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टीचर्स का ऑनलाइन फ्रेंडली न होना और ऑफलाइन क्लासेस की उम्मीद बना रही ऑनलाइन पढ़ाई से दूरी

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Rahul Guru
Ranchi: शहर के दो दर्जन से अधिक इंजीनियरिंग-मेडिकल के कोचिंग संस्थान बीते एक महीने से ऑनलाइन पढ़ाई कराने का दावा कर रहे हैं. शहर के बड़े कोचिंग संस्थानों की माने तो वे समय की मांग के मुताबिक ऑनलाइन क्लासेस में ढल चुके हैं.

पर ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स को यह नहीं भा रहा है. कोचिंग संस्थानों का ऑनलाइन पढ़ाई कराने को लेकर किया जा रहा दावा, महज स्वांत: सुखाय ही है. आखिर स्टूडेंट्स को क्यों नहीं भा रहा ऑनलाइन क्लासेस? इसके पीछे की वजह को लेकर कोचिंग संस्थानों में मतभेद है.

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स्वीकार नहीं कर पा रहे ऑनलाइन पढ़ाई

स्टूडेंट्स को ऑनलाइन क्लासेस पसंद नहीं आने के पीछे शहर के बड़े इंजीनियरिंग कोचिंग संस्थान में से एक चैंप्स स्क्वेयर के निदेशक मनीष सिन्हा कहते हैं कि रांची जैसे शहर में ऑनलाइन पढ़ाई परिस्थितिजन्य उपाय है, जिसे कोचिंग संस्थान और स्टूडेंट्स ने भी मजबूरी बस अपनाया है. इसके लिए न तो कभी कोचिंग संस्थानों ने सोचा था और न ही स्टूडेंट्स ने. अगर कहीं ऑनलाइन क्लासेस फेल हो रहा है तो यह पहली बड़ी वजह है.

इसके बाद जो दूसरी बड़ी वजह है वो तकनीकी सुविधा. मनीष सिन्हा की मानें तो उनके सर्वेक्षण के अनुसार अभी शहर में कोचिंग और स्कूलों में जो ऑनलाइन पढ़ाई करायी जा रही उसमें 95 फीसदी जूम एप के फ्री वर्जन से हो रही है. लगभग 20 से 25 फीसदी गूगल क्लासेस समेत अन्य प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन प्लेटफॉर्म का फ्री वर्जन कहीं से स्टूडेंट्स को बांधे नहीं रख सकता है.

इसके अलावा जो समस्या है वो है इंटरनेट डेटा उपलब्ध होने का. आम व्यक्ति किसी भी टेलिकॉम कंपनी का डेटा ले रहा है तो वो अधिकतम 2 जीबी का लेता है. इसमें स्कूलों का ऑनलाइन क्लोसस भी करना है और कोचिंग भी. ऐसे में 2 जीबी डेटा पर्याप्त नहीं है.

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अब भी है ऑफलाइन क्लासेस की उम्मीद

कोचिंग संस्थानों की मानें तो हमारी मेंटालिटी ऑनलाइन की ओर है ही नहीं. हमारी मेंटालिटी में ऑनलाइन स्टडी कब आयेगी इसका भी कोई टाइम फ्रेम नहीं है. मेडिकल परीक्षा की तैयारी कराने वाले बायोम इंस्टीट्यूट के निदेशक पंकज सिंह का कहना है कि कोचिंग संस्थान हों या अभिभावक या फिर शिक्षक सभी ऑनलाइन क्लासेस को विकल्प के रूप में ही देख रहे हैं.

वो कहते हैं कि अभी जिन भी कोचिंग क्लासेस में ऑनलाइन पढ़ाई करायी जा रही है या ऑनलाइन क्लासेस के नाम पर एडमिशन लिया जा रहा है, वे स्टूडेंट्स और अभिभावकों को यही बता रहे हैं कि फिलहाल हम ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं पर स्थिति के सामान्य होने पर क्लासरूम पढ़ाई ही करायी जायेगी. अभिभावक भी इसी बात को मानते हैं.

अब भी अभिभावकों और स्टूडेंट्स की उम्मीद ऑफलाइन क्लासेस की ही है. अपनी बात जोड़ते हुए फिटजी रांची सेंटर प्रमुख पंकज कुमार कहते हैं कि अभी तक बोर्ड की परीक्षाएं खत्म नहीं हुई हैं. अभी भी स्टूडेंट्स पहले बोर्ड की परीक्षाओं के खत्म होने इंतजार कर रहे हैं. अगर स्थिति सामान्य नहीं होती है तो स्टूडेंट्स को ऑनलाइन स्टडी में आना होगा और कोचिंग संस्थानों को बेहतर प्लेटफॉर्म के साथ क्लासेस शुरू करने होंगे.

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टीचर्स नहीं है ऑनलाइन क्लासेस फ्रेंडली

ऑनलाइन क्लासेस के फेल होने के पीछे शिक्षकों का ऑनलाइन क्लासेस फ्रेंडली होना भी है. हालांकि कोचिंग संस्थान इसे लेकर खुल कर बात नहीं करते हैं. कोचिंग संस्थान यह दावा करते हैं कि उनके शिक्षक बड़ी आसानी से ऑनलाइन क्लासेस ले रहे हैं. शहर के बड़े कोचिंग संस्थान होने का दावा करने वाले तीन इंस्टीट्यूट के शिक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि उन्हें महीने से भर से घर में बैठ कर बचत के पैसों से गुजारा इसलिए करना पड़ रहा क्योंकि उनके संस्थान उन्हें ऑनलाइन क्लासेस फ्रेंडली नहीं मानते हैं.

इन संस्थानों में एक तो नेशनल लेबल का संस्थान भी है. जबकि कुछ हद तक बायोम इंस्टीट्यूट के निदेशक पंकज सिंह कहते हैं कि हमारे यहां 6 शिक्षक ऑनलाइन क्लासेस ले रहे हैं. वे इस बात से गुरेज नहीं करते हैं कि कोचिंग संस्थानों के कई शिक्षक ऑनलाइन क्लास लेने के फ्रेंडली हैं. जबकि शिक्षकों की मानें तो कुछ कोचिंग संस्थानों को छोड़ कर अधिकांश फ्री एप प्लेटफॉर्म से पढ़ा रहे हैं. ये फ्री सेवा स्टूडेंट्स को सही तरीके से संतुष्ट नहीं कर पाता.

दूसरी बात यह भी कहते हैं कि कोचिंग संस्थान घर से क्लास लेने को कहते हैं लेकिन सुविधा नहीं देते हैं. शिक्षक कहते हैं कि जितना डेटा हम लेते हैं, उतने में क्लास लेना संभव नहीं है. संस्थान शिक्षकों के पर्सनल मोबाइल डेटा से अपना काम करा रहे हैं और शिक्षकों के कौशल पर सवाल उठाकर अपनी कमी का ठिकरा उनके माथे फोड़ रहे हैं.

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