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विवादास्पद इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाईक भारत आना चाहता है, पर … 

NewDelhi : विवादास्पद इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाईक भारत लौटना चाहता है. इसके लिए उसने शर्त रखी है.  नाईक का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट उसे यह भरोसा दिलाये कि दोषी पाये जाने तक उसे गिरफ्तार नहीं किया जायेगा, तो वह देश लौटने को तैयार है.  बता दें कि नाईक फिलहाल मलयेशिया में रह रहा है और मुस्लिम बहुल इस देश ने उसे नागरिकता दे रखी है.   राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सीबीआई और जैसी भारतीय एजेंसियां नाईक को तलाश रही हैं.  उस पर मनी लांड्रिंग के अलावा गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं;  नाईक ने 2016 में भारत छोड़ दिया था.

द वीक नाम की एक मैगजीन को दिये अपने इंटरव्यू में नाईक ने भारतीय न्याय व्यवस्था पर विश्वास जताया;  हालांकि, मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उसने कहा, पहले की न्याय व्यवस्था आज से बेहतर थी.  2014 में भाजपा के सत्ता में आने से पहले आप सरकार के खिलाफ बोल सकते थे.  इतना ही नहीं, न्याय पाने की दर 80 फीसदी थी.  आज 10 से 20 फीसदी रह गयी है.

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90 फीसदी मुस्लिम 10 से 15 साल बाद कोर्ट से बरी हो जाते हैं

नाईक  ने कहा कि अतीत पर गौर करें तो आप पायें गे कि आतंकवाद के आरोपों का सामना कर रहे 90 फीसदी मुस्लिम 10 से 15 साल बाद कोर्ट से बरी कर दिये जाते हैं;  इसलिए मुझे भी न्याय पाने के लिए दस साल जेल में बिताने होंगे और मेरा पूरा मिशन बर्बाद हो जायेगा.  इसलिए मैं ऐसी गलती नहीं कर सकत.  अगर सुप्रीम कोर्ट मुझे भरोसा दिलाये कि दोषी पाये जाने तक मुझे गिरफ्तार नहीं किया जायेगा तो मैं देश लौटने को तैयार हूं.

इस क्रम में नाईक ने कहा कि अगर एनआईए चाहे तो मुझसे मलयेशिया में भी पूछताछ कर सकती है.  मनी लांड्रिंग के ईडी के आरोपों पर नाईक ने कहा कि मेरे पास सिर्फ एक बैंक खाता है.  बताते चलें कि एनआईए ने नाईक और उसके संगठन इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) के खिलाफ धर्म के आधार पर दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने के लिए आतंक रोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया है.

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