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तेज बहादुर यादव ने वाराणसी से नामांकन खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट में दस्‍तक दी

वाराणसी से प्रधानमंत्री मोदी के खि‍लाफ़ चुनाव लड़ने के लिए उतरने वाले बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव अपना नामांकन खारिज होने को लेकर सोमवार को SC  में गुहार लगाने पहुंचे.

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NewDelhi :  यूपी के वाराणसी से प्रधानमंत्री मोदी के खि‍लाफ़ चुनाव लड़ने के लिए उतरने वाले बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव अपना नामांकन खारिज होने को लेकर सोमवार को SC में गुहार लगाने पहुंचे. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण यादव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हो सकते हैं.  यह मामलk SC के रजिस्ट्रार के पास तत्काल सुनवाई के लिए पेश किया गया है. बता दें कि शुरू में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल करने वाले यादव को समाजवादी पार्टी ने  29 अप्रैल को अपना उम्मीदवार घोषि‍त किया  था.

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निर्दलीय उम्मीदवार और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रूप में नामांकन दाखिल करने के दौरान दोनों नामांकन पत्रों में अलग-अलग जानकारी देने को आधार बनाते हुए वाराणसी के जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने यादव का नामांकन खारिज कर दिया था.  बता दें कि समाजवादी पार्टी ने पूर्व में शालिनी यादव को टिकट दिया था. तेज बहादुर का नामतांकन रद्द होने के बाद अब समाजवादी पार्टी की ओर से शालिनी यादव ही प्रधानमंत्री मोदी के मुकाबले में हैं.

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तेज बहादुर ने दोनों नामांकन पत्रों में अलग-अलग जानकारी दी

इससे पूर्व जांच में निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह यादव ने पाया था कि तेज बहादुर यादव ने बीएसएफ से बर्खास्तगी के संबंध में अपने दोनों नामांकन पत्रों में अलग-अलग जानकारी दी है. इस पर निर्वाचन अधिकारी ने यादव को नोटिस जारी करते हुए 24 घंटों के अंदर बीएसएफ से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर उपस्थित होने को कहा था. अनापत्ति प्रमाण पत्र में उन्हें यह लिखवाकर लाना था कि उन्हें वास्तव में बीएसएफ से किस वजह से बर्खास्त किया गया.  जानकारी के अनुसार जांच में सामने आया था कि यादव ने अपने नामांकन पत्र में भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन पद धारण करने के दौरान भ्रष्टाचार या अभक्ति के कारण पदच्युत किया गय,  के जवाब में हां कहा था. इसके विवरण में उन्होंने 19 अप्रैल, 2017 की तारीख डाली थी.

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तेज बहादुर को बर्खास्त कर दिया था

हालांकि, अपने दूसरे नामांकन पत्र में यादव ने लिखा था कि उन्हें 19 अप्रैल, 2017 को बर्खास्त किया गया था लेकिन इसका कारण भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन पद धारण करने के दौरान भ्रष्टाचार या अभक्ति नहीं था. नामांकन रद्द होने के बाद तेज बहादुर ने कहा था, मेरा नामांकन गलत तरीके से रद्द किया गया है. मुझे मंगलवार शाम 6:15 बजे तक सबूत देने के लिए कहा गया था, मैंने सबूत दिये भी. इसके बावजूद मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया. हम इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जायेंगे.

बता दें कि तेज बहादुर ने बीएसएफ में मिल रहे  भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कुछ वीडियो बनाये थे. सोशल मीडिया पर आने के बाद वे सभी वीडियो वायरल हुए और तेज बहादुर सुर्खियों में आ गये..इस मामले पर काफी विवाद हुआ. बाद में पीएमओ ने इस मामले का संज्ञान लिया. वहीं, बीएसएफ ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए तेज बहादुर को बर्खास्त कर दिया था.अपनी बर्खास्तगी को तेज बहादुर ने कोर्ट में चुनौती दी है जो अभी ट्रायल स्टेज में है.

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