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CRPF द्वारा प्रशिक्षत लातेहार के बेरोजगार 87 आदिवासी युवा नक्सली दस्ते में होंगे शामिल !

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Manoj Dutt Dev
Latehar: झारखंड के अति नक्सलग्रस्त जिलों में शामिल लातेहार के युवाओं के सामने सवाल है कि अब वो करें क्या? सीआरपीएफ द्वारा प्रशिक्षित 87 आदिवासी बेरोजगार युवक, इस यक्ष प्रश्न से परेशान होकर नक्सली दस्ते में शामिल होने की बात कर रहे हैं. नक्सली दस्ते में शामिल होने का कारण ये अपनी विवशता बता रहे हैं. और इस विवशता के पीछे सीआरपीएफ में बहाली को लेकर पहले चलाये गये अभियान और बाद में जिले के 87 आदिवासी युवाओं की बहाली ना करना बताया जा रहा है.

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2013 में नक्सल मुक्त राज्य के लिए शुरु हुई थी बहाली

दरअसल, सरकार द्वारा नक्सल मुक्त जिला एवं राज्य को बनाने के लिए राज्य के आठ जिलों में साल 2013 में सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी एवं एसएसबी में विशेष बहाली की थी. जिसमें लातेहार के पहाड़ी इलाकों खासकर अति नक्सलग्रस्त इलाकों के युवाओं ने भाग लिया था.

हालांकि, माओवादियों ने इस बहाली में क्षेत्र के युवाओं को भाग नहीं लेने का फरमान जारी किया था. बावजूद इसके आदिवासी युवाओं ने जान-जोखिम में डालकर बहाली में भाग लिया. बहाली में सीआरपीएफ द्वारा प्रशिक्षित 87 युवा फिजिकल टेस्ट पास करने के साथ-साथ बेहतर अंक भी लाए थे. बावजूद इसके अर्ध सैनिक बल में इनकी नियुक्ति नहीं हुई.

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नक्सली दस्ते में शामिल होने को मजबूर 87 आदिवासी युवा

सरकार की नीतियों से खफा इन 87 आदिवासी युवाओं ने 18 अगस्त की शाम को बैठक की. दो दिन तक जिला मुख्यालय स्थित पहाड़पूरी ग्राम के पारहा भवन में चली बैठक में युवाओं ने समस्या को लेकर मंथन किया. बाद में न्यूज विंग के संवाददाता से बात करते हुए इन आदिवासी युवाओं ने कहा कि हमारी समस्या सुनने वाला आज कोई नहीं है. हम अपनी हक की लड़ाई लड़ रहे हैं.

मामले को लेकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री से लेकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति मंत्रालय (भारत सरकार), डीजीपी डीके पाण्डे, समेत कई मंत्रियों को अपनीआप बीती सुनाते हुए आवेदन दिया गया. लेकिन आज तक किसी तरह की पहल नहीं हुई, ना हीं किसी ने कोई कार्रवाई की. इस परिस्थिति में हम युवा नक्सल बटालियन में शामिल होने को मजबूर हो गए है.

अब भी 88 पद रिक्त, लेकिन 87 युवाओं की नहीं हुई नियुक्ति

झारखंड को नक्सलमुक्त राज्य बनाने को लेकर कुल 2272 बहाली निकाली गई थी, जिसमें लातेहार में 284 रिक्तियां निकाली गई. जिसमें पहली सूची में 150 अभ्यार्थियों का चयन हुआ, दूसरी सूची में 29 कैंडिडेट का चयन हुआ. वही अंतिम तीसरी सूची में मात्र 17 अभ्यार्थियों का चयन हुआ. जबकि 88 पद रिक्त रह गये. लेकिन बहाली प्रक्रिया में पास हुए चयनित 87 आदिवासी युवाओ की नियुक्ति नहीं की गयी.

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बहाली में हुई अनियमितता !

इस नियुक्ति प्रकिया में आदिवासी युवाओं के साथ भारी अनिमियता बरतने का आरोप है. आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेज में लिखित परीक्षा में पास अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थी को न्यूनतम 39 और अधिकतम 66 अंक प्राप्त करने थे, जबकि जेनरल केटेगिरी के अभ्यर्थी ने लिखित परीक्षा में न्यूनतम 44 अंक प्राप्त किया और नियुक्ति हो गयी. वही 39 से 66 अंक प्राप्त करने वाले आदिवासी युवाओं की नियुक्ति नहीं हुई.

आदिवासियों के साथ अन्याय क्यों ?

एक ओर सरकार कहती है कि नक्सली संगठन आदिवासी युवाओं का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें गुमराह करते हैं. लेकिन सरकार द्वारा की गई अनदेखी से जिले के आदिवासी युवा हताश हैं. लातेहार में हुई 2013 में विशेष बहाली में आदिवासी अभ्यर्थी को न्यूनतम 66 और 67 अंक से ऊपर में नियुक्ति किया गया. जबकि अन्य पिछड़ी जाति की 45-46 अंक से ऊपर नियुक्ति हुई, एससी एवं सामान्य कोटे को 44-45 अंक से अधिक पर नियुक्त किया गया.

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बहाली के पूर्व 87 युवा सक्षम तो बाद में अक्षम कैसे ?

वही युवाओं ने सनसनी खेज खुलासा करते हुए बताया कि बहाली के पूर्व लातेहार में तैनात सीआरपीएफ 214 बटालियन के अधिकारियों ने हम 87 युवाओं को भर्ती के लिए सक्षम बताकर अपने कैम्प में प्रशिक्षण दिया था और भर्ती प्रक्रिया में सीआरपीएफ 214 बटालियन के अधिकारी ही शामिल थे तो ये 87 युवा कैसे अक्षम हो गए ?

आदिवासी युवाओं के सरकार से सवाल

2013 में सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीबी एवं एसएसबी की विशेष बहाली में अब भी 88 सीट खाली है, फिर क्यों 87 योग्य युवाओं का चयन नहीं किया गया ?
अन्य पिछड़ी जाति के लिए 44 अंक, अनुसूचित जाति के लिए 44 अंक एवं सामान्य जाति के लिए भी 44 अंक पर नियुक्ति हुई तो क्यों अनुसूचित जनजाति के लिए 66 अंक पर नियुक्ति कैसे ली गई?
विशेष बहाली में साईट खाली रखने का क्या मतलब है ?
क्या सरकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति को नक्सली बनने पर मजबूर कर रही है ?
CRPF 214 बटालियन ने 87 युवाओं को 30 दिन का प्रशिक्षण क्यों दिया जब बहाली लेनी नहीं थी तो?
केंद्र एवं राज्य सरकार आदिम जनजाति एवं अनुसूचित जनजाति के साथ दोहरी नीति क्यों अपना रही है?

नक्सली दस्ते में शामिल हुए तो क्या होगा ?

सरकार की नीतियों एवं भेदभाव से त्रस्त लातेहार के 87 आदिवासी युवा अगर अपनी धमकी को सही साबित करते हैं और समय रहते सरकार ने यदि इन युवाओं की ओर ध्यान नहीं दिया, तो लातेहार जिला में दम तोड़ते नक्सल आन्दोलन को बड़ी हवा मिल सकती है एवं नक्सली संगठन को नई ऊर्जा मिल सकती है.

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