इसके अलावा वहां हम लोगों ने 250 किलोमीटर की पदयात्रा भी निकाली थी.

ओड़िशा व छत्तीसगढ़ में भी हमारी बड़ी रैलियां हुई हैं. अब हम सरना कोड मिलने तक चुप नहीं बैठेंगे. हम आर पार की लड़ाई लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि कई लोग आदि धर्म के नाम पर इस आंदोलन को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं.

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हमारी संख्या 50 लाख से ज्यादा है

धर्म अगुवा वीरेंद्र भगत ने कहा कि देश के करोड़ों आदिवासियों में सरना धर्मावलंबियों की संख्या 50 लाख से भी ज्यादा है. हम पिछले 40-45 सालों से समाज में जागृति फैलाने का काम कर रहे हैं. झारखंड के साथ दूसरे राज्यों में भी हमारा आंदोलन सफल रहा है.

कोड नहीं तो वोट नहीं

कोर कमेटी के सदस्य नारायण भगत ने कहा कि सरना कोड नहीं मिलेगा तो हम लोग वोट का बहिष्कार करेंगे. उहोंने कहा कि जो भी पार्टी हमारी मांगों को पूरा करेगी हम उसी का साथ देंगे. उन्होंने कहा कि हम आदिवासी इस देश के प्रथम वासी हैं और हमें अपनी धार्मिक पहचान के लिए अपना कोड चाहिए.

इसके अलावा शिवा कच्छप, सुशील उरांव सहित अन्य ने भी संबोधित किया.

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