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सीबीएसइ मापदंड में सही नहीं झारखंड के टीचर्स, चार साल में नहीं मिला अवार्ड

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Ranchi: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड की ओर से प्रत्येक वर्ष टीचर्स-प्रिंसिपल अवार्ड दिया जाता है. वर्ष 2019 के लिए बेस्ट टीचर्स अवार्ड की सूची जारी हुई है. पर इस बार भी झारखंड के सीबीएसइ स्कूलों के शिक्षक इस लिस्ट में शामिल नहीं हो पाये हैं. संभवत: राज्य के स्कूलों के शिक्षक व प्रिंसिपल सीबीएसइ के मापदंडों के अनुसार नहीं हैं. गौर करनेवाली बात यह है कि ऐसा केवल इसी साल नहीं हुआ है. राज्य बीते चार से इस सूची से बाहर ही रहा है.

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35 शिक्षकों का हुआ है चयन

सीबीएसइ की ओर से जारी की गयी सूची में देशभर के 35 शिक्षकों के नाम शामिल हैं. लेकिन इस सूची में न केवल झारखंड बल्कि पड़ोसी राज्य बिहार भी बाहर ही है. इस साल की सूची में सबसे ज्यादा नाम दिल्ली के शिक्षकों के हैं. सूची के अनुसार इसमें दिल्ली के स्कूलों के 12 शिक्षकों के नाम शामिल हैं. इसके बाद इस सूची में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब व चंडीगढ़ के नाम शामिल हैं.

50 हजार का मिलता है नगद पुरस्कार

सीबीएसइ व एमएचआरडी की ओर से यह सम्मान चयनित शिक्षकों व प्राचार्यों को 5 सितंबर शिक्षक दिवस के दिन दिया जाता है. इसके तहत 50 हजार रुपये नगद, शॉल व मेरिट सर्टिफिकेट दिया जाता है. इस अवार्ड के लिए शिक्षक व प्राचार्य की अलग-अलग कैटेगरी होती है. जिसमें उन्हें आवेदन करना होता है. प्राचार्य श्रेणी में आवेदन करने के लिए 10 वर्ष के टीचिंग एक्सपीरिएंस के साथ 5 साल बतौर प्राचार्य अनुभव होना चाहिए. वहीं शिक्षक कैटेगरी में आवेदन के लिए 10 साल का शैक्षणिक अनुभव होना चाहिए. शिक्षकों का चयन प्राइमरी, मिडिल,  सेकेंडरी, सीनियर सेकेंडरी, स्पेशल अवार्ड व प्राचार्य श्रेणी के तहत होता है.

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शिक्षकों का घट रहा रुझान

इस संबंध में सीबीएसइ सहोदया रांची चैप्टर के प्रमुख व डीपीएस रांची के प्राचार्य डॉ राम सिंह बताते हैं कि ऐसा नहीं है कि झारखंड का एजुकेशन सिस्टम बढ़िया नहीं है. यहां से भी अब तक कई शिक्षकों और प्राचार्यों को अवार्ड मिल चुका है. इस अवार्ड में अब कई तरह के बदलाव आये हैं. इसके अलावा शिक्षकों के बीच इसकी पूरी जानकारी नहीं होती है. साथ ही रुझान भी घटने लगा है. इस वजह से झारखंड की उपस्थिति बीत चार सालों से नहीं है.

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