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#RMC: कमीशनखोरी के लिए निकाला गया था रोड मार्किंग का टेंडर, शिकायत के बाद हुआ रद्द

Ranchi :  शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाने का जिम्मा जिस रांची नगर निगम के पास है, उसमें कमीशनखोरी कितनी बढ़ गयी है उसका एक उदाहरण है रोड मार्किंग के टेंडर का रद्द होना.

चौक-चौराहों पर रोड मार्किंग बनाने को लेकर निगम द्वारा टेंडर निकाले जाने के पीछे कमीशनखोरी की बात सामने आयी है. शिकायत को बाद टेंडर रद्द किया जा चुका है.

पूरे खेल के निगम के एक सिटी मैनेजर की भूमिका बतायी जा रही है जिनका तबादला हाल ही में किसी अन्य जिले में किया जा चुका है.

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काम नहीं होने से लोग कर रहे ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन

राजधानी के कई प्रमुख चौक-चौराहों में बने रोड मार्किंग सहित स्टॉप लाइन व जेब्रा क्रॉसिंग पूरी तरह से मिट चुके हैं. इनके मिटने से वाहन खड़ा करने वाले लोग अनजाने में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर देते हैं.

बताया जा रहा है कि 150 से 200 से अधिक लोग प्रतिदिन अनजाने में जुर्माना भरने को विवश हैं. ट्रैफिक पुलिस से जुड़े अधिकारियों के निर्देश के बाद भी निगम की तरफ से इस और कोई पहल नहीं की गयी. इसकी वजह कमीशन नहीं मिलना बताया जा रहा है.

विभाग से क़ड़ी फटकार के बाद रद्द हुआ निकाला गया टेंडर

बताया जा रहा है कि वर्तमान में काम रही एजेंसी ने जब उस सिटी मैनेजर को कमीशन देने से इन्कार किया तो अधिकारियों ने नये सिरे से टेंडर निकाल दिया.

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हालांकि नये टेंडर निकालने वाले अधिकारी यह भूल गये कि काम कर रही एजेंसी का कार्यकाल अभी बाकी है. इधर टेंडर निकालने के बाद पुरानी एजेंसी ने इसकी शिकायत नगर विकास विभाग में की.

एजेंसी ने कहा कि जब उसका कार्यकाल बाकी है तो निगम ने नया टेंडर कैसे निकाल दिया. इसके बाद विभाग के वरीय अधिकारियों ने निगम के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगायी.

इसके बाद निगम ने टेंडर को स्थगित कर दिया. नगर आयुक्त के निर्देश पर टेंडर रद्द किये जाने के बाद एक बार फिर से पुरानी एजेंसी से काम कराने की तैयारी की बात की जा रही है.

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ट्रांसफर किये गये एक सिटी मैनेजर ने रचा पूरा खेल

खबर यह भी है कि पुराने टेंडर के कार्यकाल के पहले ही नया टेंडर निकालने के पीछे निगम के ही एक पूर्व सिटी मैनेजर हैं.

राजधानी के कई प्रमुख चौक चौराहों में बने स्टॉप लाइन और रोड मार्किंग पहले ही गायब होने की कगार पर पहुंच गये थे. लेकिन तत्कालीन सिटी मैनेजर ने इसलिए यह काम नहीं किया, क्योंकि काम कर रही एजेंसी से कमीशन नहीं मिला था.

उसके बाद पिछले नवंबर माह में उसका तबादला किसी अन्य जिले में कर दिया गया. उसके बावजूद उस सिटी मैनेजर ने अपने दबदबे से अपनी पोस्टिंग एक बार फिर निगम में कराने की पैरवी भी करायी.

यहां तक कि नगर आयुक्त से पत्र भी लिखवा लिया. हालांकि उसका यह काम पूरा नहीं हो सका.

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