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11 वर्षों में ठनका ने लील ली 1700 जिंदगियां, जानिये कैसे मिल सकता है मुआवजा

Ranchi: 11 वर्षों में झारखंड में ठनका ने 1700 जानें ले ली हैं. आपदा प्रबंधन की आंकड़ों को देखें तो वज्रपात से सबसे ज्यादा 265 मौतें वर्ष 2016-17 में हुई हैं. हालांकि, सरकार की ओर से वज्रपात से बचाव के उपाय भी किये जा रहे हैं. गांवों व शहरों में इसको लेकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है. लेकिन, गांवों में अभी भी इसका व्यापक असर देखने को नहीं मिल रहा है. गांव में आज भी वज्रपात से मौतें हो रही हैं. लेकिन, आंकड़े घट रहे हैं. वर्ष 2020-21 में जून माह में अब तक 22 मौतें हो चुकी हैं.

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हाल में वज्रपात से 9 लोगों की जानें गईः

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झारखंड में हाल ही वज्रपात से 9 लोगों की जानें गईं हैं. इनमें खूंटी जिले में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई. ये सभी एक पेड़ के नीचे खड़े थे.

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प्राकृतिक आपदा को लेकर छह करोड़ का प्रावधान

प्राकृतिक आपदा को लेकर सरकार ने इस वर्ष छह करोड़ का प्रावधान किया है. प्रत्येक जिलों के लिए 25-25 लाख रुपये आंवटित किये गये हैं.

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किस वर्ष कितने लोगों की मौत

वित्तीय वर्ष मौत की संख्या

2010-11 110
2011-12 104
2012-13 148
2013-14 159
2014-15 144
2015-16 210
2016-17 265
2017-18 256
2018-19 172
2019-20 117
2020-21 22

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ऐसे ले सकते हैं मुआवजा

वज्रपात से प्रभावित व्यक्ति या संपत्ति के मुआवजे का भुगतान के लिए प्राथमिकी (एफआइआर) और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का होना आवश्यक है. इसके अलावा अंचल अधिकारी या जिले के आपदा प्रबंधन अधिकार या उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर मुआवजा या राहत के लिए अविलंब संपर्क करना चाहिए. तभी समय पर मुआवजे का भुगतान हो सकेगा.

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क्या है मुआवजे का प्रावधानः

वज्रपात से एक व्यक्ति की मौत पर उनके आश्रित को चार लाख का मुआवजा.
प्रति घायल को 4300 से अधिकतम दो लाख रुपये तक (घायल की स्थिति के अनुरूप).
कच्चे या पक्के घर के पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने पर प्रति मकान 95,100 रुपये.
झोपड़ियों की क्षति पर प्रति झोपड़ी 2,100 रुपये.
दुधारू गाय, भैंस की मौत पर प्रति पशु 30 हजार रुपये.
बैल, भैंसा जैसे पशु की मौत पर प्रति पशु 25 हजार रुपये.
भेड़ व बकरी सहित अन्य की मौत पर प्रति पशु तीन हजार रुपये.

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झारखंड में आए दिन वज्रपात से लोगों की जान जा रही है, लेकिन कुछ सावधानियां बरत कर ऐसे हादसों को टाला जा सकता है.

वज्रपात से बचने के लिए उपायः

1. बिजली के तार, पेड़ और मोबाइल टॉवर से दूर रहें
2. मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें.
3. बिजली की तेज आवाज सुनाई दे तो नीचे बैठ जाएं.
4. एक से ज्यादा लोग हैं तो दूरी बनाकर रखें.
5. धातु से बने सामान से खुद को दूर रखें.
6. बिजली कड़कने के समय पेड़ के नीचे न बैठें.
8. बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल ना करें.
9. तालाब के किनारे या पानी भरे खेत में न जाएं.
10. लकड़ी के डंडे वाली छतरी का इस्तेमाल करें.
11. चमड़ा या प्लास्टिक के जूते का इस्तेमाल करें.

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