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संसद में बंदरों का आतंक, लोकसभा सचिवालय ने सर्कुलर निकाला, क्या करें, क्या न करें  

लोकसभा सचिवालय द्वारा 12 नवंबर को निकाले गये इस सर्कुलर में बंदरों से बचने के कई उपाय सुझाये गये हैं.

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 NewDelhi :  संसद का एक माह लंबा शीतकालीन सत्र 11 दिसंबर से शुरू हो रहा है. लेकिन लोकसभा सचिवालय के माथे पर बल पड़ रहे हैं.  खबरों के अनुसार वर्तमान समय में देश को चलाने वाली संसद में बंदरों  का आतंक छाया हुआ है.  शीतकालीन सत्र को देखते हुए संसद भवन परिसर में सभी सांसदों, अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षाबलों और मीडिया कर्मियों को बंदरों से बचाने के लिए लोकसभा सचिवालय को बाकायदा एक सर्कुलर निकालना पडा है. बता दें कि लोकसभा सचिवालय द्वारा 12 नवंबर को निकाले गये इस सर्कुलर में बंदरों से बचने के कई उपाय सुझाये गये हैं. संसद भवन परिसर और इसके आसपास की इमारतों के अलावा, राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक पर बंदरों द्वारा हमले होने की बात आम हो चुकी है. इसी को ध्यान में रखते हुए सर्कुलर जारी किया गया है.

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बंदरों की आंखों से आंखें ना मिलायें

सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरों की आंखों से आंखें ना मिलायें, अगर बंदर मां और बच्चा चल रहे हों तो उनके बीच में से रास्ता क्रॉस ना करें, बंदरों को ना छेड़े या परेशान ना करें उनको अकेला छोड़ दें, वह आप को अकेला छोड़ देंगे बंदरों का समूह अगर कहीं से निकल रहा हो तोआराम से पैर रखकर चलें भागे नहीं,  मरे हुए या घायल बंदर के पास ना जायें,  बंदरों को कुछ भी खाने को ना दें, अगर बंदर आपके वाहन से टकरा जाये तो वहां पर रुके नहीं,  अगर बंदर खो खो की आवाज निकाले तो डरे नहीं आमतौर पर धोखा होता है, इसको नजरअंदाज करें और शांति से निकल जायें, कभी बंदर को ना मारे हमेशालाठी जमीन पर मारे जिससे बंदर आपका घर या गार्डन छोड़कर निकल जाये,  तेज आवाज बंदर को मजबूर करती है कि वह किसी भी इलाके को छोड़ कर चला जाये.

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  10 साल में 20 हजार से अधिक बंदर हो गये

24 जुलाई को राज्यसभा में इंडियन नेशनल लोकदल के सांसद रामकुमार कश्यप ने बंदरों की समस्या का मुद्दा उठाया था. कश्यप अपना दुखड़ा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को सुनाते हुए कहा था कि दिल्ली में बंदरों की समस्या बढ़ गयी है. बताया कि गीले कपड़े बाहर सुखाना मुश्किल हो गया है. बंदर या तो कपड़े फाड़ देते हैं या लेकर भाग जाते हैं. पेड़-पौधे भी तोड़ देते हैं.  जानकारी दी कि एक सांसद बैठक के लिए लेट हो गये क्योंकि बंदरों ने उन पर हमला कर दिया था. इस क्रम में राज्यसभा सांसद की बात से सहमत होते हुए  वैंकेया नायडू ने कहा कि उपराष्ट्रपति के घर पर भी यह समस्या है.  इससे पूर्व बंदरों के हमलों से बचने के लिए यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा-वृंदावन वासियों को सुझाव दिया था कि वे हनुमान जी की नियमित पूजा करें व हनुमान चालीसा का पाठ करें, जिससे बंदर उन्हें नुकसान नहीं पहुंचायेंगे.

बता दें कि बीते साल भर में बंदर के काटने के लगभग एक हज़ार मामले सामने आये. साल 2013-14 में तीनों दिल्ली नगर निगम में कुल 1071 बंदर पकड़े गये. साल 2017-18 में कुल 189 बंदर पकड़े गये. बंदरों को पकड़कर दक्षिणी दिल्ली के असोला वन्य जीव अभ्यारण्य में छोड़ा जाता है. जानकारी के अनुसार दिल्ली में  2007-2008 में लगभग छह हज़ार बंदर थे जो 10 साल में 20 हज़ार से ज़्यादा हो गये हैं

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