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पांच जिले की पुलिस के लिए अमन श्रीवास्तव को पकड़ना बनी चुनौती, खुफिया तंत्र फेल या फिर पुलिस है लापरवाह

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Ranchi: गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव को गिरफ्तार करना झारखंड के रांची, रामगढ़, लोहरदगा, हजारीबाग और लातेहार जिले की पुलिस के लिए चुनौती बन गया है. इससे तो यही लगता है पुलिस का खुफ़िया तंत्र फेल हो चुका है या फिर पुलिस लापरवाह है.

इतने कांड होने के बाद भी आज तक अपराधी का पकड़ा नहीं जाना चिंता का सबब है. अमन श्रीवास्तव गिरोह के द्वारा जहां व्यवसायियों से रंगदारी वसूली जा रही है, वहीं रंगदारी नहीं देने पर वाहनों में आगजनी और जान से मारने की धमकी भी दी जाती है. बता दें कि अमन श्रीवास्तव के खिलाफ रांची, रामगढ़, लोहरदगा, हजारीबाग और लातेहार जिले के अलग-अलग थानों में कई मामले दर्ज हैं.

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गैंगस्टर बन गया अमन श्रीवास्तव

2 जून 2015 को सुशील श्रीवास्तव की हत्या के बाद सुशील के बड़े बेटे अमन श्रीवास्तव ने गिरोह की कमान संभाल ली. उसके मददगार बने बोकारो जेल में बंद अमरेंद्र तिवारी और रामगढ़ का लखन साव.

अमन के इशारे पर 26 अक्तूबर 2016 को किशोर पांडेय के बुजुर्ग पिता कामेश्वर पांडेय की हत्या पतरातू में कर दी गयी थी. अपराध से दूर रहनेवाले कामेश्वर पांडेय की हत्या के ठीक बाद एक शूटर को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था. हत्याकांड के बाद अमन श्रीवास्तव ने इस वारदात को अंजाम दिलवाने की बात खुद कबूली थी.

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श्रीवास्तव गैंग और पांडेय गिरोह में लंबे समय से है वर्चस्व की लड़ाई

श्रीवास्तव गैंग और पांडेय गिरोह में वर्चस्व की लड़ाई लंबे समय से है. दोनों गिरोहों के सरगना क्रमशः सुशील श्रीवास्तव और भोला पांडेय. किशोर पांडेय की हत्या के दौरान पुलिस की कमजोरियां सार्वजनिक हैं. भोला पांडेय और सुशील श्रीवास्तव की हत्या तो तब की गयी, जब दोनों पुलिस की हिरासत में थे.

किशोर पांडेय की हत्या भी तब की गयी, जब वह एक पुलिस अफसर से मिल कर घर जा रहा था. किशोर की हत्या के बाद जहां विकास तिवारी पांडेय गिरोह का हेड बन गया, वहीं सुशील श्रीवास्तव की हत्या के बाद उसका बेटा अमन श्रीवास्तव गिरोह का सरगना बना.

रेलवे कोयला साइडिंग पर बढ़ा है श्रीवास्तव गिरोह का आतंक

राज्य के रामगढ़, लोहरदगा, लातेहार, चतरा और रांची जिले में रेलवे कोयला साइडिंग पर इन दिनों आपराधिक गिरोहों का आतंक तेजी से बढ़ा है.

ये गिरोह रेलवे साइडिंग से जुड़े व्यवसायियों से रंगदारी वसूलते हैं. इनमें अमन श्रीवास्तव गिरोह सबसे ज्यादा सक्रिय है, जो उग्रवादी संगठनों की तरह पर्चा छोड़ रंगदारी की मांग करता है. यह रंगदारी नहीं मिलने पर वारदात को अंजाम देने के बाद पर्चा छोड़ कर जिम्मेदारी भी लेता है.

जेजेएमपी ने भी श्रीवास्तव गिरोह से हाथ मिलाया

कोयलांचल में वर्चस्व के लिए सुशील श्रीवास्तव गिरोह और पांडेय गिरोह आमने-सामने हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जेजेएमपी के जोनल कमांडर प्रभात, शिव, गुरु, सुशील श्रीवास्तव गुट से जुड़े हैं. जेजेएमपी नक्सली संगठन है. इसके सदस्य कई पुलिस अधिकारियों के संपर्क में हैं.

भोला पांडेय और सुशील श्रीवास्तव के बीच कई बड़े गैंगवार हुए, जिससे कोयलांचल की धरती लाल होती रही है. ये दोनों तो मारे गये, लेकिन इनके गुर्गे पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं.

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