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कोरोना पर राजनीतिक दलों का रंगः खुद मियां फजीहत, दीगरा नसीहत

Amit Jha

Ranchi : 25 मार्च- मंत्री हफीजुल हसन अंसारी ने मधुपुर में किया नॉमिनेशन. सीएम हेमंत सोरेन समेत मंत्री आलमगीर आलम, सत्यानंद भोक्ता सहित दर्जनों विधायक और नेता दिखे. चुनावी सभा भी हुई.

26 मार्च, स्थान- पहरा, बड़कागांव. कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद ने अपने पिता और पूर्व विधायक योगेन्द्र साव द्वारा शुरू की गयी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पहरा में मटका फोड़ कर गांववालों के साथ होली मनायी. कार्यक्रम में सैकड़ों लोग जुटे थे.

26 मार्च को ही मंत्री सत्यानंद भोक्ता चतरा में थे. होली मिलन कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन नहीं किये जाने को लेकर सवाल उठे. 30 मार्च को मधुपुर उपचुनाव के लिए गंगा नारायण सिंह ने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया. हजारों की भीड़ चुनावी सभा में मधुपुर में उमड़ी.

पर अभी जो तस्वीर दिखती है उससे लगता है कि केवल आम पब्लिक के लिए ही कोरोना से बचाव बेहद जरूरी है. सरकारी मशीनरी भी मानती है कि कोरोना चुनाव से डरता है.

फिलहाल स्थिति यह है कि सालभर के भीतर राज्य में अब तक 1 लाख 23 हजार से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं. 1,110 लोगों को कोरोना के कारण जान भी गंवानी पड़ी है.

एक मंत्री तक इसकी चपेट में आकर अपना जीवन खो चुके हैं. कई और मंत्री भी संक्रमित हुए हैं. इधर, पिछले मार्च के तीसरे सप्ताह से मास्क नहीं पहनने और कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन किये जाने के नाम पर हजारों नागरिकों से लाखों की वसूली जुर्माना के नाम पर की जा चुकी है. यानी खुद मियां फजीहत, दीगरा नसीहत वाली कहावत राज्य में दिख रही है.

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अंबा के खिलाफ हो एफआइआर

अंबा प्रसाद द्वारा पहरा में आयोजित प्रोग्राम पर प्रदेश भाजपा ने सवाल उठाया था. प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव के मुताबिक राज्य में कानून की अलग-अलग परिभाषा है. कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद ने सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया था.

प्रशासन ने उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जबकि उन्होंने कानून का उल्लंघन किया था. विधायक सीपी सिंह ने विधानसभा सत्र में मास्क के नाम पर नागरिकों की जेब काटे जाने का विरोध किया था. कहा था कि बिना मास्क दिखने पर सीएम से लेकर आम व्यक्ति तक, सबों के मामले में एक समान तरीके से नियम लागू होना चाहिए.

एक साथ 5 से अधिक लोगों की उपस्थिति पर प्रशासन की नजर

देवघर जिला प्रशासन ने 27 मार्च को एक आदेश जारी किया था. इसके मुताबिक पांच या पांच से अधिक व्यक्ति किसी भी सार्वजनिक स्थान पर एकत्रित नहीं होंगे. न ही नाजायज मजमा लगायेंगे. देवघर अनुमंडल क्षेत्र अंतर्गत किसी भी प्रकार के जुलूस, रैली एवं सभा करने की अनुमति रद्द की गयी है.

सभी प्रकार के कार्यक्रम जहां पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों की उपस्थिति होने की संभावना होगी, उस कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति नहीं दी जायेगी. ये आदेश 29 मार्च यानी होली मनाने तक के लिए ही लागू था.

इसके अगले ही दिन 30 मार्च को गंगा नारायण ने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर मधुपुर में पर्चा भरा था. इसमें चुनावी मंच पर कई नेता दिखे. अच्छी खासी भीड़ भी नजर आयी.

यानी कोरोना का खतरा होली में आम लोगों के लिए था, चुनावी सभाओं में नहीं. इससे पहले हफीजुल हसन अंसारी झामुमो कैंडिडेट के तौर पर पर्चा भर चुके हैं. राज्य में पिछले साल दुमका औऱ बेरमो में उप चुनाव हुए. उसमें भी बड़ी संख्या में चुनावी सभा हुई.

मंत्री भी कोरोना की चपेट में

राज्य में जारी कोरोना संकट ने आम और खास में अंतर नहीं किया है. कई मंत्री, सांसद तथा विधायक संक्रमित हो चुके हैं. एक मंत्री हाजी हुसैन अंसारी की कोरोना से मौत हो चुकी है. वहीं एक अन्य मंत्री जगरनाथ महतो को अपना लंग ट्रांसप्लांट कराना पड़ा है.

संक्रमित होनेवाले अन्य मंत्रियों में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, कृषि एवं पशुपालन मंत्री बादल, वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर भी शामिल हैं. विधानसभा स्पीकर रबींद्रनाथ महतो भी संक्रमित हो चुके हैं.

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कोरोना प्रोटोकॉल की उड़ रही धज्जियां

राज्य सरकार अपने स्तर से कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर लगातार गाइडलाइन जारी कर रही है. रामनवमी, सरहुल, गुड फ्राइडे और अन्य त्योहारों को लेकर कई अहम निर्देश दिये गये हैं.

इसके अलावे चुनाव आय़ोग ने पिछले साल चुनाव के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किये थे. इसके मुताबिक चुनावी सभाओं में 1000 से अधिक लोगों का जुटान नहीं किये जाने, सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन किये जाने, नामांकन के दौरान उम्मीदवार के साथ दो से ज्यादा लोगों के साथ नहीं होने, डोर-टू-डोर प्रचार के वक्त उनके साथ अधिकतम 5 लोगों के ही शामिल रहने की बात कही थी.

रोड शो के समय में भी पांच से ज्यादा वाहनों का काफिला लेकर नहीं चलने का आदेश दिया था. बूथ सेंटर पर 1000 से अधिक वोटरों की उपस्थिति पर भी रोक लगायी थी. पर राज्य में न तो राज्य सरकार के निर्देशों पर सख्ती से अनुपालन होता दिख रहा है न ही चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन तय हो पा रहा है.

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