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टाटा मोटर्स हादसा:इनपंच 1.47 मिनट पर, नहीं पहुंचा वर्कप्लेस पर, मेन्टेनेंस पिट में कैसे पहुंचा कर्मचारी, सीसीटीवी से होगा खुलासा

मृतक की पत्नी को नौकरी दिलाने के यूनियन के मास्टर स्ट्रोक ने नेतागिरी की हवा निकाल दी, नौकरी देने को नहीं था तैयार प्रबंधन

Sanjay Prasad
Jamshedpur: टाटा मोटर्स के प्लांट वन के स्थायी कर्मचारी मुकुल डुंगडुंग (53) की पत्नी वालेट डुंगडुंग को प्रबंधन की ओर से स्थायी नौकरी देने के फैसले के बाद परिजनों ने मृतक कर्मचारी का अंतिम संस्कार कर दिया. अंतिम संस्कार के पहले मृतक का पोस्टमार्टम किया गया. मुकुल की कंपनी परिसर में सोमवार को संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गई थी. सोमवार को बी शिफ्ट में मुकुल की ड्यूटी थी. जांच में पता चला है कि उसका इनपंच एक बजकर 47 मिनट पर था, लेकिन वह अपने कार्यस्थल पर नहीं पहुंचा. जब उसके सुपरवाइजर ने फोन कर पूछा तो उसने बताया कि देर हो गई है, जल्द पहुंचते हैं. लेकिन जब इनपंच की जांच की गई तो उसका इनपंच एक बजकर 47 मिनट बताया. कंपनी के साथ ही पुलिस की ओर से की जा रही जांच की सुई अब इस बात पर आकर ठहर गई है कि वह एसेंबली लाइन के मेन्टेनेंस पिट में कैसे गया, जबकि उसका वर्कप्लेस दूसरा था. सात फीट के इस नाले में जाना आसान नहीं है. ऐसे में माना जा रहा है कि यह दुर्घटना ही हो सकती है. अभी तक हत्या या आत्महत्या के साक्ष्य किसी तरह के नहीं मिले हैं. कुछ लोग मृतक के कर्ज में दबे होने की बात कर रहे हैं तो कुछ का कहना है कि वह नशा ज्यादा करता था. लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिस तरह से मृतक की लाश मिली है, उसमें आत्महत्या करने की संभावना बेहद कम है.
इंटर पास है पत्नी, करेगी नौकरी
मृतक की पत्नी इंटर पास है और उसने नौकरी करने की बात प्रबंधन से कही है. प्रबंधन पहले नौकरी देने को तैयार नहीं था, लेकिन टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन की पहल के बाद मृतक को पत्नी देने को तैयार हुआ. यही नहीं यूनियन की सूझबूझ से इस बार किसी को नेतागिरी करने का मौका नहीं मिला. यूनियन पहले दिन से ही मृतक की पत्नी को नौकरी दिलाने के पक्ष में थी, क्योंकि उसका पक्ष यह था कि जब कंपनी परिसर में यह घटना हुई है तो प्रबंधन को नौकरी देनी चाहिए. यूनियन अड़ा रहा और आखिर में प्रबंधन को नौकरी देने के लिए राजी होना पड़ा. सात साल पहले कंपनी परिसर में हार्ट अटैक से गिरकर हुई एक कर्मचारी के मौत के मामले में प्रबंधन द्वारा आश्रित को नौकरी नहीं देने पर काफी विरोध हुआ था और इसके चलते राजनीतिक पार्टियों ने जमकर अपनी रोटी सेंकी थी, लेकिन इस बार यूनियन ने अपने मास्टर स्ट्रोक से राजनीति की हवा निकाल दी.
नौकरी के अलावा यह भी मिलेगा
मृतक की पत्नी को नौकरी के अलावा दुर्घटना की स्थिति में नॉर्मल इंश्योरेंस के रूप में 10 लाख, एक्सीडेंटल में 50 लाख, कर्मचारी के पीएफ-ग्रेच्यूटी, तीनों बच्चों की पढ़ाई के लिए मदद मिलेगी. नौकरी करने की स्थिति में मृतक की पत्नी को सेवा निधि की राशि नहीं मिलेगी. साथ ही रिटायरमेंट तक मृतक कर्मचारी के बेसिक और डीए की 50 फीसदी राशि भी तभी तक मिलेगी, जब तक पत्नी नौकरी ज्वाइन नहीं कर लें.

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