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बोकारो थर्मल में 72 फीसदी कम रेट पर आबंटित किया गया वाटर पैकेज का टेंडर, डीवीसी अध्यक्ष से जांच की मांग

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Bermo: बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के 500 मेगावाट के पावर प्लांट में वाटर पैकेज के लगभग 33 लाख रुपये के टेंडर को 72 फीसदी कम रेट पर संवेदक को आबंटित किया गया. कार्य आबंटन के बाद काम कैसे होगा तथा इसके प्राक्लन (स्टीमेट) को लेकर संशय बरकरार है. दूसरी ओर पूरे टेंडर मामले को लेकर पावर प्लांट की यूनियन यूसीडब्ल्यूयू के अध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह ने डीवीसी के अध्यक्ष एवं सीवीओ से जांच की मांग की है.

क्या है मामला

डीवीसी बोकारो थर्मल के ए पावर प्लांट अंतर्गत एमएस टू के तहत एआरसी के अंतर्गत मैकनिकल मेंटनेंस आफ वाटर पैकेज के 32 लाख 92 हजार 612 रुपया 38 पैसे रुपये का काम टेंडर नंबर-00002 दिनांक-27 फरवरी 2018 के तहत निकाला गया. कम रेट डाले जाने के कारण उपरोक्त टेंडर का कार्यादेश केएम कांटैरक्टर्स को 72 फीसदी कम रेट पर 9 लाख 11 हजार 495 रुपया 72 पैसे पर 16 जुलाई 2018 को आबंटित कर दिया गया.

काम को लेकर बरकरार है संशय

वाटर पैकेज के काम को 72 फीसदी कम रेट पर संवेदक द्वारा डाले जाने के बाद भी आबंटित कर दिये जाने के बाद से काम पूरा करने को लेकर संशय की स्थिति बरकरार है.

कैसे बनता है टेंडर का स्टीमेट

प्रावधान के तहत किसी भी टेंडर का जब स्टीमेट बनाया जाता है तो उसमें कितने मजदूर, सुपरवाईजर काम करेंगे, काम कितने दिनों में पूरा होगा, सरकार द्वारा उनके घोषित न्यूनतम पेमेंट, ईपीएफ आदि को रख कर बनाया जाता है. डीवीसी में इंजीनियरों के द्वारा जो स्टीमेट बनाया जाता है उसमें काम करनेवाले मजदूरों सहित सभी बिंदुओं को ध्यान में रखा जाता है, जबकि टेंडर फाइनल होने के बाद आबंटित कार्यादेश में ऐसी किसी भी बात का उल्लेख नहीं रहने के कारण ठेकेदारों के द्वारा मैन पावर को रखने के मामले में चोरी की जाती है जिससे काम प्रभावित होता है.

ऐसे कई और काम आबंटित किये गये हैं

पावर प्लांट में वाटर पैकेज के काम के अलावा कई और ऐसे काम हैं जो कम रेट पर संवेदकों को आबंटित किये गये हैं जिसके पूरा होने को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है. पावर प्लांट में फ्लाई ऐश के 75 लाख रुपये के काम को 46 लाख रुपये में, 33 लाख के डीएम प्लांट के काम को 9 लाख में, इंस्टूमेंट के 65 लाख के काम को 32 लाख में, इनसाईट इलेक्ट्रिल के 48 लाख के काम को 22 लाख में, कंबाइंड ऐश के 46 लाख के काम को 17 लाख रुपये में आबंटित कर दिया गया. जबकि इसके विपरीत मेसर्स लोकनाथ को 2 लाख 52 हजार का काम 10 फीसदी ऊंची दर पर आबंटित किया गया.

क्या कहते हैं प्रोजेक्ट हेड

पावर प्लांट में संवेदक को 72 फीसदी कम रेट डाले जाने के बाद भी कार्यादेश आबंटन के सवाल पर प्रोजेक्ट हेड कमलेश कुमार का कहना था कि सीवीसी के टेंडर संबंधी गाईड लाईन के तहत जो ठेकेदार या कंपनी कम रेट पर टेंडर डालते हैं तो उसे कार्यादेश का आबंटन करना होगा. काम का आबंटन मिलने के बाद यदि काम पूरा नहीं किया जाता है तो कंपनी या ठेकेदार के फर्म को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा. उनका कहना था कि डीवीसी के द्वारा टेंडर को लेकर जो स्टीमेट बनाया जाता है उसमें मैन पावर को ध्यान में रखा जाता है जबकि कार्यादेश में मैन पावर का जिक्र नहीं रहता है.

जांच की मांग

यूसीडब्ल्यूयू के अध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह ने पूरे मामले को लेकर डीवीसी के अध्यक्ष एवं सीवीओ से जांच की मांग की है. लिखा है कि 72 फीसदी कम रेट डाले जाने के बाद काम करना कैसे संभव हो सकता है. यदि संभव है तो डीवीसी के इंजीनियर जो स्टीमेट बनाते हैं उसमें घालमेल करते हैं और ऐसा नहीं है तो फिर काम की गुणवत्ता काफी बदतर होगी जिसका खामियाजा अंततः डीवीसी को ही चुकाना पड़ सकता है जैसा कि वर्तमान में ए पावर प्लांट के टरबाईन स्थित बेयरिंग में आयी खराबी में देखने को मिल रही है.

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