Education & Career

तकनीकि शिक्षा का हालः बिना प्राचार्य के कॉलेज, बिना प्लेसमेंट के स्टूडेंटस

  • जेपीएससी ने चार साल से नहीं निकाली नियुक्ति
  • प्राइवेट कॉलेजों का हाल भी खस्ता

Ranchi: छात्रों को राज्य में ही बेहतर तकनीकि शिक्षा मिले, इसके लिए राज्य में कई नये पॉलिटेक्निक कॉलेजों का निर्माण कराया गया. सरकारी भवनों में पीपीपी मोड पर पढ़ाई करायी जा रही है. हर साल पॉलिटेक्निक कॉलेजों में नामांकन करानेवाले स्टूडेंट्स की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, पर पढ़ानेवालों की संख्या बहुत ही कम है. राज्य के कई सरकारी कॉलेजों में प्राचार्य के पद भी रिक्त हैं, पर सरकार की तरफ से इस दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है. कई शिक्षक एक साथ दो दो कॉलेजों के प्रभार में हैं. यहां तक कि कॉलेजों के प्रिंसिपल परीक्षा नियंत्रक के रूप में भी काम करते हैं. तकनीकि छात्रों के भविष्य को बनानेवाले शिक्षक और प्रिंसिपल ही नहीं रहेंगे, तो छात्रों की गुणवत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है. प्राचार्य के नहीं रहने से छात्रों के प्लेसमेंट पर भी असर पड़ रहा है. झारखंड लोक सेवा आयोग के अधिकारी ने बताया कि चार सालों से इन कॉलेजों के प्रिंसिपल के लिए कोई नियुक्ति नहीं निकाली गयी है.

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बिना प्रिंसिपल के चल रहे कॉलेज

राज्य में कुल 17 पॉलिटेक्निक कॉलेज हैं. इनमें से कई कॉलेजों में प्रिंसिपल नहीं हैं. गर्वमेंट वीमेंस पॉलिटेक्निक बोकारो, गर्वनमेंट पॉलिटेक्निक खरसांवा, गर्वनमेंट पॉलिटेक्निक दुमका, गर्वनमेंट पॉलिटेक्निक सिमडेगा, सिल्ली पॉलिटेक्निक, गोला स्थित पॉलिटेक्निक समेत कई संस्थानों में प्रिंसिपल नहीं है. वहीं इन कॉलेजों में संसाधन की भी कमी है. इन कॉलेजों में पढ़नेवाले छात्रों को तो सही प्लेसमेंट तक नहीं मिल पाता. सिमडेगा स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थित ये है कि यहां छात्रों का नामाकंन इस कॉलेज में कराया गया और इनकी कक्षाएं रांची स्थित पॉलिटेक्निक में ली जा रही हैं.

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प्राइवेट कॉलेज भी अछूते नहीं

भले ही राज्य में पिछले कुछ सालों में कई प्राइवेट कॉलेज खोले गये हों, लेकिन इन प्राइवेट कॉलेजों में भी प्रिंसिपल की कमी है. गेतलातू स्थित बीआइटीटी में प्रिंसिपल नहीं हैं. इस कॉलेज के छात्रों से बात करने पर जानकारी मिली  कि यहां शिक्षकों की भी कमी है. निलय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन की बात की जाये तो यहां संसाधनों की भारी कमी है. कई छात्रों ने बताया कि एडमिशन तो ले लिया जाता है लेकिन न ही इन कॉलेजों में सही संसाधन हैं और न ही शिक्षक. कैंब्रिज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की बात की जाये तो यहां 500-600 छात्रों में मात्र 5 से 10 फीसदी का प्लेसमेंट हो पाता है. छात्रों ने ही जानकारी दी कि यहां बहुत मुश्किल से प्लेसमेंट ड्राइव तो चलाया जा रहा है, लेकिन प्लसेमेंट न के बराबर है.

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सरकार की अनुशंसा होने पर निकाली जायेगी नियुक्ति

इस सबंध में जब झारखंड लोक सेवा आयोग के उप सचिव अमरेंद्र कुमार सिन्हा से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि चार साल से इन कॉलेजों में नियुक्ति नहीं निकाली गयी है. सरकारी की ओर से अनुशंसा करने पर आयोग इसका विज्ञापन जारी करेगा.

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