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ज्यादा एंटीबायोटिक लेना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक, बढ़ सकता है पार्किंसन रोग का खतरा: स्टडी

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London: रोजाना की दौड़ती-भागती जिंदगी में अक्सर हम लोग सिरदर्द, पेटदर्द या बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह लिए कोई भी एंटीबायोटिक दवाई ले लेते हैं. यदि पर आप एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक इस्तेमाल करते हैं तो आपको सावधान हो जाने की आवश्यकता है, क्योंकि एक अध्ययन के अनुसार इन दवाओं और पार्किंसन बीमारी के बीच संबंध है.

अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि इस बीमारी का संबंध आंत संबंधी लाभकारी जीवाणुओं के नष्ट होने से हो सकता है.

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फिनलैंड में हेलसिंकी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों समेत अनुसंधानकर्ताओं ने 1998 से 2014 के दौरान राष्ट्रीय रजिस्ट्रियों में दर्ज पार्किंसन बीमारी के करीब 14000 मरीजों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया.

‘मूवमेंट डिसॉर्डर्स’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया कि कुछ एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से लोगों को पार्किंसन बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.

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हेलसिंकी विश्वविद्यालय अस्पताल के मुख्य अनुसंधानकर्ता फिलिप शेफरजन्स ने कहा, ‘हमारे अध्ययन में ये बात पता चली है कि आंत के ‘माइक्रोबायोटा’ को प्रभावित करने वाली और आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली कुछ एंटीबायोटिक खतरे का कारण हो सकती हैं.’

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क्या है पार्किंसन रोग?

पार्किंसन रोग नर्वस सिस्टम का एक तेजी से फैलने वाला विकार है, जो आपकी गतिविधियों को प्रभावित करता है. यह धीरे-धीरे विकसित होता है. यह बीमारी कभी-कभी केवल एक हाथ में होने वाले कम्पन के साथ शुरू होती है.

लेकिन, जब कंपकपी पार्किंसन रोग का सबसे मुख्य संकेत बन जाती है तो यह विकार अकड़न या धीमी गतिविधियों का कारण भी बनता है. पार्किंसन रोग के शुरुआती चरणों में,पीड़ित के चेहरे के हाव भाव कम या खत्म हो सकते हैं या चलते समय बाजुएं हिलना बंद कर सकती हैं. रोगी की आवाज़ धीमी या अस्पष्ट हो सकती है. समय के साथ पार्किंसन बीमारी के बढ़ने के कारण लक्षण गंभीर हो जाते हैं.

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