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बीजेपी को अब भी चला रहे हैं ब्राह्मण और बनिया, माइनॉरिटी को बस नाम की जगह- रिपोर्ट

पिछड़ा वर्ग पार्टी में अब भी ‘पिछड़ा’

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Ranchi: अमूमन किसी भी आदिवासी बहुल राज्य के दौरे में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह किसी ना किसी आदिवासी के घर जाकर भोजन करते हैं. जनजाति से जुड़े बड़े शख्सियत को सम्मानित करते हैं. इन सबके पीछे वजह और कुछ नहीं बल्कि यह मिथक दूर करने की कोशिश रहती हैं कि बीजेपी ब्राह्मणों और बनियों की पार्टी नहीं है, बल्कि दलित और पिछड़ों की पार्टी है.

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केंद्र की सत्ता पर काबिज होने के बाद इसमें कोई शक नहीं है बीजेपी ने देश में अपने आकार को काफी बड़ा किया है. यहां तक कि नॉर्थ ईस्ट में भी बीजेपी ने अपनी जीत के झंडे गाड़े. लेकिन हाल में ही ‘द प्रिंट’ के एक सर्वे से यह पता चल रही है कि अब भी बीजेपी पार्टी में पिछड़े वर्ग को वो जगह नहीं मिल पायी है, जिसकी वो हकदार है. सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि 36 प्रदेश अध्यक्षों में एक भी दलित नहीं है. इनमें से सात ब्राह्मण, 17 अगड़ी जाति के लोग, 6 आदिवासी, पांच ओबीसी और एक मुस्लिम है. यानी कुल 66 फीसदी पदों पर उच्च जाति के लोग काबिज हैं.

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BJP की सोशल इंजीनियरिंग पर उठते सवाल

इस रिपोर्ट के बाद बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग पर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि इस 38 साल पुरानी पार्टी ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यकों (खासकर मुस्लिम महिलाओं) के बीच अपनी कट्टर छवि को बदलने की भरपूर कोशिश की है. लेकिन संगठन की बात करें तो आज भी अगड़ी जाति ही ऊंची कुर्सियों पर बैठी हैं.

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पार्टी के अहम पदों पर ऊंची जाति का कब्जा

‘दि प्रिंट’ ने बीजेपी में दलितों, आदिवासियों, पिछड़ी जातियों और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर देशव्यापी सर्वे किया है. इस सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि अभी भी पार्टी के अहम पदों पर ऊंची जाति के लोगों का कब्जा बरकरार है. बीजेपी में जातीय संरचना के गहन अध्ययन के बाद बताया गया है कि पार्टी के पदाधिकारियों की तीन-चौथाई पदों पर ऊंची जाति का बोलबाला है. बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के भी 60 फीसदी पदों पर भी ऊंची जाति के लोगों का कब्जा है. सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश अध्यक्षों के 65 फीसदी पदों पर भी सामान्य वर्ग यानी उच्च जाति के लोग बैठे हैं. यहां तक कि बीजेपी के सबसे निचले स्तर के संगठन जिला अध्यक्षों के पद पर भी 65 फीसदी लोग उच्च जाति से ताल्लुक रखते हैं.

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सर्वे के लिए ‘दि प्रिंट’ ने बीजेपी के 50 राष्ट्रीय पदाधिकारियों, 97 राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों, 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 36 अध्यक्षों समेत 24 राज्यों के कुल 752 जिला अध्यक्षों की जातीय स्थिति का आंकड़ा जमा किया. 36 प्रदेश अध्यक्षों में एक भी दलित नहीं है. इनमें से सात ब्राह्मण, 17 अगड़ी जाति के लोग, 6 आदिवासी, पांच ओबीसी और एक मुस्लिम है. यानी कुल 66 फीसदी पदों पर उच्च जाति के लोग काबिज हैं. पूर्वोत्तर राज्यों जहां की अधिकांश आबादी आदिवासी और धार्मिक अल्पसंख्यक बौद्धों की है, वहां से सबसे ज्यादा आदिवासी प्रतिनिधित्व है.

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