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तरक्की के झारखंड मॉडल को जानने के लिए जम्मू-कश्मीर से पहुंची टीम

सात दिवसीय प्रवास के दौरान टीम मनरेगा व सोशल ऑडिट कार्यक्रम की लेगी जानकारी

Ranchi : झारखंड में मनरेगा कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन से देश के अन्य राज्य प्रभावित हो रहे हैं. खासकर सोशल ऑडिट के क्षेत्र में झारखंड मॉडल को सराहा जा रहा है. मनरेगा व सोशल आडिट के रोल की बारीकियों को सीखने और उसे अपने राज्य में लागू करने के मकसद से जम्मू-कश्मीर का एक दल झारखंड पहुंचा है. इस दल का नेतृत्व वहां के सोशल ऑडिट यूनिट की निदेशक शाफिया नक्शबंदी कर रही हैं. उनके साथ स्टेट रिसोर्स पर्सन ज़मीर अहमद वानी और डीआरपी बंशीलाल शर्मा, बुबी रानी, हिलाल अहमद यत्तु और शौकत अहमद शामिल हैं. सात दिवसीय प्रवास के क्रम में यह दल झारखंड में सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया,  नवाचार और सामुदायिक भागीदारी के विभिन्न आयामों का अध्ययन करेगा.

 

सोशल ऑडिट और दूसरे आयामों को जानने का प्रयास

जम्मू-कश्मीर की टीम ने रांची आने के बाद सोशल आडिट की टीम से भेंट की. सोशल ऑडिट यूनिट, झारखंड के राज्य समन्वयक गुरजीत सिंह ने उन्हें झारखंड में अंकेक्षण की प्रक्रियाओं की जानकारी दी. साथ ही ऑडिट यूनिट के राज्य स्तरीय स्पेशलिस्टों ने विषयवार इस दल को झारखंड के नवाचारों से अवगत कराया. 24 फ़रवरी को जम्मू-कश्मीर का दल रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड गया. वहां बिरसा हरित ग्राम योजना के सामाजिक अंकेक्षण प्रक्रिया के अंतर्गत प्रखंड स्तरीय सुनवाई को देखा.

25 फरवरी से यह दल रांची जिला के नगडी प्रखंड के दो पंचायतों में झारखंड के सोशल ऑडिट टीम के साथ रह कर पूरी प्रक्रिया समझने का प्रयास कर रहा है. दल के कुछ सदस्यों ने हजारीबाग में जिला स्तरीय कृत कार्रवाई प्रतिवेदन समीक्षा समिति की बैठक में भी भाग लिया. डीसी से मुलाक़ात कर जिला प्रशासन की सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया में भूमिका और भागीदारी को समझने का प्रयास किया.

 

ऑडिट की प्रक्रिया में सहभागिता, निष्पक्षता जरूरी: सचिव

26 फ़रवरी को इस दल ने ग्रामीण विकास विभाग की सचिव आराधना पटनायक से सामजिक अंकेक्षण प्रक्रिया में प्रशासकीय और वित्तीय सहयोग और स्वतंत्रता की बारीकियों को समझने का प्रयास किया. सचिव ने दल को बताया कि यह ध्यान रखना जरुरी है कि सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया सहभागी,निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से हो. इससे ग्राम सभा को निर्णय लेने और अनुशंसा करने में आसानी होती है. उन्होंने जम्मू और कश्मीर में इस प्रक्रिया को स्थापित करने में झारखण्ड टीम के हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया .

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गौरतलब है कि सामाजिक अंकेक्षण के क्षेत्र में तीन साल में किये गए प्रयोगों और विभिन्न योजनाओं में इसके फैलाव और प्रभाव के कारण झारखंड आज अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा है. जम्मू-कश्मीर से पहले असम ,छत्तीसगढ़, बिहार,  हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश की टीमें भी झारखंड मॉडल को देख चुकी है. झारखंड के सामाजिक अंकेक्षण दल का रिसोर्स पर्सन उत्तराखंड, हरियाणा, बिहार और जम्मू-कश्मीर जाकर प्रशिक्षण देने का काम कर चुके हैं.

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