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हरमू नदी के किनारे को हरा-भरा कर नहीं सकी, अब नदियों के किनारे पेड़ लगाने चली झारखंड सरकार

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Nitesh Ojha
Ranchi : झारखंड राज्य को पूरी तरह से हरा-भरा करने के लिए रघुवर सरकार पहले भी कई योजनाएं ला चुकी है. इनमें जन-वन योजना, हरमू नदी सौंदर्यीकरण जैसी योजनाएं काफी चर्चित रही हैं. इसी कड़ी में सोमवार को मुख्यमंत्री ने एक और ‘नदी महोत्सव जन अभियान’ की शुरुआत की. योजना का मकसद नदी के किनारे करोड़ों पौधे लगाकर आसपास के इलाकों में हरियाली लाना है. लेकिन वास्तविकता यह है कि राज्य में पौधारोपण से जुड़ीं कई योजनाओं का हाल खस्ता है. खासकर मुख्यमंत्री रघुवर दास के ड्रीम प्रोजेक्ट हरमू नदी के सौंदर्यीकरण की योजना का हाल तो काफी खराब है. इस योजना के तहत नदी सौंदर्यीकरण के लिए चारों तरफ हरे-भरे पौधे लगाये जाने थे. योजना के तहत कई पौधे लगाये भी गये, लेकिन पौधों की सही देखभाल नहीं हो पाने के कारण या तो सभी पौधे सूख गये हैं या टूटकर गिर गये हैं. दूसरी ओर योजना के कार्य में लगे जुडको के अधिकारी इस दुर्दशा का दोष आसपास रहनेवाले लोगों पर ही थोप रहे हैं.

हरमू नदी 

नदी मोहत्सव 

वर्ष 2015 में हरमू नदी सौंदर्यीकरण कार्य का हुआ था शिलान्यास

मालूम हो कि मुख्यमंत्री रघुवर दास और नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने संयुक्त रूप से हरमू नदी के सौंदर्यीकरण कार्य का शिलान्यास 15 मार्च 2015 को किया था. इसके तहत नदी के किनारे फूल-पौधे और सोलर लाइट लगाने की योजना काफी चर्चित रही थी. हालांकि, सोलर लाइट लगाने का काम तो काफी हद तक हो चुका है, लेकिन नदी के किनारे जितने भी पौधे लगाये गये हैं, उनमें आधे से अधिक टूटने के कगार पर हैं. यहां तक कि पौधों को लगाने के बाद उनका चारों तरफ से घेराव भी किया गया था, लेकिन फिर भी इन पौधों की स्थिति काफी खराब है.

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अधिकारी कहते हैं लोगों ने पौधों को उखाड़कर किया बर्बाद

हरमू नदी के किनारे सौंदर्यीकरण के लिए लगाये गये पौधों की दुर्दशा पर झारखंड अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (जुडको) के अधिकारियों का कुछ और ही कहना है. अधिकारियों के मुताबिक, जुडको ने तो नदी सौंदर्यीकरण कार्य के लिए कई इनिशिएटिव्स लिये हैं, लेकिन आसपास के लोगों ने ही उन पौधों को तोड़कर बर्बाद कर दिया. कई लोग तो उन पौधों को उखाड़कर अपने घर ले गये. हालांकि, अधिकारियों के बयान से यह बात भी जाहिर होती है कि उनकी लापरवाही इस स्थिति के लिए भी कम जिम्मेदार नहीं है. कारण यह है कि पौधों को लगाने के बाद उनकी सुरक्षा की कोई उचित व्यवस्था नहीं की गयी.

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जन-वन योजना का हाल भी था बुरा

इससे पहले मुख्यमंत्री जन-वन योजना की शुरुआत सीएम रघुवर दास ने वर्ष 2015 के नवंबर में किया था. हालांकि, योजना का विधिवत कार्यान्वयन वित्तीय वर्ष 2016-17 में शुरू हुआ. आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान पूरे वर्ष में कुल 3,33,030 पौधे लगाये गये. वर्ष 2017-18 में यह आंकड़ा घटकर आधे से भी कम 1,40,269 पर पहुंच गया. बाद में योजना का यह हश्र देखते हुए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने प्रोत्साहन राशि को 75 फीसद तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया, जिसे सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी थी.

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नदी महोत्सव जन अभियान के तहत पहले दिन लगे नौ लाख पौधे

इसी कड़ी में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सोमवार को नदी महोत्सव जन अभियान की शुरुआत की. इसके तहत पूरे राज्य में करीब 2.40 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है. उद्घाटन के ही दिन राज्य से 24 जिलों की 24 नदियों के किनारे करीब नौ लाख पौधे लगाये गये हैं. अब देखना है कि इस योजना का हाल भी हरमू नदी सौंदर्यीकरण योजना जैसा होता है या पौधों के साथ यह योजना भी फलती-फूलती दिखेगी.

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