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टाटा स्टील अब चिकित्सा सामग्री से लेकर ग्राफिन तक का करेगी उत्पादन, इस साल न्यू मेटेरियल्स बनाने पर रहेगा जोर

Jamshedpur : टाटा स्टील की योजना कलिंगानगर प्लांट की सालाना क्षमता 8 मिलियन टन करने की है. कंपनी ने अपनी वित्तीय रिपोर्ट में यह जानकारी दी है कि वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान वह इसे पूरा कर लेगी. कलिंगागर में पैलेट प्लांट का काम 70 फीसदी पूरा हो चुका है और चरण-वार कोल्ड रोलिंग मिल कॉम्प्लेक्स की शुरुआत की गयी है, जिसमें पिकलिंग लाइन और कोल्ड रोलिंग मिल दोनों साथ हैं.

डाउनस्ट्रीम बिजनेस पर जोर
कंपनी ने कहा है कि वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान टाटा स्टील अपनी वृद्धि पर भी ध्यान देगी. भारत में स्टील बनाने की क्षमता डाउनस्ट्रीम बिजनेस को बढ़ाने के साथ ही आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की होगी. साथ ही बुनियादी ढांचे में आवश्यक निवेश के माध्यम से नये उद्यम और सेवाओं को शुरू किया जायेगा. खडगपुर स्थित टाटा मेटालिक्स में डक्टाइल आयरन पाइप्स सुविधाओं को दोगुना किया जायेगा.

स्पेशल बार एंड वायर रॉड-कॉम्बी मिल शुरू होगा
टाटा स्टील जमशेदपुर में स्पेशल बार एंड वायर रॉड-कॉम्बी मिल शुरू करेगी, जो ऑटोमोटिव बाजार पर केंद्रित होगा. टिनप्लेट की क्षमता को दुगुना करने में टाटा स्टील सबसे बड़ा पूंजी निवेश करेगी. नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड के अधिग्रहण के बाद इसे एक महत्वपूर्ण व्यापार केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है. कंपनी नयी सामग्री व्यवसाय में विविधता ला रही है.
नयी सामग्री पेश करके स्टील से परे उत्पाद की पेशकश करने जा रहे हैं. तीन प्रमुख कार्यक्षेत्र – कंपोजिट, ग्राफिन और चिकित्सा सामग्री और उपकरण में कंपनी ने पहले ही जगह बना ली है.
कंपनी के पास जमशेदपुर में 100 टीपीए की ग्राफिन उत्पादन क्षमता है. कंपनी बड़े पैमाने पर चिकित्सा सामग्री के उत्पादन में निवेश करने जा रही है.

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कंपनी हाइड्रोक्सीपाटाइट का उत्पादन करेगी
कंपनी चिकित्सा सामग्री हाइड्रोक्सीपाटाइट का उत्पादन करेगी. यह एक कैल्शियम
फॉस्फेट-आधारित सिरेमिक है, जिसका उपयोग आर्थोपेडिक कोटिंग में किया जाता है.
प्रत्यारोपण, दंत प्रत्यारोपण, अस्थि भराव, सौंदर्य प्रसाधन में इसका उपयोग होता है.

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चुनौतियों का साल रहा 2021-22
2021-22 में दुनिया में अस्थिरता देखी गयी. महामारी की लहर, कमोडिटी अपसाइकिल और
रूस-यूक्रेन युद्ध. इन सबका प्रभाव लोगों पर, आपूर्ति श्रृखंला और व्यापार पर पड़ा है.
कंपनी के अनुसार यह उसकी जोखिम प्रबंधन प्रणालियों के लिए भी परीक्षा वाला साल रहा. कंपनी को चलाने के साथ ही महामारी के दौरान उसकी सामुदायिक प्राथमिकताएं भी रही. वित्त वर्ष 2021-22 में टाटा स्टील का प्रदर्शन कई वर्षों की कड़ी मेहनत को दर्शाता है. कंपनी के सभी सहयोगियों द्वारा निरंतर सुधार, लागत टेक-आउट, चुस्त निर्णय लेने, पुनर्गठन, अकार्बनिक विकास और डाउनस्ट्रीम मूल्य वर्धित उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करने से यह संभव हो पाया.

हमारा अबतक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
कंपनी ने कहा है कि उसका अबतक का सर्वश्रेष्ठ वित्तीय प्रदर्शन इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि कंपनी के हमारे सभी हितधारकों ने अपना समर्थन दिया और हर मुश्किल समय में कंपनी का साथ दिया. टाटा स्टील का समेकित राजस्व 56 फीसदी बढ़कर 2,43,959 करोड़ रुपये हो गया. समेकित कच्चा इस्पात उत्पादन 31.03 मिलियन टन था और कुल डिलीवरी 29.52 मिलियन टन रही. भारत में टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स सहित स्टील बिजनेस में 53 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. कंपनी ने भूषण स्टील और उषा मार्टिन स्टील बिजनेस के अधिग्रहण के बाद डी-लीवरेजिंग को प्राथमिकता दी है. साथ ही कंपनी ने अपने शुद्ध ऋण में 50,000 करोड़ से अधिक की कमी की है. वित्त वर्ष 2021-22 में टाटा स्टील का फ्री कैश फ्लो 27,185 करोड़ था. कंपनी की कार्यशील पूंजी में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई. इसने अपना समेकित शुद्ध ऋण घटाया. कुछ महत्वपूर्ण मील के पत्थर को छुआ.

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