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3 सालों से मानदेय के इंतजार में बैठे हैं बाल श्रमिक विद्यालयों के टीचिंग और नन टीचिंग स्टाफ

Ranchi : बाल श्रमिक स्कूलों में टीचिंग औऱ नन टीचिंग कार्यों से जुड़े कर्मियों के सामने बड़ा संकट बना हुआ है. दुमका में ऐसे स्कूलों से जुड़े स्टाफ 3 सालों से बिना मानदेय लगातार काम कर रहे हैं. इस विषय पर जिला परिषद सदस्य औऱ सांसद प्रतिनिधि जयप्रकाश मंडल ने दुमका डीसी सह जिला बाल श्रमिक उन्मूलन समिति का ध्यान आकृष्ट कराया है. बुधवार को उन्होंने डीसी को लेटर लिख कर ऐसे कर्मियों का भुगतान कराये जाने का आग्रह किया.

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1996 से दे रहे हैं सेवा

दुमका के बाल श्रमिक विद्यालयों में पढ़ानेवाले शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मी लंबे अरसे से सेवा दे रहे हैं. जयप्रकाश मंडल के अनुसार वर्ष 1996 में इन कर्मियों को नियुक्त किया गया था. नियुक्ति ऐसे समय में की गयी थी जब सर्व शिक्षा अभियान भी अस्तित्व में नहीं आया था. सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहनेवाले और संसाधनों की कमी का सामना करनेवाले बच्चों के कल्याण के लिए इनकी सेवा लिये जाने की पहल की गयी थी. बेहतर भविष्य औऱ दो जून की रोटी खातिर अपने अभिभावकों संग या अकेले अपनी स्कूलिंग पूरी किये बगैर परदेश निकल जानेवाले बच्चों के लिए बाल श्रमिक विद्यालयों ने सार्थक भूमिका निभायी है.

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बाल श्रम उन्मूलन का लक्ष्य पूरा करने में मिली मदद

बाल श्रमिक उन्मूलन अभियान के लक्ष्य को पूरा करने में दुमका का बढ़िया प्रदर्शन रहा है. पहले शिक्षा और जागरुकता की कमी के कारण लगातार बच्चे स्कूली पढ़ाई छोड़ कर निकल जाते थे. पर अब बाल श्रमिक स्कूलों के कारण इसमें गिरावट आयी है. बड़ी संख्या में सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहनेवाले बच्चे अब इन स्कूलों से जुड़ रहे हैं. ऐसे में इन स्कूलों से जुड़े शिक्षकों, गैर शिक्षण कार्य में लगे कर्मियों को मानदेय नहीं दिया जाना चिंतनीय है. डीसी से होली से पूर्व ऐसे स्कूलों से जुड़े स्टाफ को मानदेय दिये जाने का आग्रह किया गया है.

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