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हार से पल्ला झाड़ कर उबरने की कवायद में भाजपा, मिशन 2019 की तैयारी, मंथन आज

तीन हिंदी भाषी राज्यों में लगे झटके से उबरते हुए भाजपा मिशन 2019 की तैयारी में जुटने को तैयार है. 2019 के चुनाव में भाजपा पूरी ताकत झोंकने को तैयार है.

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NewDelhi : तीन हिंदी भाषी राज्यों में लगे झटके से उबरते हुए भाजपा मिशन 2019 की तैयारी में जुटने को तैयार है. 2019 के चुनाव में भाजपा पूरी ताकत झोंकने को तैयार है. पीएम  मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पार्टी पदाधिकारियों, राज्य प्रभारियों और संगठन मंत्रियों के साथ राष्ट्रव्यापी बूथ योजना पर सात घंटे की समीक्षा करने जा रह हैं. बता दें कि हर बूथ में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तीन माह पूर्व भाजपा की दिल्ली में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में राष्ट्रव्यापी बूथ योजना तैयार की गयी थी.  इसके अलावा गुरुवार को आयोजित बैठक में 11 दिसंबर को आये पांच राज्यों के नतीजे पर भी विमर्श होगा. कहा जा रहा है कि बैठक में भाजपा नाराज अगड़ों द्वारा बड़ी संख्या में नोटा का बटन दबाने, किसानों के बीच बढ़ती नाराजगी और अचानक बढ़े कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सियासी कद के काट की रणनीति  तैयार करेगी.

भाजपा समर्थकों ने नोटा दबाया

सूत्रों के अनुसार पार्टी इस बात पर भी मंथन करेगी कि  राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में लगभग 13 लाख मतदाताओं ने नोटा को विकल्प के रूप में आजमाया.  इनमें से ज्यादातर भाजपा समर्थक मतदाता थे.  पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगर नोटा का इस्तेमाल कम हो तो तो निश्चित रूप से न सिर्फ मध्यप्रदेश की सरकार बचती, बल्कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मध्यप्रदेश की की तरह ही कांटे का मुकाबला होता.  गुरुवार को होने वाली बैठक में पीएम के भी शामिल रहने की बात कही जा रही है. सूत्रों का कहना है कि नतीजे से लगे झटके के तत्काल बाद मैराथन बैठक बुला कर मोदी-शाह पार्टी का आत्मविश्वास बनाये रखने के अलावा अभी से लोकसभा चुनाव की ठोस तैयारी शुरू कर देना चाहते हैं.

पार्टी की रणनीति दलित एक्ट को संसद में मूल स्वरूप में फिर से पारित करने से अगड़ों और राहत के अभाव केकारण किसान वर्ग में उपजी नाराजगी को दूर करने की है.  कहा जा रहा है कि मोदी सरकार किसान वर्ग को राहत देने के लिए कई अहम घोषणाएं कर सकती है. अगड़ों को साधने का कोई बड़ा सियासी दांव चल सकती है.

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