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फिलहाल लोकसभा चुनाव पर ही है आयोग का फोकस : मुख्य चुनाव आयुक्त

लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ कराने के मुद्दे पर बोले मुख्य चुनाव आयुक्त

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  • भारत निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों संग की बैठक
  • समय से पहले विधानसभा चुनाव कराने को संघीय ढांचे पर प्रहार करने जैसा बताया कांग्रेस ने
  • डीजीपी, एडीजी (विशेष शाखा) पर दल विशेष के समर्थक के रूप में कार्य करने का जेएमएम ने लगाया आरोप

Ranchi : लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजधानी पहुंची भारत निर्वाचन आयोग की टीम ने विभिन्न राजनीति दलों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. यह बैठक बुधवार को होटल रेडिशन ब्लू में हुई. बैठक में विधानसभा चुनाव समय से पहले कराने की चर्चा पर कांग्रेस पार्टी ने आयोग की टीम से कहा कि ऐसा करना संघीय ढांचे पर प्रहार करने जैसा होगा. वहीं, लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ-साथ होने की संभावना पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि आयोग फिलहाल लोकसभा चुनाव पर ही फोकस होकर काम कर रहा है. इस दौरान लंबी अवधि तक एक ही पद पर कार्यरत अधिकारियों के स्थानांतरण, मतदान केंद्रों की स्थिति, चुनाव में सुरक्षा की स्थिति पर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी बातें रखीं.

आयोग की टीम है रांची में, कई अधिकारियों संग करेगी वार्ता

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मालूम हो कि लोकसभा चुनाव को लेकर भारत निर्वाचन आयोग की टीम रांची में है. बुधवार को विभिन्न राजनीतिक दलों संग हुई वार्ता में मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा, निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा, वरीय उप निर्वाचन आयुक्त उमेश सिन्हा, उप निर्वाचन आयुक्त सुदीप जैन, संदीप सक्सेना, चंद्र भूषण कुमार,  महानिदेशक व्यय दिलीप शर्मा, महानिदेशक धीरेंद्र ओझा, प्रधान सचिव केएन भार तथा अपर मुख्य सचिव सह मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एल खियांग्ते उपस्थित थे. आयोग राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श के अलावा सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त, पुलिस अधीक्षकों, आयकर, उत्पाद, वाणिज्य कर, परिवहन, रेलवे के अधिकारी सहित अलग से मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक के साथ भी बैठक करेगा.

आयोग को कांग्रेस ने दिये ये सुझाव

  • मई 2019 तक भयमुक्त व निष्पक्ष वातावरण में चुनाव संपन्न करने पर आयोग कदम उठाये.
  • राज्य की भौगोलिक स्थिति और उग्रवाद को देखते हुए जरूरी है कि आयोग चुनाव के दौरान सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था करे.
  • झारखंड विधानसभा चुनाव की अवधि दिसंबर 2019 तक प्रस्तावित है. समय से इतना अधिक पहले चुनाव कराने की चर्चा संघीय ढांचा पर प्रहार है.
  • तीन वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत प्रशासनिक अधिकारियों का स्थानांतरण हो, ताकि चुनाव कार्य निष्पक्ष हो सके.
  • एक मतदाता केंद्र में अधिक मतदाता होने से उनको दूसरे बूथों में स्थानांतरित किया जाता है. इससे व्यावहारिकता का अभाव रहता है.

जेएमएम ने आयोग को दिये ये सुझाव

  • राज्य में निष्पक्ष एवं भयमुक्त वातावरण में चुनाव कराने के लिए आयोग पहल करे.
  • वैसे प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी, जिन पर एक विशेष राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने (मुख्य रूप से वर्तमान डीजीपी और विशेष शाखा के एडीजी पर) का आरोप लगा है, उन पर अविलंब कार्रवाई करते हुए स्थानांतरित किया जाये या चुनाव प्रक्रिया से वंचित रखा जाये.
  • इसी तरह तीन वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत पदाधिकारियों का चुनाव पूर्व स्थानांतरण हो, ताकि निष्पक्ष मतदान हो सके.
  • चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित कार्यक्रम की अनुमति के लिए एकल खिड़की पद्धति लागू की जाये.
  • अभ्यर्थियों के नकद खर्च की राशि को बढ़ाया जाये.
  • चुनावी खर्च का ब्योरा समर्पित करने की अवधि को कम से कम 60 दिन तक रखा जाये.
  • चुनाव के दौरान आम जनता के आवागमन को बाधित न किया जाये.

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