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 गुमला के दो डॉक्‍टरों पर मुख्‍यमंत्री जनसंवाद केंद्र ने तीन साल बाद भी नहीं की कोई कार्रवाई 

Ranchi/Gumla : सरकारी सिस्‍टम में भ्रष्‍टाचार के बारे में तथ्‍यों के साथ मुख्‍यमंत्री जनसंवाद केंद्र में शिकायत करने के तीन साल बाद भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती है. दोषियों को सजा से बचाने के लिए सिस्‍टम के लोग हर मु‍मकिन कोशिश करते हैं. ऐसा ही एक मामला 2014 का है, जिसकी शिकायत मुख्‍यमंत्री जनसंवाद केंद्र में झारखंड स्‍थापना दिवस के दिन 15 नवंबर 2015 को की गयी थी.

शिकायतकर्ता शशिरंजन कुमार ने मुख्‍यमंत्री जनसंवाद केंद्र में शिकायत दर्ज कर कहा कि झारखंड ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के तहत 11 दिसंबर 2014 से 23 दिसंबर 2014 तक सरकार द्वारा एमटीपी कार्यक्रम का ट्रेनिंग आयोजित किया गया. इस ट्रेनिंग में प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र में पदस्‍थापित डॉ मनिला दुलारी तिर्की और रेफरल हॉस्‍पीटल सिसई में पदस्‍थापित डॉ निलिमा मिंज ने भी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया.

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होटल में ठहरे नहीं, थमा दिया होटल का फर्जी बिल

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शिकायत में कहा गया कि ट्रेनिंग के बाद 8 हजार 400 रुपये का फर्जी बिल जमा किया. जो बिल जमा किया गया है वह स्‍टेशन रोड रांची स्थित होटल रांची का बताया गया है. जबकि ऐसा कोई भी होटल मौजूद नहीं है. डॉ निलिमा और डॉ मनिला दुलारी तिर्की ने बिल में लिखा है कि वह होटल राजदूत के रूम नंबर 209 और 210 में रूकी थी. पर्याप्‍त तथ्‍यों के साथ शिकायत करने के साथ ही मामले की जांच और संबधित डॉक्‍टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गयी थी.

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जांच में शिकायतकर्ता की शिकायत निकली सही, सीएस ने सौंपी थी रिपोर्ट

मुख्‍यमंत्री जनसंवाद केंद्र में शिकायत दर्ज होने के बाद रांची सिविल सर्जन ने मामले की जांच की और स्‍वास्‍थ्‍य विभाग झारखंड सरकार के उप निदेशक को 15 दिसंबर 2015 को एक रिपोर्ट सौंपी. इस रिपोर्ट में रांची सिविल सर्जन ने स्‍पष्‍ट कहा गया कि मुख्‍यमंत्री जनसंवाद के शिकायत के आलोक में जिला प्रबंधन कार्यक्रम द्वारा स्‍टेशन रोड में भौतिक सत्‍यापन किया गया. जहां होटल राजदूत नाम से कोई होटल मौजूद नहीं है. इसलिए प्रथम दृष्‍टया में दर्ज शिकायत सही प्रतीत होता है. उक्‍त चिकित्‍सकों से भुगतान की गई राशि वापसी की कार्रवाई की जा रही है. रिपोर्ट के एक सप्‍ताह के बाद 22 दिसंबर 2015 को डॉ मनिला दुलारी तिर्की और डॉ निलिमा मिंज ने चेक के माध्‍यम से रांची सिविल सर्जन को 8,400 रुपये का भुगतान कर दिया गया.

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पैसा किया वापस, नहीं हुई को कार्रवाई

इस मामले में भ्रष्‍टाचार में लिप्‍ट डॉक्‍टरों ने गबन किया हुआ पैसा तो वापस कर दिया, लेकिन उनके खिलाफ किसी तरह की विभागीय कार्रवाई नहीं की गयी. जिसके लिए शिकायतकर्ता ने 3 मई 2016 को फिर से कार्रवाई के लिए आग्रह किया. यह मामला तीन सालों में स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के अनुमोदन तक पहुंच गया, लेकिन दोनों डॉक्‍टरों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं किया गया है. मुख्‍यमंत्री जनसंवाद केंद्र में शिकायत दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता शशिरंजन कुमार ने कहा है कि इस मामले से सरकारी सिस्‍टम की पूरी पोल खुल जाती है कि भ्रष्‍टाचार का मामला साबित होने के बावजूद किसी सरकारी अधिकारी को विभागीय कार्रवाई से कैसे बचाया जाता है. उन्‍हें बचाने के लिए नीचे से उपर तक के लोग कार्रवाई को लंबा खींचते हैं.

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