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उत्तरी कोयल-मंडल डैम परियोजना के पूर्ण होने से हाथियों को होगा सबसे ज्यादा फायदा : उपनिदेशक

Palamu : पलामू व्याघ्र आरक्ष (पीटीआर) के उपनिदेशक भारतीय वन सेवा के अधिकारी कुमार आशीष ने कहा कि मंडल डैम के पूर्ण होने से सबसे ज्यादा फायदा पीटीआर में निवास कर रहे हाथियों को होगा. उन्होंने कहा कि अभी पीटीआर में तकरीबन 300 हाथी निवास करते हैं. उपनिदेशक कुमार आशीष गुरूवार को अपने कार्यालय कक्ष में बातचीत कर रहे थे.

वन अधिकारी कुमार आशीष ने बताया है कि मंडल डैम के पूर्ण होने से हाथियों को पेयजल की समस्या से मुक्ति मिलेगी. हाथी ऐसे भी पानी वाले क्षेत्रों को ज्यादा पसंद करते हैं. उन्होंने कहा कि मंडल डैम के पूर्ण होने से प्रवासी पक्षी भी यहां भारी संख्या में पहुंचेंगे.

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एक प्रश्न के उतर में कुमार आशीष ने बताया कि पलामू व्याघ्र आरक्ष में निवास करने वाले हाथी सभ्य एवं सालीन हैं. वे जंगली भोजन पर ही अपने आप को आश्रित रखते हैं.

उन्होंने कहा कि अन्य क्षेत्रों में हाथी जानमाल सहित अनाज के भंडारण स्थल को क्षतिग्रस्त करते हैं. यदा-कदा यहां भी एकाद घटना हो जाती है.

उन्होंने कहा कि मंडल डैम इलाके में बांस भी भारी मात्रा में उपजते हैं. वन क्षेत्र में 205 प्रजातियों के पक्षी वास करते हैं. पलामू व्याघ्र आरक्ष में तकरीबन 35 चेक डैम हैं, लेकिन ये भी मई-जून के महीने में सूख जाते हैं.

मंडल डैम निर्माण में वन विभाग एवं जल संसाधन विभाग के साथ एकरारनामे में यह तय है कि मंडल डैम से पानी की आपूर्ति पीटीआर में पशु-पक्षियों के लिए की जायेगी.

उन्होंने कहा कि मंडल डैम के पूर्ण होते ही पीटीआर का इलाका स्वर्ग हो जायेगा. पर्यटन क्षेत्र में भी इसकी गिनती होने लगेगी. एक प्रश्न के उतर में उन्होंने कहा कि मंडल डैम का निर्माण जिस स्थान पर हो रहा है, वह हरा-भरा जंगली इलाका है.

यहां हाथी बहुत आसानी से पानी के लिए पहुंचेंगे. इससे उनकी संख्या में भी वृद्धि होगी. उन्होंने कहा कि अन्य जगह जलाशय या डैम शहरी आबादी के पास हैं.

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एक अक्टूबर से होगी जानवरों की गणना

पलामू व्याघ्र क्षेत्र में पिछली गणना में एक भी बाध होने की पुष्टि नहीं होने के बाद वह अधिकारियों ने गंभीरता से लिया है. आज पलामू व्याघ्र आरक्ष के निदेशक कुमार आशुतोष ने बताया कि झारखंड में वन्यजीवों की आधिकारिक गणना अगले एक अक्टूबर से प्रारम्भ हो जाएगी. यह गिनती 31 दिसम्बर को खत्म होगी. तीन माह में राज्य के 31 प्रादेशिक (ट्यूटोरियल) वन क्षेत्रों में और पांच ‘वन्यप्राणी’ अभयारण्य में गणना होना है.

उन्होंने बताया कि, पलामू आरक्ष में दो, रांची, हजारीबाग और दलमा (पूर्वी सिंहभूम) में एक-एक वन्यप्राणी अभयारण्य हैं, जहां ट्रेप कैमरे तथा मल (स्टग) के जरिए वन्य प्राणियों की गणना वैज्ञानिक पद्धति द्वारा होगी.

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उपनिदेशक ने बताया कि, बाघ, हाथी, भालू, चीता, लकड़बग्घा, हिरण जैसे अन्य जंगली जानवरों की गिनती प्रत्यक्ष एवं ट्रेप कैमरे की मदद से होगी.

बताया कि पीटीआर के मेदिनीनगर मुख्यालय में आज से तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू है, जिसमें वन्यप्राणियों की गणना से जुड़े वनकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. यह गणना राज्य के सभी प्रादेशिक एवं वन्यप्राणी अभयारण्य के मुख्यालय में इस माह के अंतिम दिन तक समाप्त हो जाएगी.

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के बाद वन कर्मियों को उनके चिन्हित वन क्षेत्र के स्थलों में पूर्ण सुरक्षा एवं खाने-पीने की वस्तुओं के साथ भेज दिया जाएगा, जिसकी निगरानी वरिष्ठ वन अधिकारी करेंगे.

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