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झारखंड कांग्रेस का हाल: कार्यकर्ता ढोएं पालकी, पदाधिकारियों की मस्ती

Rajesh Tiwari

Ranchi :  झारखंड में कांग्रेसी कार्यकर्ता बस पालकी ढोने वाले बनकर रह गये हैं. पार्टी में शीर्ष पदों पर बैठे पार्टी पदाधिकारी पद पाने के पहले कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीढ़ कहते हैं, कार्यकर्ताओं को पार्टी का अहम हिस्सा मानते हैं. कहते हैं कि कार्यकर्ता हैं तो हम हैं, पर इसकी हकीकत कुछ और बयां करती है. जब उन्हें उपकृत करने की बात आती है तो अगुआ लीडर फेहरिस्त में खुद सबसे ऊपर हो जाते हैं. ऐसे में वर्षों से पार्टी का झंडा ढो रहे कार्यकर्ताओं की कौन सुने. अपनी सरकार में भी तकरीबन तीन वर्ष से ना तो उन्हें आयोग निगम में ही जगह बन पा रही है ना ही कहीं और रास्ता निकल पा रहा है. कहा जाता है कि महागंठबंधन सरकार आयोग निगम में उनके लिये फॉर्मूला तलाश रही है. यह तलाश कब खत्म होगी यह कहना मुश्किल लग रहा है. इधर, वरीय नेता अपनी-अपनी गोटी सेट कर आगे बढ़ रहे हैं.

सरकार गठन के बाद से ही बार-बार उठती रही है बोर्ड-निगम में जगह देने की बात

सरकार गठन के बाद से ही पार्टी के सक्रिये कार्यकर्ताओं को बोर्ड-निगम में जगह देने बात होती रही है. लेकिन, झंडा ढोने वाले कार्यकर्ताओं को आज तक लाभ नहीं मिला. बस, केवल बातें ही होती रहीं. यही नहीं, विधायक दल की बैठक में कहा जाता है कि पुराने कार्यकर्ताओं को बोर्ड-निगम में एडजस्ट किया जायेगा. पर आज तक कुछ नहीं हुआ. उपलब्धि की तौर पर कहीं-कहीं 20 सूत्री का गठन हुआ है. लेकिन, महागठबंधन में शामिल पार्टियों में विरोध ही रहा. इसमें पार्टी कार्यकर्ताओं की अपेक्षित भागीदारी नहीं हुई. यहां तक की राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी इस तरह की शिकायत की.

कार्यकर्ताओं को बस झुनझुना

पार्टी में कई ऐसे उदाहरण दिखे जिसमें पार्टी में सक्रिय रहे कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया गया. कुछ माह पहले जिलाध्यक्षों का चुनाव किया गया. जिसमें इंटरव्यू के जरिये जिलाध्यक्ष चुना गया. पार्टी में नयी परिपाटी शुरू कर दी गयी. इंटरव्यू कर जिलाध्यक्षों का चुनाव मामले को लेकर पार्टी में अंदर ही अंदर विरोध भी हुआ. पार्टी ऑफिस में भी इसे लेकर हो-हंगामा हुआ था. लेकिन, कार्यकर्ताओं को यह कहकर उन्हें भरमाया गया कि पार्टी के अंदर बेहतर कार्य करने वालों बड़ी जिम्मेवारी मिलेगी. कुल मिलाकर पार्टी कार्यकर्ताओं को अपनी ही सरकार में तीन बरस में भी झुनझुना ही हाथ आया.

कैसे खा रहे हैं कांग्रेसी नेता मलाई

झारखंड में कांग्रेस के 18 विधायक हैं, इनमें से चार मंत्री हैं. विधायक इरफान अंसारी झारखंड राज्य हज कमेटी के चेयरमैन हैं. इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर को भी कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है. 17 नवंबर को जारी आदेश के अनुसार उन्हें कैबिनेट मंत्री की तरह सुविधा दी गयी है. राज्य सरकार के स्तर से गठित राज्य समन्वय समिति में सदस्य के तौर पर राजेश ठाकुर को जगह मिली है.

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