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#TDS_Scam: दूसरे शो काॅज नोटिस के बाद भी जीतेंद्र प्रसाद गुप्ता ने नहीं दी नयी जानकारी, हुई कार्रवाई 

  • तत्कालीन डायरेक्टर ऑफ अकाउंट्स जीतेंद्र प्रसाद गुप्ता को दो वेतनवृद्धि से किया गया वंचित.
  • साल 2008-09 में बिना टीडीएस काटे आयकर और वाणिज्यकर विभाग को किया गया था भुगतान.
  • न्यूज विंग ने उजागर किया था मामला.

Chhaya
Ranchi: तत्कालीन राज्य बिजली बोर्ड में साल 2008-09 के दौरान टीडीएस घोटाला हुआ. जिसमें एजेंसियों से बिना टीडीएस काटे आयकर विभाग को 14.95 करोड़ और वाणिज्यकर विभाग को 4.72 करोड़ का भुगतान किया गया. घोटाले के दस साल बाद झारखंड उर्जा विकास निगम लिमिटेड की ओर से बोर्ड के तत्कालीन डायरेक्टर ऑफ अकाउंट्स जीतेंद्र प्रसाद गुप्ता पर कार्रवाई की गयी. कार्रवाई उर्जा निगम के जीएम एचआर विद्यानंद शर्मा पंकज की ओर से की गयी.

कार्रवाई करते हुए जीएम एचआर की ओर से जीतेंद्र गुप्ता को आने वाले दो वेतनवृद्धि से वंचित किया गया. साथ ही निंदन की सजा दी गयी. जीएम एचआर की ओर से 17 मार्च 2020 को यह निर्देश दिया गया.

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गौरतलब है कि न्यूज विंग ने पहले भी तत्कालीन राज्य बिजली बोर्ड में हुए टीडीएस घोटाले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था. जिसके बाद तत्कालीन बोर्ड में फाइनेंस कंट्रोलर रहें उमेश कुमार पर कार्रवाई की गयी थी. जिसके बाद फिर से झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के सीनियर मैनेजर जीतेंद्र कुमार पर कार्रवाई की गयी.

जीएम एचआर की ओर से 17 मार्च 2020 को यह निर्देश दिया गया.

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दूसरी बार शो काॅज में नहीं मिला कोई नया तथ्य 

टीडीएस घोटाले के लिये 26 सिंतबर 2018 को निगम मुख्यालय के सलाहकार शिवेंद्र सिंह को जांच पदाधिकारी बनाया गया. शिवेंद्र सिंह की ओर से 1 अगस्त 2019 को जांच रिपोर्ट मुख्यालय को दी गयी. रिपोर्ट में यह बात सामने आयी की बिना टीडीएस काटे विभागों को भुगतान करने के लिये किसी सक्षम पदाधिकारी की अनुमति नहीं ली गयी थी.

जांच के क्रम में जीतेंद्र गुप्ता की ओर से वरीय अधिकारियों से ली गयी ऐसी अनुमति के संबध में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया. इस जांच में यह साबित नहीं हो पाया की जीतेंद्र गुप्ता की ओर से टीडीएस सर्टिफिकेट निर्गत करते हुए एजेसियों को लाभ पहुंचाया गया या नहीं. टीडीएस राशि जमा करने में आरोपी के स्तर पर प्रशासनिक शिथिलता या चूक हुई या नहीं ये साबित नहीं हो पाया.

इसके बाद निगम की ओर से 31 अक्टूबर 2019 को जीतेंद्र कुमार को दूसरा शो काॅज नोटिस जारी किया गया. 14 नवंबर को जीतेंद्र कुमार ने जवाब दिया, लेकिन इसमें कोई नयी बात सामने नहीं आयी. जिसके बाद जीएम एचआर की ओर से कार्रवाई की गयी.

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रिपोर्ट में बताया- जीतेंद्र गुप्ता के तबादले के बाद दिया गया सर्टिफिकेट 

रिपोर्ट से जानकारी होती है की शिवेंद्र सिंह की ओर से की गयी जांच में बताया गया है कि जीतेंद्र प्रसाद गुप्ता 3 जुलाई 2009 तक बोर्ड में कार्यरत रहे. इसके बाद ये डीडीए धनबाद के पद पर कार्यरत रहे. जबकि बोर्ड की ओर से संवेदकों के नाम टीडीएस सर्टिफिकेट 4 अगस्त 2009 को दी गयी. ऐसे में एजेंसियों को लाभ पहुंचाने का आरोप सिद्ध नहीं हो पाया.

रिपोर्ट ने यह माना की जीतेंद्र प्रसाद गुप्ता के कार्यकाल में भुगतान तो किया गया लेकिन इसकी कटौती एजेंसियेां से नहीं की गयी. यह भी बात सामने आयी की जीतेंद्र प्रसाद गुप्ता निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के पद पर कार्यरत नहीं थे. जबकि टीडीएस भुगतान करने की जिम्मेवारी डीडीओ की होती है. जीतेंद्र कुमार तत्कालीन डीडीओ से सीनियर पद पर थे. यह बात भी सामने आयी की टैक्स में ऐसी राशि दी गयी जिसकी वसूली निगम की ओर से नहीं की गयी.

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क्या है पूरा मामला

मामला 2009-10 का है. उस वक्त जेबीवीएनएल का गठन नहीं हुआ था. ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाने के लिए करीब आठ कंपनियों को काम सौंपा गया था. कंपनियों ने तय समय पर काम खत्म नहीं किया. नियम के मुताबिक, काम तय समय पर खत्म नहीं करने की वजह से जुर्माना लगाया जाता है. लेकिन कंपनियों ने वित्त विभाग को संभालने वाले अधिकारियों पर इतनी मेहरबानी बना रखी थी कि उनपर जुर्माना लगाने की बजाय उन्हें इनाम दिया गया. वह भी करीब 15 करोड़ रुपये का.

आखिरी भुगतान जब विभाग की तरफ से कंपनियों को करना था, तो बिना टीडीएस काटे ही विभाग ने कंपनियों को टीडीएस का सर्टिफिकेट दे दिया. सभी कंपनियों का टीडीएस करीब 15 करोड़ रुपये के आस-पास था.

इन कंपनियों में NECON और LUMINA INDUSTRY जैसी कंपनियां शामिल थीं. बताया जा रहा है कि LUMINA INDUSTRY के 2.52 करोड़ रुपये जो टीडीएस के थे, उसे बिना वसूले ही विभाग ने सारा भुगतान कर दिया. साथ ही सर्टिफिकेट भी दे दिया. इसी तरह बाकी कंपनियों के साथ भी किया गया. इतना ही नहीं, बोर्ड ने कंपनियों की बैंक गारंटी लौटाने में भी काफी तेजी दिखायी. सभी निजी कंपनियों की बैंक गारंटी वापस कर दी गयी.

Nayika

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