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अपनी मांगों को लेकर पारा शिक्षकों ने निकाला मशाल जुलूस

एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले बुधवार को मशाल जुलूस निकाला गया

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Dumka : जिले में एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले बुधवार को मशाल जुलूस निकाला गया. जुलूस की अगुवाई जिला कोषाध्यक्ष जयप्रकाश यादव द्वारा किया गया. पारा शिक्षकों ने सरकार के गलत नितियों के खिलाफ बीआरसी जामा से जामा चौक तक मशाल जुलुस निकाला और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.

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अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत है पारा शिक्षक 

ज्ञात हो कि पिछले 15 वर्षों से पारा शिक्षक अपनी मांगो को लेकर आंदोलनरत है. बीते अप्रेल माह में जब पारा शिक्षकों द्वारा आंदोलन किया गया था, तब झारखंड सरकार के मुख्य सचिव के निर्देश पर हाइ लेवल कमिटी का गठन किया गया. कमेटी को 60 दिनों में अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौपना था. लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी अंतिम रिपोर्ट मुख्य सचिव को नहीं सौंपी गयी. जिससे क्षुब्ध होकर राज्य कमेटी द्वारा पुनः आन्दोलन की घोषणा की गई. जिसकी शुरुआत राज्य के सभी प्रखंडो में मशाल जुलूस निकालकर आंदोलन कि शुरुआत की गयी. शिक्षा सचिव द्वारा बार-बार तुगलकी फरमान जारी करने को लेकर पारा शिक्षकों में काफी आक्रोश देखा गया.

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मांगों को लेकर अंतिम निर्णय नहीं ले पा रही सरकार 

पारा शिक्षकों ने आरोप लगाया कि शिक्षा सचिव के द्वारा सरकार को दिगभ्रमित किया जा रहा है. जिसके कारण सरकार पारा शिक्षकों के मांगों को लेकर अंतिम निर्णय सरकार नहीं ले पा रही है.

मौके पर जिला प्रवक्ता धर्मेन्द्र राय, राजीव पंजियारा, राजेन्द्र मांझी, अरुण राउत, मुकेश राय, अशोक कुमार, सुरेन्द्र भंडारी, वर्मानन्द सोरेन, तेजनारायण राय, रविन्द्र कुमार, राजेश यादव, पारसनाथ यादव, रुपेश कुमार, गुलाब राय, रोहित कुमार, सरोजनी सोरेन, सलोनी वास्की, सोना बास्की, मधुंगल नाग सहित दर्जनों पारा शिक्षक-शिक्षिका उपस्थित थे.

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रामगढ में भी निकाला गया मशाल जुलूस 

इधर रामगढ में भी एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा द्वारा सरकार के विरोध में मशाल जुलूस निकाला गया. इस दौरान शिक्षकों को संबोधित करते हुए पारा शिक्षक संघ के प्रखंड अध्यक्ष योगेंद्र साह ने बताया कि सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय कमेटी ने 140 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार को अपना रिपोर्ट सुपूर्द नहीं करने की बात कही, जिससे राज्य के पारा शिक्षक ठगा महसूस कर है. इससे पारा शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त है.

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शिक्षकों को हटाने के फरमान की की गई निंदा

सर्वसम्मति से विद्यावाहिनी कार्यक्रम तथा तमाम गैर शैक्षणिक कार्य का विरोध करने का निर्णय लिया गया. वर्ष 2008 के बाद नियुक्त पारा शिक्षकों को हटाने के शिक्षा सचिव के फरमान की निंदा करते हुए निर्णय लिया गया कि यह अत्यंत हीं गंभीर मुद्दा है. इस मुद्दे पर राज्य इकाई सूबे के मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगी. रेसलाइजेशन के नाम पर पंचायत बगल के पंचायत से बाहर एवं अधिक दूरी भेजे गये. पारा शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए भी पुनः शिक्षा मंत्री से मिलने की बात कही, साथ हीं साथ पारा शिक्षकों के स्थायीकरण एवं वेतनमान मिलने तक आंदोलन चलाया जायेगा. इसके साथ ही पारा शिक्षकों ने जिले के विभिन्न प्रखंड़ों में मशाल जुलूस निकाल सरकार का विरोध करते हुए आंदोलन का आगाजकिया.

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