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बूढ़ा पहाड़ घटना में हुई है बड़ी लापरवाही, समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मर गये पुलिस के दो जवान

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Ranchi: 26 जून को लातेहार के बूढ़ा पहाड़ इलाके में नक्सलियों ने पुलिस को निशाना बनाया. जिसमें छह जवान शहीद हो गये. इस घटना की सच्चाई अब धीरे-धीरे सामने आ रही है. बड़ी लापरवाही की बात सामने आ रही है. कहा जा रहा है कि नक्सली हमले में घायल दो जवानों को बचाया जा सकता था. समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण जवान देवकुमार महतो और कुंदन कुमार सिंह तड़प-तड़प कर मर गये. पुलिस के एक सूत्र के मुताबिक घटना शाम के चार बजे हुई. जिसमें चार जवानों की मौत हो गयी थी. दो घायल जवान की मौत रात के 12 बजे हो गयी. क्योंकि उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी.

घटनास्थल पर मौजूद पुलिस के अफसरों ने घटना की जानकारी भी समय पर पुलिस मुख्यालय को नहीं उपलब्ध करायी. घटना के बाद कई घंटों तक घटना की सही जानकारी पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों को नहीं थी. घटनास्थल पर मौजूद पुलिस के अफसरों ने सैटेलाईट फोन का इस्तेमाल भी नहीं किया. कुछ देर के लिए तो वायरलेस सेट भी बंद हो गया था. यही कारण है कि घायल जवानों तक समय रहते चिकित्सा सुविधा नहीं पहुंचायी जा सकी.

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घायल जवानों को रांची लाने में लग गये 18 घंटे

पुलिस मेंस एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री रमेश उरांव ने मांग की है कि अभियान के दौरान पांच जवानों के कैंप में एक चिकित्सक को रखा जाना चाहिए. ताकि किसी तरह की घटना होने पर समय पर जवानों का इलाज हो सके. जवानों से बात करने के बाद उन्होंने इस बात की पुष्टि की है कि दो जवानाेंं  की मौत घटना के करीब आठ घंटे बाद हुई. रमेश उरांव ने घटना के 18 घंटे बाद जवानों को रांची लाये जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर और कितने साजो-सामान चाहिए हमें. क्या जवानों को सिर्फ चौपर से ही बाहर निकाला जा सकता है. क्या हमें चौपर के इंतजार में हाथ पर हाथ रखे बैठे रहना चाहिए.

budha paharपुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी बताया कि बूढ़ा पहाड़ की घटना ओवर केयरलेसनेस (अत्यधिक लापरवाही) के कारण हुई है. हालांकि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि लापरवाही किस स्तर से हुई. पर पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि अभियान में लातेहार और गढ़वा के एसपी गये थे. दोनों मंडल डैम पिकेट पर थे. जवानों का नेतृत्व करने के लिए उनके साथ कोई सीनियर अफसर नहीं था. सूबेदार रैंक के एक अधिकारी जवानों का नेतृत्व कर रहे थे. कहा तो यह भी जा रहा है कि सीआरपीएफ ने अभियान पर निकलने से मना किया था. हालांकि पुलिस के कुछ अधिकारी इसे गलत बता रहे हैं.

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