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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन पर बन सकती है बात, सोनिया-राहुल की मौजूदगी में सीडब्लूसी की बैठक शुरू

Political Editor

Ranchi : पिछले कई वर्षों से कठिन राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक शनिवार को दिल्ली में शुरू हो गयी है. बैठक में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम सहित अन्य सदस्य मौजूद हैं. बैठक में लम्बे अरसे से खाली पड़े कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन पर बात बनने के संकेत मिल रहे हैं. इसके अलावा बैठक में पांच राज्यों में होनेवाले आगामी विधानसभा चुनाव और लखीमपुर खीरी कांड एजेंडे में शीर्ष पर रहेंगे. इसके साथ ही राजनीतिक और कृषि समेत तीन प्रस्ताव भी पारित किए जाएंगे.

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कांग्रेस की राजनीतिक चुनौतियों और संगठनात्मक कमजोरियों को लेकर पार्टी के अंदर से उठाए जा रहे सवालों के बीच पार्टी कार्यसमिति की इस महत्वपूर्ण बैठक में संगठन चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किए जाने की पूरी संभावना है. इस क्रम में सबसे पहले पार्टी का सदस्यता अभियान शुरू करने का फैसला लिए जाने के संकेत हैं.

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कोरोना महामारी के बाद कांग्रेस कार्यसमिति की पहली बैठक

कोरोना महामारी के बाद से यह कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की पहली बैठक है. यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब कांग्रेस की राज्य इकाइयों जैसे पंजाब, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पार्टी के भीतर घमासान मचा हुआ है. बैठक में कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों अशोक गहलोत (राजस्थान), भूपेश बघेल (छत्तीसगढ़) और चरणजीत चन्नी (पंजाब) के मौजूद रहने की उम्मीद है.

मई 2019 में पार्टी की लोकसभा में हार के मद्देनजर राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद सोनिया गांधी ने अगस्त 2019 में अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला था. इसके बाद से कांग्रेस के स्थायी राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद खाली है. उम्मीद है कि में स्थायी अध्यक्ष के चयन पर मुहर लगे.

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असंतुष्ट खेमे जी 23 समूह की मांग पर बुलाई गयी बैठक

यह बैठक पार्टी के असंतुष्ट खेमे जी 23 समूह के नेताओं की मांग पर बुलाई गई है, मगर जी-23 खेमा कार्यसमिति के केवल मुख्य सदस्यों के बजाय आमंत्रित सदस्यों और राज्यों के प्रभारियों को भी इसमें बुलाए जाने से नाखुश बताया जा रहा है.

मालूम हो कि जी 23 समूह ने पूर्णकालिक और सक्रिय पार्टी अध्यक्ष के साथ-साथ एक संगठनात्मक बदलाव की मांग की थी. गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, भूपिंदर हुड्डा, पृथ्वीराज चव्हाण, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी और मुकुल वासनिक सहित जी 23 नेताओं के एक समूह ने सोनिया गांधी को एक पत्र लिखकर पिछले साल अगस्त में पार्टी में तूफान खड़ा कर दिया था.

राज्यसभा में विपक्ष के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद ने भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को को पत्र लिखकर जल्द ही सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाने को कहा था. पार्टी ने 22 जनवरी को आयोजित सीडब्ल्यूसी की बैठक में फैसला किया था कि जून 2021 तक कांग्रेस का नियमित अध्यक्ष चुन लेगी, लेकिन 10 मई को होने वाली सीडब्ल्यूसी की बैठक कोरोना महामारी की वजह से टाल दी गयी थी. बैठक में मूल्य वृद्धि, किसानों के विरोध प्रदर्शन और देश की आर्थिक स्थिति जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.

कार्यसमिति की बैठक में 56 सदस्यों को भेजा गया था न्योता

सूत्रों के अनुसार, कार्यसमिति की बैठक में 56 सदस्यों को न्योता दिया गया है जिसमें राज्यों के प्रभारी और विशेष आमंत्रित सदस्य भी शामिल हैं. जबकि जी-23 की अगुआई कर रहे गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को जो पत्र लिखा था उसमें कार्यसमिति के केवल मुख्य सदस्यों को ही बैठक में बुलाने की मांग रखी थी. अहमद पटेल और मोतीलाल वोरा के निधन के बाद कार्यसमिति में अभी 20 सदस्य हैं. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस समय अस्वस्थ हैं और उनके बैठक में शामिल होने की संभावना नहीं है.

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असंतुष्ट खेमे से केवल 2 सदस्य रहेंगे उपस्थित

इस लिहाज से कार्यसमिति के 19 मुख्य सदस्य ही बैठक में रहेंगे जिनमें असंतुष्ट खेमे के केवल दो ही सदस्य हैं- गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा. एक समय असंतुष्ट खेमे में रहे मुकुल वासनिक नेतृत्व को बहुत असहज करेंगे, इसकी गुंजाइश नहीं दिखती. वहीं, पी. चिदंबरम तटस्थ रहते हुए भी नेतृत्व की सियासी लाइन-लेंथ से बहुत अलग नहीं रहे हैं. इनके अलावा बैठक में बुलाए गए अधिकांश सदस्य कांग्रेस नेतृत्व के राजनीतिक दृष्टिकोण और फैसले के साथ रहेंगे.

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सदस्यता अभियान शुरू करने के संकेत

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव कराने की पहली कड़ी में कार्यसमिति पार्टी का सदस्यता अभियान शुरू करने को मंजूरी देगी. यह शुरू हुआ तो फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा, जिसमें अपेक्षाकृत लंबा समय लगेगा. जबकि असंतुष्ट नेता अध्यक्ष का चुनाव जल्द कराए जाने के पक्ष में हैं.

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कार्यसमिति में पारित हो सकते हैं ये तीन प्रस्ताव

कार्यसमिति के राजनीतिक प्रस्ताव में देश के मौजूदा वातावरण जिसमें संघीय ढांचे पर केंद्र के प्रहार के अलावा असम-मिजोरम बार्डर, नगालैंड में हुए संघर्षपूर्ण विवाद का जिक्र कर चिंता जताई जाएगी. वहीं, चीन के पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर अतिक्रमण के 18 महीने बाद भी स्थिति चिंताजनक और गंभीर बने होने को लेकर सरकार पर प्रहार किया जाएगा.

कृषि संकट को लेकर अलग प्रस्ताव होगा जिसमें कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ 11 महीनों से चल रहे आंदोलन पर केंद्र की बेरुखी को लेकर हमला बोला जाएगा. आर्थिक स्थिति और महंगाई पर तीसरे प्रस्ताव में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के अलावा आम जरूरत की वस्तुओं की बेतहाशा महंगाई रोकने में सरकार की विफलता को लेकर सवाल उठाए जाएंगे.

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