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नीतीश सरकार पर तेजस्वी का हमलाः कहा- बिहार के विकास के लिए खरपतवार को उखाड़ फेंकना होगा

सरकार में आये तो लागू करेंगे डोमिसाइल नीति- तेजस्वी यादव

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New Delhi/Patna: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां अपने विरोधियों पर हमलावर हैं. वहीं बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोला है. सोमवार को उन्होंने ट्वीट कर नीतीश सरकार की तुलना खरपतवार से की.

इससे पहले बिहार के लिए केंद्र द्वारा कई विकास परियोजनाओं की घोषणा किए जाने के बीच राजद नेता तेजस्वी यादव ने रविवार को कहा कि दिखावटी प्रचार कवायद शासन के लिए खराब विकल्प है और चुनाव में बेरोजगारी, ‘कृषि क्षेत्र को कारोबारी घरानों के हाथ में सौंपने’, कोविड-19 महामारी से निपटने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे.

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बिहार के लिए खरपतवार नीतीश सरकार

बिहार में चुनावी माहौल गरमाया हुआ है. वहीं तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर निशाना साधा है. सोमवार सुबह तेजस्वी ने ट्वीट कर कहा, बीजेपी नीत नीतीश सरकार बिहार के लिए खरपतवार बन चुकी है. बिहार की ख़ुशहाली और बेहतरी के लिए अबकी बार इस खरपतवार को उखाड़ फेंकना होगा तभी बिहार में फलदायक किसानी, रोजगार और उद्योगों की अच्छी फसल लहराएगी. जय किसान, जय बिहार, जय भारत.

तेजस्वी ने यह ट्वीट केंद्र सरकार के उस फैसले के बाद किया है, जिसमें रविवार को दो कृषि बिल को मंजूरी दी गयी है. इस बिल का आजेडी समेत तमाम विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं. बता दें कि आरजेडी ने कृषि बिल के खिलाफ बिहार में 25 सितंबर को आंदोलन करने की चेतावनी दी है.

‘जल्द होगा सीटों का बंटवारा’

इससे पहले रविवार को विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने न्यूज एजेंसी पीटीआइ को एक इंटरव्यू में कहा कि यह निर्विवाद और सिद्ध है कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) महागठबंधन का स्वाभाविक नेतृत्वकर्ता है और जल्द ही सीटों का बंटवारा हो जाएगा.

तीन कृषि विधेयकों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए यादव ने कहा कि राजद ने हमेशा किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी है और ‘कृषि क्षेत्र को कारोबारी घरानों’ के हाथ में सौंपने के खिलाफ पूरी ताकत से पार्टी लड़ेगी. उन्होंने कहा, ‘इन विधेयकों से किसानों का वित्तीय सुरक्षा कवच खत्म हो जाएगा जो कि उन्हें सरकारी खरीद और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) जैसे प्रावधानों से मिल रहा था.’

अगर विधेयक ‘किसान विरोधी’ नहीं हैं तो एक केंद्रीय मंत्री ने क्यों इस्तीफा दे दिया . कृषि विधेयक के मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था.

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‘सभी मोर्चे पर नाकाम नीतीश सरकार’

यादव ने जोर दिया कि उनकी पार्टी लोगों के मुद्दों के आधार पर बिहार चुनाव में लड़ेगी. उन्होंने कहा कि ‘बेरोजगार युवाओं, लोकतंत्र और संविधान समर्थक ताकतों के विरूद्ध निरंकुश, विभाजनकारी और संविधान विरोधी शासन’’ की लड़ाई होगी. बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘बिहार चंपारण सत्याग्रह जैसे राजनीतिक आंदोलन की भूमि है और मैं आश्वस्त हूं कि यह चुनाव मौजूदा राजनीतिक विमर्श में ऐतिहासिक क्षण होगा.’

तेजस्वी यादव ने कहा कि कोविड-19 महामारी से निपटने और प्रवासी मजदूरों से किया गया बर्ताव भी महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे होंगे. यादव ने दावा किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने 15 साल के कार्यकाल में इन सभी मोर्चें पर बुरी तरह नाकाम रहे हैं. राजद सुनिश्चित करेगा कि बिहारी लोगों की जिंदगी और भविष्य से संबंधित असली मुद्दों को उठाया जाए.

‘डोमिसाइल नीति करेंगे लागू’

क्या वह विपक्षी गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे और महागठबंधन में राजद की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर यादव ने कहा कि यह निर्विवाद और सिद्ध है कि महागठबंधन में राजद स्वाभाविक नेतृत्वकर्ता है और अब भी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी है.

उन्होंने कहा, ‘मेरे पास जो भी जिम्मेदारी है, मैं ईमानदारी से उसे निभा रहा हूं और भविष्य में भी ऐसा ही करूंगा. फिलहाल मैं बिहार में सबसे भ्रष्ट और जन विरोधी सरकार को हटाने के लिए अथक प्रयास कर रहा हूं.’ यादव ने जोर दिया कि देश और बिहार में बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती है जिसका समाधान होना चाहिए .

उन्होंने कहा, ‘लंबे समय से 4.5 लाख से ज्यादा पद खाली हैं और मैंने बिहार के युवाओं को आश्वस्त किया है कि हमारी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में इन रिक्तियों को भरने का काम शुरू होगा और निर्धारित समय सीमा में प्रक्रिया पूरी की जाएगी.’ साथ ही कहा कि अगर उनकी पार्टी की सरकार बनती है तो सरकारी नौकरियों में ‘डोमिसाइल नीति’ को भी लागू किया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को खत्म हो रहा है और चुनाव अक्टूबर-नवंबर में होने की संभावना है.

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