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डीवीसी सप्लाई मजदूरों के पे-रिवीजन पर कोलकाता में वार्ता 22 फरवरी को

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Bermo(Bokaro) : डीवीसी मुख्यालय में डीवीसी के सदस्य सचिव पीके मुखोपाध्याय और कार्यपालक निदेशक (मासं) एके वर्मा की मौजूदगी में 13 फरवरी बुधवार को डीवीसी ठेका मजदूर संघ के महामंत्री भरत यादव के साथ संपन्न वार्ता के अनुसार बोकारो थर्मल एवं चंद्रपुरा पावर प्लांट में कार्यरत लगभग 1100 सप्लाई मजदूरों का लंबित वेतन पुनरीक्षण हेतू समझौता वार्ता की तिथि 22 फरवरी को डीवीसी मुख्यालय में मुकर्रर की गयी है. उक्त समझौता वार्ता के आलोक में डीवीसी के अपर निदेशक ओमप्रकाश ने बैठक के लिए पत्र निर्गत करते हुए इसकी जानकारी पत्र के मार्फत से संबंधित यूनियनों के प्रतिनिधियों महामंत्री डीवीसी ठेका मजदूर संघ,महामंत्री डीवीसी यूसीडब्ल्यूयू,महामंत्री एचएमकेपी,अध्यक्ष इंटक बेरमो,महामंत्री डीवीसी ठीकेदार मजदूर संघ चंद्रपुरा को आमंत्रित किया है.

डीवीसी के उच्चाधिकारियों ने भरत यादव को आश्वस्त किया कि सांसद रवींद्र कुमार पांडेय की पहल पर विगत दिनों डीवीसी के प्रभारी चेयरमैन गुरदीप सिंह के निर्देशानुसार उक्त मामले का यथाशीघ्र सम्मानजनक समाधान होगा. इस अवसर पर मुख्य रूप से डीवीसी के वरीय अपर निदेशक ओमप्रकाश और डीवीसी ठेका मजदूर संघ के मनोज सिंह उपस्थित थे.

बेनजीता रही है अब तक पांच दौर की वार्ता

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डीवीसी बोकारो थर्मल के 650 एवं चंद्रपुरा के 400 कुल 1050 सप्लाई मजदूरों के पेरिवीजन की मांग का समझौता कोलकाता मुख्यालय में पांच दौर की वार्ता के बाद भी पूरा नहीं किया जा सका है. विगत् 13 दिसंबर को बेनतीजा रही वार्ता के बाद सप्लाई मजदूरों की उम्मीदें अगली वार्ता की तिथि निर्धारण पर टिकी हुई थी.

डीवीसी अध्यक्ष ने पेरिवीजन की मांग को लेकर बनायी थी कमेटी

सप्लाई मजदूरों की संयुक्त मोर्चा में शामिल डीवीसी ठेका मजदूर संघ, यूसीडब्ल्यूयू, एचएमकेयू, इंटक के प्र्रतिनिधियों में से भरत यादव, अमरजीत सिंह, संजय मिश्रा, ब्रजकिशोर सिंह, नवीन कुमार पाठक, असीम तिवारी, आरपी केडिया, सरजू यादव, प्रमोद सिंह, दूधनाथ प्रसाद और नागेश्वर महतो की पेरिवीजन की मांग के बाद डीवीसी के सदस्य सचिव सह तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष पीके मुखोपाध्याय के निर्देश पर डीवीसी के अधिकारियों में से वरीय अपर निदेशक एचआर संजय प्रियरंजन, उप निदेशक अजीत कुमार, वरीय प्रबंधक वित्त अमल सरकार, बोकारो थर्मल के वरीय अपर निदेशक पीके सिंह और चंद्रपुरा के अपर निदेशक सुबोध मिश्रा की एक कमेटी बनायी गयी थी. गठित कमेटी सप्लाई मजदूरों की संयुक्त मोर्चा से उनकी मांगों को लेकर वार्ता कर डीवीसी अध्यक्ष को अवगत कराने का काम करेगी.

अब तक पांच बार हो चुकी है वार्ता

डीवीसी मुख्यालय की ओर से गठित कमेटी के द्वारा संयुक्त मोर्चा के साथ विगत् 2 मई 2018 से लेकर 13 दिसंबर 2018 के दरम्यान पांच दौर की वार्ता की जा चुकी है, परंतु वार्ता बेनतीजा ही रही है.

मांग को लेकर कहां फंसा है पेंच

संयुक्त मोर्चा की ओर से सप्लाई मजदूरों के लिए पेरिवीजन को लेकर उनको दिये जाने वाले कुल वेतन का 38 हजार रुपया भुगतान करने की मांग शामिल है. जबकि पांचवीं बार की संपन्न 13 दिसंबर को वार्ता में डीवीसी मुख्यालय के अधिकारियों ने संयुक्त मोर्चा को जो मांग को मान लेने का प्रस्ताव रखा था, वह कुल वेतनमान 20725 रुपया का ही था.

पड़ेगा डीवीसी पर सालाना 55 लाख रुपये का अतिरिक्त भार

वार्ता में डीवीसी के द्वारा गठित कमेटी के अधिकारियों का कहना था कि सप्लाई मजदूरों को पेरिवीजन के तहत यदि 20,725 रुपया का भुगतान किया जाता है तो डीवीसी के उपर सालाना 55 लाख रुपये का अतिरिक्त भार आयेगा. कमेटी का कहना था कि सप्लाई मजदूरों को दिये जाने वाले वेतन भुगतान से 10 फीसदी कमीशन ठीकेदार को और 18 फीसदी का भुगतान जीएसटी को करना पड़ेगा.

सप्लाई मजदूरों को खुद डीवीसी करे भुगतान

सप्लाई मजदूरों को भुगतान के एवज में डीवीसी को जो 55 लाख रुपया ठेकेदार एवं जीएसटी के  भुगतान में करना पड़ता है. उससे निजात के लिए डीवीसी खुद सप्लाई मजदूरों को संविदा पर काम करने वाले डॉक्टरों, नर्सिंग स्टॉफ एवं शिक्षकों की तरह करे. वर्तमान में उपरोक्त सभी को भुगतान खुद डीवीसी ही करता है.

80 फीसदी मजदूरों का होगा आखिरी पेरिवीजन

सप्लाई मजदूरों में से 70 से 80 फीसदी ऐसे सप्लाई मजदूर हैं जिनका वर्तमान पेरिवीजन आखिरी पेरिवीजन साबित होगा. 80 फीसदी सप्लाई मजदूर अगले पेरिवीजन तक अवकाश ग्रहण कर जायेंगे. इसलिए उनके पेंशन के लिए वर्तमान पेरिवीजन काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है.

मांग नहीं मानी गयी तो होगा चरणबद्ध आंदोलन

डीवीसी ठीका मजदूर संघ के महामंत्री भरत यादव और यूसीडब्ल्यू के अध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह का कहना है कि मांगों को लेकर अगर 22 फरवरी की बैठक भी बेनतीजा रही तो संयुक्त मोर्चा चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होगा. इसके तहत धरना, प्रदर्शन, टूल डाउन हड़ताल,अधिकारियों का घेराव और गेट जाम किया जाएगा. जिसकी सारी जवाबदेही डीवीसी के स्थानीय एवं मुख्यालय प्रबंधन की होगी.

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