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2022 तक देश के सभी कॉलेजों के नैक मूल्यांकन का लक्ष्य

कार्यशाला में शामिल हुए 375 कॉलेजों के प्राचार्य एवं प्रतिनिधि

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Ranchi: परीक्षाफल के माध्यम से छात्रों की गुणवत्ता का आकलन किया जाता हैं. इसी तर्ज पर कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों के मूल्यांकन के लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (नैक) ग्रेडिंग जरूरी है. उक्त बातें बतौर मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने नैक की कार्यशाला के दौरान कही. उन्होंने कहा कि कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक शैक्षिणक कैलेंडर बनना चाहिए. ताकि छात्रों को शिक्षा प्रदान करने की योजना पहले से शैक्षिणक कैलेंडर में शामिल किया जा सके. राज्य सरकार राज्य के सभी उच्चत्तर शिक्षा संस्थानों को अनुदान देकर आधारभूत संरचना प्रदान कर रही है. लेकिन सही रूप से उनका उपयोग संस्थान नहीं कर पा रहे हैं. इस वजह से शिक्षा की गुणवत्ता में कमी देखने को मिल रही है. नैक मूल्यांकन के माध्यम से सरकार को यह रिपोर्ट कार्ड मिल सकेगा कि किन संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बेहतर कार्य किये जा रहे हैं. किसी संस्थान को सरकारी अनुदान की जरूरत है. राज्य स्तरीय नैक कार्यशाला के दौरान राज्य से लगभग 375 कॉलेजों के प्राचार्य एवं संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं. कार्यशाला का आयोजन उच्च तकनीक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की ओर से किया गया था. इसमें नैक मूल्यांकन के लिए संस्थानों की आहर्ता एवं मूल्यांकन की विधि पर चर्चा की गयी. नैक रिजनल डाइरेक्टर डॉ बीएस पोमोली राज ने कॉलेजों के नैक मूल्यांकन संबंधी जानकारी प्राचार्यो को दी.

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क्या था कार्यशाला का उद्देश्य

नैक की कार्यशाला के माध्यम से राज्य सरकार झारखंड के सभी उच्चत्तर शैक्षिणक संस्थानों को मूल्यांकान 2019 तक करना चाहती है. केंद्र सरकार ने देश के सभी संस्थानों को 2022 तक नैक मूल्यांकन करने के लक्ष्य राज्यों को दिया है. इसी दिशा में राज्य सरकार ने पहल करते हुए नैक एवं विभाग के संयुक्त तत्वाधान में प्रोजेक्ट भवन स्थित सभागार में राज्य के सभी कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया था. ताकि संस्थानों के प्रतिनिधि नैक मूल्यांकन के तरीके जान सकें. इस आयोजन में उप-निदेशक सुनील चौधरी,  संजीव चतुर्वेदी, नितेश कुमार,  अशोक चौधरी समेत विभाग के अधिकारी एवं झारखंड राय यूनिवर्सिटी की कुलपति सविता सेंगर मुख्य रूप से शामिल रहीं.

किसने क्या कहाः

अधिकतर निजी संस्थानों ने नहीं कराया मूल्यांकनः सचिव

उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास के सचिव राजेश कुमार शर्मा ने कहा राज्य के 77 फीसदी सरकारी कॉलेजों का नैक मूल्यांकन हुआ, लेकिन राज्य स्तर पर यह आंकड़ा कम है. राज्य में ऐसे निजी शैक्षिणक संस्थानों की संख्या ज्याद है जिन्होंने अबतक नैक मूल्यांकन नहीं कराया है. ऐसे संस्थान प्रशिक्षण लेकर जल्द से जल्द नैक मूल्यांकन कराएं.

कॉलेज करें नैक मूल्यांकन के लिए सहयोगः रमेश पांडेय

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रांची विश्वविद्यालय के कुलपपि प्रो रमेश कुमार पांडेय ने कहा जिन कॉलेजों का नैक मूल्यांकन हो गया है वो उन कॉलेजों को सहयोग करें जिनका नैक मूल्यांकन नहीं हुआ है. कॉलेज नैक मूल्यांकन हो चुके कॉलेजों एवं विश्वविद्यालय से मदद ले सकते हैं. ताकि उनका मूल्यांकन समय से हो सके जिनको कम ग्रेडिंग मिली है.

गरीब छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना संस्थानों की प्रथमिकताः रमेश शरण

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रमेश शरण ने कहा कि झारखंड के कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में ऐसे गरीब छात्र पढ़ने आते हैं जो आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है. पैदल यात्रा कर लंबी दूरी तय कर वो संस्थानों में पढ़ने आते हैं. बतौर शिक्षक अगर हम उनको बेहतर शिक्षा प्रदान नहीं कर रहे तो हमारी विफलता है. नैक मूल्यांकन के माध्यम से ग्रामीण स्तर के संस्थनों को बच्चों के अनुसार आनंदमय बनाया जा सकता है. इसके लिए रूसा जैसे संस्थान मदद करने को आगे हैं. वहीं सही प्रबंधन कैशल तकनीक से संस्थान शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार कर सकते हैं.

नैक मूल्यांकन को लेकर केवल बीएड कॉलेज गंभीरः नैक डायरेक्टर

नैक रिजनल डायरेक्टर डॉ बीएस पोमोली राज ने कहा कि झारखंड में बीएड कॉलेज नैक मूल्यांकन को लेकर गंभीर हैं. राज्य के लगभग सौ बीएड कॉलेजों ने नैक मूल्यांकन कराया है. निजी तकनीकी संस्थान एवं कॉलेज इसमें पिछड़े हैं. जगरूकता के अभाव में कई संस्थानों ने अबतक नैक मूल्यांकन हेतु पहल नहीं की है. नैक द्वारा राज्य के सभी संस्थानों को मूल्यांकन के लिए सुझाव और टिप्स दिये जाते हैं.

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