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गोल्डेन कार्डधारी मरीज के परिजनों का आरोप : मेडिका हॉस्पिटल ने कहा- चार लाख जमा करो, तब करेंगे डिस्चार्ज

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Ranchi : भगवान महावीर मेडिका हॉस्पिटल प्रबंधन पर आयुष्मान भारत योजना (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) की अवहेलना करने का आरोप लगा है. आरोप है कि हॉस्पिटल में इलाज कराने आये उमेश कुमार का प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गोल्डेन कार्ड बना हुआ है, इसके बावजूद हॉस्टिपल प्रबंधन द्वारा उनसे इलाज की फीस के रूप में चार लाख रुपये जमा करने को कहा गया. कांके के हुंदूर के रहनेवाले उमेश 19 अक्टूबर को सड़क हादसे का शिकार हो गये थे. इलाज के लिए उन्हें भगवान महावीर मेडिका हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज डॉ संजय कुमार और पैट्रिक पी मिंज की निगरानी में चल रहा था. उमेश के परिजनों का कहना है कि उमेश के इलाज के बाद उन्हें चार लाख रुपये का भारी-भरकम बिल पकड़ा दिया गया. इस पर उमेश के परिजनों ने बताया कि वे आयुष्मान भारत योजना के लाभुक हैं और उनके पास गोल्डेन कार्ड भी है, तो इलाज नि:शुल्क होना चाहिए. लेकिन, हॉस्पिटल प्रबंधन ने उनकी एक न सुनी और बिल जमा करने का दबाव बनाने लगा.

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1.70 लाख कैश और दो लाख का चेक लेने के बाद किया डिस्चार्ज

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उमेश के परिजनों ने बताया कि किसी तरह उन्होंने 1.70 लाख रुपये जुटाये और प्रबंधन को दिये, लेकिन इसके बाद भी हॉस्पिटल प्रबंधन ने उनको को पूरे पैसे जमा करने को कहा. उमेश के घरवालों ने बताया कि वे लोग खेती-बारी कर अपना गुजर-बसर करते हैं और आर्थिक रूप से बहुत ही कमजोर हैं. इसके बाद भी प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा, इनलोगों ने उमेश से दो लाख रुपये का चेक जमा करवा लिया. जब उमेश के परिजनों ने चेक जमा किया, तब उमेश को डिस्चार्ज कर दिया गया.

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मीडिया से भी की गयी बदसलूकी

वहीं, इस पूरे मामले पर मीडिया ने जब हॉस्पिटल प्रबंधन से बात करनी चाही, तो हॉस्पिटल के सुरक्षाकर्मी मीडिया से बदसलूकी करने लगे. सुरक्षाकर्मियों ने किसी भी डॉक्टर या पदाधिकारी से मिलने नहीं दिया और रविवार की छुट्टी की बात कहकर बात को टालते रहे. प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से गरीबों में उपचार को लेकर एक उम्मीद जगी है, लेकिन निजी अस्पतालों द्वारा किये जा रहे उत्पीड़न के कारण सरकार की इस जनकल्याणकारी योजना का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंच ही नहीं रहा है. आज भी गरीबों को लूटने का काम बदस्तूर जारी है. निजी अस्पतालों में गरीबों को आयुष्मान भारत का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है.

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