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असम-मिजोरम में तनाव: जानें क्या है दोनों राज्यों के बीच विवाद की पृष्ठभूमि

New Delhi: असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद और भी भड़कता जा रहा है. दोनों राज्यों के बॉर्डर पर असम के सुरक्षाबलों और मिजोरम के नागरिकों के बीच झड़प हुई हैं. कछार जिले में सीमा के पास हुई फायरिंग में असम पुलिस के छह जवानों की मौत हो गई है. इस विवाद का इतिहास पुराना है. दरअसल, औपनिवेशवादी काल के दौरान मिजोरम, असम का एक जिला हुआ करता था, जिसे तह लुशाई हिल्स के नाम से जाना जाता था. मिजोरम राज्य अधिनियम 1986 के जरिए साल 1987 में मिजोरम को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था. असम साल 1950 में भारत का संवैधानिक राज्य बना था और 1960 व 1970 के दशक की शुरुआत में नए राज्य बनने से इसके पास से भूमि का बड़ा हिस्सा निकल गया. दोनों राज्यों के बीच चल रहा सीमा विवाद इसी औपनिवेशिक काल से चला आ रहा है जब ब्रिटिश राज की प्रशासनिक जरूरतों के मुताबिक अंदरूनी सीमाओं में बदलाव किया गया था.

लुशाई हिल्स (अब का मिजोरम) पहले असम का जिला हुआ करता था

सीमांकन के लिए पारित इन अधिसूचनाओं में से पहली, 1875 की अधिसूचना है, जिसने लुशाई हिल्स को कछार के मैदानी इलाकों से अलग किया. दूसरी, 1933 की अधिसूचना जिसने लुशाई हिल्स और मणिपुर के बीच सीमा तय की. मिजोरम का मानना है कि सीमा का निर्धारण 1875 की अधिसूचना के आधार पर होना चाहिए जो बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन अधिनियम 1973 से निकली थी. मिजोरम के नेता 1933 की अधिसूचना को स्वीकार नहीं करते हैं. उनका कहना है कि इसमें मिजोरम के समाज से सलाह नहीं ली घई थी. वहीं, असम सरकार 1933 के सीमांकन को स्वीकार करती है. इसी के परिणाम स्वरूप दोनों राज्यों के बीच विवाद चला आ रहा है.

 

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इस घटना के बाद दोनों प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने पीएमओ से इस मामले में दखल देने की मांग की है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ट्वीट कर कहा कि मुझे यह सूचित करते हुए बहुत दुख हो रहा है कि असम-मिजोरम सीमा पर हमारे राज्य की संवैधानिक सीमा की रक्षा करते हुए असम पुलिस के छह बहादुर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी है. शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना.

 

गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह ने एक दिन पहले ही पूर्वोत्तर में राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सीमा विवाद को लेकर शिलांग में बैठक की थी. इसमें असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख शामिल हुए थे.

सोमवार को मिजोरम के सीएम जोरमथंगा ने पुलिस और नागरिकों के बीच झड़प का एक वीडियो गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए ट्वीट किया और इस मामले पर तुरंत कार्रवाई करने की मांग की. उन्होंने एक अन्य वीडियो ट्वीट किया है. इसमें एक गाड़ी के शीशे टूटे हुए दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने वीडियो के साथ लिखा है, “मिजोरम लौट रहे निर्दोष लोगों के साथ गुंडागर्दी की गई है. इस तरह की हिंसक घटनाओं को आप कैसे जस्टिफाई करेंगे.”

 

वहीं असम के सीएम हिमंता बिस्‍वा सरमा ने ट्विटर पर लिखा, माननीय जोरमथंगा जी, कोलासिब (मिजोरम) के एसपी ने हमसे कहा है कि जब तक हम अपनी पोस्ट से पीछे नहीं हट जाते तब तक उनके नागरिक सुनेंगे नहीं और हिंसा नहीं रोकेंगे. ऐसे हालात में सरकार कैसे चला सकते हैं?’ इसके बाद उन्‍होंने अमित शाह और प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए लिखा है, ‘आशा है कि आप जल्‍द से जल्‍द दखल देंगे.’

असम पुलिस ने मिजोरम के मुख्यमंत्री के आरोपों का प्रतिवाद करते हुए कहा कि मिजोरम के लोगों ने इसके कर्मियों पर हमला किया और पथराव किया. इसने ट्वीट किया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मिजोरम से काफी संख्या में बदमाशों ने पथराव किया और असम सरकार के अधिकारियों पर हमले किए, जो ललितपुर में असम की जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए ठहरे हुए हैं. असम पुलिस ने भी कहा कि हम तोड़फोड़ की इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हैं और असम की सीमा की रक्षा करने के अपने संकल्प को दोहराते हैं.

 

असम के मुख्यमंत्री ने शेयर किया जश्न का वीडियो

ममला उस समय और तुल पकड़ लिया जब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपने ट्विटर हैंडल से एक वीडियो शेयर किया. इस वीडियो में मिजोरम पुलिस के जवानों के जश्न मनाते हुए दिखाया गया है. वे स्थानीय लोगों से हाथ मिला रहे हैं और एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं. सरमा ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा ‘असम के 5 पुलिस कर्मियों की हत्या और कई को घायल करने के बाद मिजोरम पुलिस और गुंडे ऐसे जश्न मना मना रहे हैं. दुखद और भयावह.’

 

वर्तमान विवाद की यहां से हुई शुरुआत

असम-मिजोरम सीमा पर स्थिति जून के अंत से तनावपूर्ण बनी हुई है जब असम पुलिस ने कथित तौक पर एतलांग हनार नामक इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया था. यह जगह वेयरेंगटे से पांच किमी दूर है. मिजोरम ने असम पर अतिक्रमण का आरोप लगाया था. मिजोरम के तीन जिले (आइजल, कोलासिब और ममित) असम के कछार, करीमगंज और हेलाकांडी जिलों से करीह 164.4 किमी की सीमा साझा करते हैं. 30 जून को मिजोरम ने आरोप लगाया था कि असम ने कोलासिब में हमारी जमीन पर अतिक्रमण किया है. असम के अधिकारियों का मिजोरम पर आरोप है कि उसने हेलाकांडी में 10 किमी अंदर पान सुपारी व केले के पौधे लगाए हैं और इमारतें बनाई हैं.

 

 

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