ChatraJharkhand

प्राकृतिक छटा से ओत-प्रोत चतरा का तमासीन जल-प्रपात पर्यटकों का पैराडाइज

♦सैलानियों को अपनी ओर बरबस खींचता है यह जल-प्रपात

Dharmendra Pathak

Chatra : प्रकृति ने बड़े ही फुरसत के क्षणों में तराश कर अगर किसी को एक अनोखा उपहार प्रदान किया है तो उसका नाम है “तमासीन जलप्रपात”, जो झारखंड के चतरा में वनों से आच्छादित इलाके के बीच में छिपा एक अद्भुत नजारा है.

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झारखंड का चतरा जिला प्राकृतिक सौन्दर्य के खजाने से पूरी तरह परिपूर्ण और पूरे प्रदेश में विख्यात है. जिले के पर्यटन स्थलों में शुमार भद्रकाली, कौलेश्वरी, खैवा-बनारू व गोवा जैसे कई महत्वपूर्ण नाम से लोग अपरिचित नहीं हैं. चतरा जिला में प्रकृति की गोद में कल-कल बहता तमासीन जल-प्रपात उन रमणीय स्थलों में से एक है जिसकी खास व अलग पहचान है. यहां  की सतरंगी फिजां सभी का मन मोह लेती है. पथरीली चट्टानों के विहंगम दृश्यों के बीच व दो घाटियों के मध्य कल-कल, छल-छल बहता यह जल-प्रपात बहुत समय से देशी-विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर बरबस ही खींचता चला आ रहा है. वहीं नये साल के आगमन पर इस स्थली पर बड़ी संख्या में सैलानी पिकनिक का लुप्त उठाने यहां पहुंचते हैं.

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मातंग ऋषि का आश्रम भी रहा है

जिला मुख्यालय से तक़रीबन 40 किलोमीटर दूर कान्हाचट्टी प्रखंड के तुलबुल पंचायत में अवस्थित तमासीन जल-प्रपात से बहती जल धारा का सौन्दर्य काफी मनमोहक है. कई फीट की ऊंचाइयों से गिरती जल धारा ऐसी प्रतीत होती है, जैसे दूध की धारा प्रवाहित हो रही हो. इस रमणीक स्थल का धार्मिक महत्व भी है. कहा जाता है कि यह स्थान ऋषि मातंग का आश्रम रहा है. जहां दोनों घाटियों के बीच एक गुफा भी है, जिसमें तमो गुण की अधिष्ठात्रि तामसी देवी का मंदिर है. इसकी पूजा-अर्चना को लेकर भी लोग दूर-दराज व अन्य प्रदेशों से यहां आते हैं. लोगों की ऐसी भी मान्यता है कि दुर्गा सप्तसती कथा में मां कौलेश्वरी व भद्रकाली के साथ-साथ तमासीन का भी वर्णन है.  वहीं नववर्ष के आगमन और मकर संक्रांति पर यहां बड़ी संख्या में लोग अपने पूरे परिवारजनों के संग पिकनिक का लुफ्त उठाने पहुंचते हैं. चारों तरफ जंगल और पहाड़ों से घिरे इस सुन्दर प्राकृतिक स्थल पर आकर इंसान मंत्रमुग्ध हो जाता है.

स्थानीय लोगों तथा सैलानियों के अलावा गणमान्य जनों का भी मानना है कि यह जल-प्रपात झारखंड के तमाम अन्य पर्यटन स्थलों से बिल्कुल अलग व अद्वितीय है. इसके साथ ही इस स्थली की एक धार्मिक मान्यता भी है जो लोगों को बरबस अपनी ओर खींचती है. यानी यह स्थल जहां चतरा जिले के एक मुख्य पिकनिक स्पॉट में शुमार है, वहीं यह लोगों की आस्था का भी केंद्र रहा है. इतिहासविद डॉक्टर प्रो इफ्तेखार आलम इसकी तुलना रांची के जोन्हा व दशम फॉल से करते हुए कहते हैं कि राज्य सरकार व केंद्र सरकार को यहां राजगीर के तर्ज पर रोप-वे कनेक्टिविटी को विकसित करना चाहिए.

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