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राजधानी का सबसे ऊंचा अपार्टमेंट बना है पहनई जमीन पर, हाई कोर्ट ने एसएआर कोर्ट के आदेश पर फैसला सुरक्षित रखा

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  • सरावगी बिल्डर्स ने पहनई जमीन पर बना दिया रांची का सबसे ऊंचा अपार्टमेंट
  • हाइकोर्ट ने दिया था मापी करने का आदेश दिया
  • 200 फ्लैटवाले अपार्टमेंट को लेकर जमीन मालिकों को लालच देने का खेल शुरू

 Ranchi: राजधानी रांची के लालपुर में सरावगी बिल्डर्स ने मुंडारी, पहनई जमीन पर श्हर का सबसे ऊंचा अपार्टमेंट बना दिया है. इस मामले में एसएआर कोर्ट ने रैयत को जमीन वापस करने का आदेश दिया है. एसएआर कोर्ट ने दो बार बिल्डर के खिलाफ फैसला दिया है. इसके बाद मामला हाइकोर्ट पहुंचा. हाइकोर्ट ने एसएआर कोर्ट  के फैसले पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा है.

कोर्ट ने दिया था मापी का आदेश

याचिकाकर्ता के एडवोकेट रुपेश कुमार सिंह ने बताया कि गलत दस्तावेज के आधार पर नन ट्रांस्फरेबल लैंड पर आलीशान इमारत बना दी गयी है. इस पर न्यायाधीश प्रमथ पटनायक ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पाहन (जनजातीयों के पुजारी) को जमीन वापस करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने जमीन की मापी करने का आदेश दिया था. जिसमें तत्कालीन सीओ एस हेरेंज ने न्यायालय में ही गलत हलफनामा दायर कर दिया था. इसके चलते वह सस्पेंड भी हुए थे.

दो सौ फ्लैट हैं अपार्टमेंट में

इस लग्जरीयस अपार्टमेंट के एक-एक फ्लैट की कीमत एक-एक करोड़ बतायी जा रही है. सरावगी बिल्डर्स रांची के ज्ञानू सरावगी और अमित कुमार सरावगी की ओर से इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत दो सौ फ्लैट बनाये गये हैं. करीब दो एकड़ जमीन पर बना अपार्टमेंट फिहलाल विवादों के घेरे में है. सूत्रों का कहना है कि बिल्डरों के द्वारा अब पाहन को अपने पक्ष में करने का लालच दिया जा रहा है, ताकि उनके द्वारा निर्मित अपार्टमेंट को बचाया जा सके.

पहनई जमीन का नहीं हो सकता व्यावसायिक उपयोग

एडवोकेट श्री सिंह ने बताया कि मुंडारी, पहनई की जमीन का किसी तरह व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता है. न ही उसकी खरीद-बिक्री हो सकती है. सरावगी बिल्डर्स के प्रमोटरों के खिलाफ एसएआर कोर्ट ने भी दो-दो बार जमीन वापस करने का आदेश दिया था. जमीन वापसी का मामला जब हाइकोर्ट पहुंचा, तो बिल्डरों ने यह तर्क दिया कि आजादी के पहले 1946 में जमीन विवाद पर समझौता हो गया था. इस पर जमीन टाइटल श्यूट भी हुआ था. हाइकोर्ट ने शहर अंचल के तत्कालीन अंचल अधिकारी एस हेरेंज को जमीन वापसी के लिए कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया था. इसमें शहर अंचल के तत्कालीन अंचल निरीक्षक और हल्का कर्मचारी ने भी जमीन के नेचर की बाबत गलत रिपोर्ट दी. इस मामले में हाइकोर्ट में हलफनामा भी दर्ज किया गया था. यहां तक कि बिल्डर और अंचल अधिकारी ने हाइकोर्ट में लिखित अंडरटेकिंग भी दी थी. पर अपार्टमेंट का निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी रहा.

सीबीआइ में भी चल रहा है मामला

सीबीआइ की तरफ से इसी वर्ष 19 जुलाई को सरावगी बिल्डर्स के ज्ञानू सरावगी, अमित सरावगी, पत्नी स्वाति सरावगी और चार्टर्ड एकाउंटेंट अनिश अग्रवाल के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गयी है. सीबीआइ की तरफ से सरावगी बिल्डर्स के अमित सरावगी, स्वाति सरावगी और अन्य के खिलाफ बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और स्टेट बैंक से मोटी रकम लेने की प्राथमिकी दर्ज की गयी है. इन पर शेल कंपनियों से कारोबार दिखा कर कर्ज लेने की पुष्टि की गयी है. शेल कंपनियों का पता श्यामपुर स्ट्रीट कोलकाता, रांची के अपर बाजार और कांके रोड के सौरभ कुंज अपार्टमेंट का दिया गया है. सीबीआइ की तरफ से इनके सभी खातों को भी फ्रीज कर दिया गया है. इस प्रोजेक्ट में राजधानी के चर्च कांप्लेक्स, एमआर टावर और अन्य जगहों पर अवस्थित बड़े व्यवसायियों ने भी पैसे लगाये हैं. पूछे जाने पर सरावगी बिल्डर्स के ज्ञानू सरावगी ने बताया कि उनका फोन सरविलेंस में है. उन्होंने कहा कि उनके बनाये अपार्टमेंट का मामला कोर्ट में चल रहा है. उन्होंने कहा कि जिनसे उन लोगों ने जमीन ली थी. उसके एवज में 16 लोगों को उचित मुआवजा दिया गया है.

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