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खरीदारों को पहले बिल्डर ने ठगा, अब RERA में भी न्याय के लिए इंतजार

Ranchi: झारखंड रियल इस्टेट रेगुलेटरी ऑथोरिटी (झारेरा) के अस्तित्व में आने के बाद खरीदारों को उम्मीद थी कि अब बिल्डर उन्हें नहीं ठग सकेंगे. अगर उन्हें ठगा भी जाएगा तो न्याय मिलेगा. लेकिन आज भी इसमें ज्यादा कुछ बदलाव देखने को नहीं मिला है. झारखंड में कई जगहों पर प्रोजेक्ट चल रहे है और लोग उसमें इंवेस्ट भी कर रहे है. लेकिन जाने-अनजाने उन्हें बिल्डर ठगने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे. जिसका खामियाजा खरीदार भुगत रहे है. लोग न्याय के लिए रेरा की शरण में पहुंचे, लेकिन वहां भी उन्हें न्याय के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. इतना ही नहीं अब इसकी भी वेटिंग लिस्ट लंबी होती जा रही है. जिससे समझा जा सकता है कि पहले तो बिल्डर ने ठग लिया अब रेरा में भी न्याय के लिए इंतजार करना पड़ रहा है.

6 माह में 600 से ज्यादा केस

रेरा में अब तक 905 प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड है. जिसमें ऑफलाइन 607 और ऑनलाइन 298 प्रोजेक्ट है. वहीं सुनवाई के लिए रेरा में अबतक 1069 केस रजिस्टर्ड हो चुके है. जिसमें एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के पास 427 केस पेंडिंग है. वहीं ऑथोरिटी के पास 642 केस लंबित है. जबकि अक्टूबर 2021 तक एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के पास 165 मामले और ऑथोरिटी के पास 165 मामले पेंडिंग थे. ऐसे में समझा जा सकता है कि हर महीने 100 नए मामले दर्ज हो रहे है. लेकिन सुनवाई की रफ्तार धीमी होने की वजह से लिस्ट लंबी हो गई है.

अपीलेट ट्रिब्यूनल के बाद भी धीमी सुनवाई

रेरा में भी कोर्ट के लिए दिन तय है. वहीं रेरा से जुड़े मामलों में सुनवाई के लिए अपीलेट ट्रिब्यूनल का भी गठन किया गया. इसके बाद भी वहां पर मामलों की सुनवाई रफ्तार नहीं पकड़ रही है. रेरा के कोर्ट में एक दिन में एक या दो मामलों से ज्यादा की सुनवाई नहीं होती. इसके बावजूद रेरा सुनवाई तेज करने को लेकर गंभीर नहीं है. जिससे साफ है कि इसी रफ्तार से रेरा में सुनवाई होती रही तो शिकायत करने वालों की संख्या और बढ़ जाएगी.

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क्या है RERA (रियल इस्टेट रेगुलेटरी एक्ट)

रियल इस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 भारत की संसद का एक अधिनियम है जो घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने और अचल संपत्ति में निवेश को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया. यह बिल राज्यसभा में 10 मार्च 2016 को और लोकसभा में 15 मार्च 2016 को पारित कर दिया गया था. 92 में से 69 अधिसूचित वर्गों के साथ 1 मई 2016 से यह अधिनियम अस्तित्व में आया. बिल्डरों, प्रमोटरों और रियल एस्टेट एजेंटों के खिलाफ शिकायतों में वृद्धि के अनुसार बनाया गया है. जिसमें खरीदार के लिए घर कब्जे में देरी, समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भी प्रोमोटरों का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार समेत अन्य समस्याएं हैं. रेरा का एकमात्र उद्देश्य खरीदारों के हितों की रक्षा के साथ ही प्रोमोटरों और रियल एस्टेट एजेंटों के लिए एक पथ रखना है ताकि उन्हें बेहतर सेवाओं के साथ आगे आने का मौका मिले.

रेरा की चेयरमैन सीमा सिन्हा ने कहा कि मामलों की सुनवाई हमलोग कर रहे है. कोर्ट के लिए डेट दी जाती है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही हम कोई निर्णय लेते है. इसमें थोड़ा टाइम तो लगता है. कई मामलों में सेटलमेंट हुआ और कुछ को मुआवजा भी दिलाया गया है. हमारी कोशिश है कि सुनवाई में तेजी लाई जाए.

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