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भवन निर्माण में 25 करोड़ तक का टेंडर अब स्थानीय ठेकेदारों को ही, प्रस्ताव पर सीएम ने दी सहमति

भवन निर्माण विभाग के बनाए इस प्रस्ताव को अब कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा, शर्तें- डीसी/एसडीओ या सक्षम प्राधिकार से जारी स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र करना होगा जमा

Ranchi  :  विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सत्तारूढ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कई चुनावी वादें किये थे. इन वादों में सबसे महत्वपूर्ण 25 करोड़ रूपये तक का टेंडर स्थानीय ठेकेदारों को दिया महत्वपूर्ण था. उस दिशा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कदम बढ़ा दिये हैं. बुधवार को उन्होंने भवन निर्माण विभाग के उस प्रस्ताव पर सहमति दे दी है, जिसके तहत विभाग में 25 करोड़ रूपये लागत वाली सभी ठेके को स्थानीय ठेकेदारों को दिया जाना है. सीएम के प्रस्ताव पर सहमति के बाद अब यह प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा.

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स्थानीय निवासियों की भागीदारी करना है सुनिश्चित 

मुख्यमंत्री के इस निर्देश के पीछे की मंशा यही है कि किसी भी तरह के टेंडरों में स्थानीय निवासियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए. इससे जहां उन्हें रोजगार का उचित अवसर प्रदान कर उनका सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान किया जाए सकेगा. सरकार का मानना है कि केवल सरकारी नौकरियों से ही नहीं बल्कि कई योजनाओं से भी रोजगार सृजन के कामों को आगे बढ़ाना है.

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ठेकेदारों को पूरी करनी होगी यह शर्त

25 करोड़ के इस टेंडर के लिए विभाग के प्रस्ताव में कई शर्तों को भी तय किया है. कहा गया है कि ठेकेदारों के प्रोपराइटरशिप फर्म होने की स्थिति में उसका स्थायी पता झारखंड का होना चाहिए. वहीं ठेकेदारों के पार्टनरशिप फर्म होने की स्थिति में पार्टनरशिप फर्म का रजिस्ट्री भी रजिस्ट्रेशन कार्यालय झारखंड का होना चाहिए. इसी तरह से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का रजिस्ट्रेशन कार्यालय भी झारखंड होना चाहिए.

यदि टेंडर में भाग लेने वाली कंपनी किसी अन्य कंपनी की सब्सिडियरी कंपनी है तो होल्डिंग कंपनी का रजिस्ट्रेशन भी झारखंड का होना चाहिए. ज्वाइंट वेंचर द्वारा टेंडर में भाग लेने की दशा में ज्वाइंट वेंचर के लीड पार्टनर का स्थायी पता भी झाऱखंड होना चाहिए. ठेकेदारों को उपरोक्त का लाभ लेने के लिए अपने रजिस्ट्रेशन  प्रमाण पत्र में पता बदलने की अनुमति नहीं होगी.

साथ ही उसे डीसी, एसडीओ या सक्षम प्राधिकार से जारी स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र भी टेंडर लेने समय अपलोड करना जरूरी होगा.

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टेंडर के लिए ठेकेदारों के प्राथमिकता का भी निर्धारण

यदि किसी टेंडर में दो या दो से अधिक ठेकेदार का इंवेस्टमेंट राशि/ दर समान हो एवं वे स्थानीय हों तो क्रमशः अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, बीसी एक , बीसी 2 और सामान्य कोटि के क्रम में ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाएगी. टेंडर में भाग लेने वाले ठेकेदारों के उपरोक्त क्रमानुसार राशि दर समान होने की स्थिति में स्थानीय जिलास्तरीय रजिस्ट्रेशन वाले ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाएगी. जिला स्तरीय ठेकेदार नहीं होने की स्थिति में राज्य स्तरीय ठेकेदारों को प्राथमिकता मिलेगी.

यदि टेंडर में दो या दो से अधिक ठेकेदारों का इंवेस्टमेंट राशि दर समान हो और वे स्थानीय होने के साथ-साथ समान कोटि के हो तो रजिस्ट्रेशन में वरीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाएगी. प्राथमिकता के आधार पर किसी भी ठेकेदारों को एक वित्तीय वर्ष में एक ही बार टेंडर आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी. उपरोक्त शर्तों पर आमंत्रित किए जाने वाले टेंडर में यह केवल दो बार तक ही मान्य होगा. इसके उपरांत टेंडर के लिए ठेकेदारों के नहीं मिलने की स्थिति में सामान्य टेंडर शर्तों के अनुरूप ही ठेकेदार टेंडर में भाग ले सकेंगे.

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