विजेता – NEWSWING https://newswing.com कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें Sun, 24 May 2020 13:20:14 +0000 en-GB hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.4.2 https://newswing.com/wp-content/uploads/2020/07/favicon.jpg विजेता – NEWSWING https://newswing.com 32 32 लॉकडाउन फेल, इससे जानें बचीं नहीं बल्कि इसके कारण मरने वालों की संख्या बढ़ गयी : नोबेल विजेता वैज्ञानिक https://newswing.com/lockdown-failed-it-did-not-save-lives-but-it-increased-the-number-of-people-killed-nobel-winning-scientist/179244/ https://newswing.com/lockdown-failed-it-did-not-save-lives-but-it-increased-the-number-of-people-killed-nobel-winning-scientist/179244/#respond Sun, 24 May 2020 12:12:21 +0000 https://newswing.com/?p=179244 London :  भारत समेत दुनिया के कई देशों में लागू लॉकडाउन को अब चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा रहा है. दुनिया भर की सरकारों ने लॉकडाउन को कोरोना से मुक्ति का सबसे अचूक हथियार बताया था. पर, अब कोरोना खत्म होने से पहले ही इसे हटाया जाने लगा है. हालांकि ऐसा नहीं है कि जिन देशों …

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London :  भारत समेत दुनिया के कई देशों में लागू लॉकडाउन को अब चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा रहा है. दुनिया भर की सरकारों ने लॉकडाउन को कोरोना से मुक्ति का सबसे अचूक हथियार बताया था. पर, अब कोरोना खत्म होने से पहले ही इसे हटाया जाने लगा है. हालांकि ऐसा नहीं है कि जिन देशों में लॉकडाउन खत्म किया जा रहा है, वहां कोरोना से मुक्ति पा ली गयी है. या लॉकडाउन की वजह से उनको मुक्ति मिली. बल्कि उल्टा ही हुआ. लॉकडाउन करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई. करोड़ों की संख्या में लोग बेरोजगार हुए. कोरोना के अलावा दूसरे बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी.

अब इस बात का आकलन किया जा रहा है कि लॉकडाउन से कुछ फायदा हुआ या नहीं. क्योंकि भारत जैसे देश में लॉकडाउन के बावजूद मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है. सिलसिला अभी तक जारी है. दुनिया के कई देशों में भी कोरोना के मामले बढ़ने की रफ्तार पहले से तेज हुई. तब लॉकडाउन को हटाया जाने लगा है. इससे यह भी साफ होता जा रहा है कि दुनिया भर की सरकारें अपनी विफलता को छिपाने के लिये लॉकडाउन घोषित किया. और अब हाथ खड़े कर रहें हैं.

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लॉकडाउन की वजह से जिंदगी बची नहीं बल्कि लोगों की मौतें हुईं. ये कहना है कि नोबेल पुरष्कार विजेता वैज्ञानिक माइकल लेविट का. यूके के टेलीग्राफ अखबार की एक रपट की मुताबिक स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लेविट ने माना है कि लोगों को घर में बंद रखने का फैसला, पैनिक की वजह से लिया गया. इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था. गौर करने वाली बात यह है कु भारत समेत अधिकांश देशों की सरकार पर यह आरोप लग रहे हैं कि गलत तरीके से लॉकडाउन को लागू किया गया. जिस कारण लोगों, खास कर मजदूरों को अमानवीय परिस्थितियों से गुजरना पड़ा.

गौरतलब है कि माइकल लेविट कोरोना महामारी फैलने को लेकर आरंभिक अनुमान लगाने में सही साबित हुए थे. उन्होंने शुरूआत में ही बताया था कि लॉकडाउन इसका इलाज नहीं है. इसका कोई फायदा नहीं होने वाला. उन्होंने यह भी बताया था कि कोरोना संक्रमण रोकने के लिये ज्यादा ये ज्यादा जांच ही किसी भी देश को सफल बनायेगा.


‪‬ बहरहाल इस राय के आने के बाद, दुनियाभर में लॉकडाउन लागू करने या न करने को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है.  सराकारों को कटघरे में खड़ा किया जाने लगा है.

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बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी लॉकडाउन का विरोध करते रहे हैं. स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने भी लॉकडाउन के खिलाफ बोला था. उन्होंने इसे तार्किक नहीं बताया था.

वहीं अब अमेरिका के संक्रामक रोग विशेषज्ञ एंथनी फौसी ने भी कह दिया है कि लंबे समय तक लॉकडाउन रखने से ऐसा नुकसान होगा जिसकी भरपाई करना फिर मुश्किल हो जायेगा. भविष्य में इससे औऱ बड़े सकंट खड़े होंगे. लोगों, खास कर गरीब और मीडिल क्लास के लोगों के सामने जीवन यापन की समस्या पैदा हो जायेगी. आर्थिक हालात खराब होने पर दुनिया के कई देशों के शासक निरंकुश बन सकते हैं.

ब्रिटेन में किए गए लॉकडाउन को लेकर लेविट ने कहा कि इंपेरियल कॉलेज के एक प्रोफेसर की मॉडलिंग के आधार पर सरकार ने कथित हर्ड इम्यूनिटी पॉलिसी को रद्द कर दिया.

अफरातफरी फैलने के डर से लॉकडाउन का फैसला लिया. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर दुनियाभर के नेताओं के बीच ‘पैनिक वायरस’ फैल गया था. इसे समझने में भूल हुई. देखा जाये तो वैज्ञानिकों की बात पिरथम दृष्टया सही लग रहा है.

एक और सवाल यह उठ रहा है कोरोना से पहले दुनिया के कई देशों की आर्थिक स्थिति खराब थी. ऐसा सरकारों की गलत नीतियों के कारण हुआ. ऐसे हालात वाले देशों के शासक ने अपनी आर्थिक विफलता को छिपाने के लिये कोरोना को सीढ़ी बनाया. गैरनियोजित तरीके से लॉकडाउन लागू किया. लोगों को जागरूक करने से ज्यादा डराया. और अपने देश की आर्थिक हालात को खराब कर लिया. आने वाले दिनों में ऐसी सरकारें आर्थिक नाकामयाबी का दोष कोरोना को देंगे.

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आइये मिलते हैं उन लोगों से जो #Corona से जंग में विजेता रहे https://newswing.com/fightagainstcorona-lets-meet-the-corona-winners-mumbai-kerala-ahmedabad/168708/ https://newswing.com/fightagainstcorona-lets-meet-the-corona-winners-mumbai-kerala-ahmedabad/168708/#respond Mon, 06 Apr 2020 13:23:43 +0000 https://newswing.com/?p=168708 News Wing Desk कोरानो वायरस के संक्रमण से जूझ रही दुनिया हर दिन हो रही मौतों के आंकड़ों और बढ़ रहे मरीजों की संख्या से परेशान है. इस ग्लोबल महामारी से भारत भी अछूता नहीं है. लॉकडाउन का सामना कर रहे देश के सामने गंभीर चुनौतियां आनी अभी शेष हैं. लेकिन एक तरफ जहां चारों …

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News Wing Desk

कोरानो वायरस के संक्रमण से जूझ रही दुनिया हर दिन हो रही मौतों के आंकड़ों और बढ़ रहे मरीजों की संख्या से परेशान है. इस ग्लोबल महामारी से भारत भी अछूता नहीं है. लॉकडाउन का सामना कर रहे देश के सामने गंभीर चुनौतियां आनी अभी शेष हैं. लेकिन एक तरफ जहां चारों ओर से आ रही नकारात्मक खबरें हमारे दिलो-दिमाग को कुरेद रहीं हैं, वहीं कुछ खबरें ऐसी हैं जो हमारी रूह तक को सुकून दे रही हैं.

यह सही है कि दुनिया भर में इससे हजारों लोगों की मौत हो गयी है और भारत में यह आंकड़ा 100 पार कर गया है, पर इसका एक पहलू यह भी है कि इससे संक्रमित मरीज ठीक भी हो रहे हैं. और ऐसा नहीं कि कोई एक खास आयुवर्ग का मरीज ठीक हो रहा है. हम आपको यहां तीन ऐसी सफल कहानियां बता रहे हैं जिन्हें पढ़ कर सकारात्मकता का संचार हो सकता है….

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5 दिन का बच्चा दे चुका है मात

Mumbai : महाराष्ट्र में देश भर में सबसे ज्यादा मामले सामने आये हैं. मरीजों के बढ़ते आंकड़े और हो रही मौतों के बीच एक पांच दिन के बच्चे ने कोरोना वायरस को मात दे दी. यह बच्चा चेंबूर इलाके का था. डिलिवरी के वक्त उसकी मां को वह बेड मिल गया था, जिसके बगल में कोविड-19 का मरीज था. वहीं से उसकी मां औऱ उसे कोरोना वायरस का संक्रमण हुआ. जब उसे संक्रमण हुआ था तो उसकी उम्र मात्र तीन दिन की थी. लेकिन दो दिन बाद उसकी रिपोर्ट निगेटिव आयी. उसकी मां की भी रिपोर्ट निगेटिव आयी. एक बार और टेस्ट किये जाने के बाद भी उनकी रिपोर्ट निगेटिव आयी. तीसरी बार भी उस बच्चे की रिपोर्ट निगेटिव आयी. हालांकि डॉक्टर उन दोनों पर नजर बनाये हुए हैं.

देश के सबसे उम्रदराज दंपती हो गये ठीक

केरल का एक बुजुर्ग दंपती अब कोरोना वायरस को हरा चुका है. पति की उम्र है 90 साल औऱ पत्नी की 88 साल. जब उनका टेस्ट किया गया तो दोनों पॉजिटिव निकले. दोनो का इलाज शुरू हुआ. शुरू में उन्हें अलग-अलग आइसीयू में रख कर इलाज किया जा रहा है, जिससे वे काफी चिड़चिड़ा रहे थे. बाद में किसी तरह एक ऐसे आइसीयू का इंतजाम किया गया जिसके बीच में शीशे की दीवार थी और वे दोनों एक दूसरे को देख सकते थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उम्र के लिहाज से पति इस वायरस से जंग जीतने वाले दुनिया के दूसरा सबसे उम्रदराज़ शख्स बन गये हैं.

दोनों का कोट्टयम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, केरल में तीन हफ्ते तक इलाज चला. ये दोनों ही अपनी बेटी और दामाद के संपर्क में आये थे. इन्हें इटली कपल कहा जा रहा है क्योंकि वे चार हफ्ते पहले इटली से वापस लौटे थे.

इलाज के दौरान एक मौके पर बुजुर्ग की हालत में गिरावट आने लगी और उन्हें वेंटीलेटर पर रखना पड़ा. उनकी हालत में 24 घंटे बाद सुधार आया और उन्हें वेंटीलेटर से हटा लिया गया. इसके बाद डॉक्टरों और नर्सों को उनके बेड से रोके रखने में काफी मुश्किलें आयीं.

अब वे दोनों ठीक हैं और अपने गांव में 14 दिन के एकांतवास में हैं.

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गुजरात की पहली मरीज भी घर लौंटी

Ahmedabad:  गुजरात की 34 वर्ष की युवती कोरोना वायरस की चपेट में आ गयी थीं. ये राज्य की पहली मरीज थीं. कोरोना वायरस से लड़ कर अब ये ठीक हो चुकी हैं. जब वे ठीक होकर अस्पलात से घर पहुंचीं तो उनकी सोसाइटी के लोगों ने एक विजेता की तरह उनका स्वागत किया. थाली और शंख बजा कर उनकी हौसलाआफजाई की गयी.

यह युवती फिनलैंड से वापस लौटी थी. वहीं उसे संक्रमण हुआ. महिला को सरदार वल्लभ भाई अस्पताल में भर्ती कराया गया तो वह पॉजिटिव निकलीं. उसके बाद उनका इलाज चला. कुछ दिनों के इलाज के बाद जब दोबोरा उनकी जांच की गयी तो उनकी रिपोर्ट निगेटिव आयी.

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#Bank_Of_America के CEO ब्रायन टी मोयनिहान ने कहा, भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है… https://newswing.com/bank-of-america-ceo-brian-t-moynihan-said-indian-economy-is-in-good-shape/157193/ https://newswing.com/bank-of-america-ceo-brian-t-moynihan-said-indian-economy-is-in-good-shape/157193/#respond Wed, 29 Jan 2020 14:46:31 +0000 https://newswing.com/?p=157193 Davos : बैंक ऑफ अमेरिका के CEO ब्रायन टी मोयनिहान ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है. यह सुस्ती से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर है. जान लें कि पूर्व में अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी भी भारतीय अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने का संकेत दे …

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Davos : बैंक ऑफ अमेरिका के CEO ब्रायन टी मोयनिहान ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है. यह सुस्ती से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर है. जान लें कि पूर्व में अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी भी भारतीय अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने का संकेत दे चुके हैं.

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भारत के पास बड़ी युवा आबादी और प्रतिभा पूल है

इस क्रम में आज बुधवार को बैंक ऑफ अमेरिका ने भी यही बात दोहराई है. खबरों के अनुसार बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) के CEO ब्रायन टी मोयनिहान ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था काफी अच्छी स्थिति में है और वहां उपभोग बढ़ रहा है. कहा कि भारत के पास बड़ी युवा आबादी और प्रतिभा पूल है और इनकी क्षमता का अभी पूरा दोहन नहीं हुआ है. इस क्रम में मोयनिहान ने अमेरिका और कुल वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि को लेकर भी भरोसा जताया.

 

उन्होंने अपनी शोध टीम के अनुमान का उल्लेख करते हुए कहा कि 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 3.2 प्रतिशत और अमेरिका की 1.7 प्रतिशत रहेगी. मोयनिहान ने कहा, कुल मिलाकर दुनिया के बारे में हमें अच्छा महसूस होता है. यह धीमी वृद्धि का वातावरण है और हमें इसी के साथ आगे बढ़ना है.

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अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था 

अमेरिका के बारे में उन्होंने कहा कि हम दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और हम अभी भी आगे बढ़ रहे हैं. ये अच्छी बात है. मोयनिहान पिछले सप्ताह विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक-2020 में भाग लेने दावोस आये थे.

भारत की बड़ी युवा आबादी से जुड़े जनांकिक लाभ और अन्य वृद्धि संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, आपके देश की सबसे अच्छी बात यह है कि यह बड़ा देश है, आगे बढ़ रहा है, आबादी युवा है, शिक्षा में सुधार हो रहा है और आपके पास प्रतिभाएं हैं. 

भारत के पास अर्थव्यवस्था के लिए काम करने को कौशल और दक्षता

मोयनिहान ने कहा, आपके पास अर्थव्यवस्था के लिए काम करने को कौशल और दक्षता है. भविष्य की पीढ़ियों के लिए वॉयस आधारित कॉल सेंटरों के मामले में श्रम की जरूरत उतनी नहीं रहेगी, लेकिन यह अधिक ज्ञान वाली अर्थव्यवस्था और चौथी औद्योगिक क्रांति के क्षेत्रों की ओर बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति काफी अच्छी है और वहां उपभोग की कहानी आगे बढ़ रही है 

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#NobelLaureate अभिजीत ने कहा, ज्यादा से ज्यादा पैसा पीएम किसान योजना में खर्च करें, मनरेगा की मजदूरी दर बढ़ायें    https://newswing.com/nobel-laureate-abhijeet-said-spend-more-and-more-money-in-pm-kisan-yojana-increase-mnrega-wage-rate/139688/ Mon, 21 Oct 2019 08:59:41 +0000 https://www.newswing.com/?p=139688 NewDelhi : प्रसिद्ध अर्थशास्त्री  नोबेल पुरस्कार विजेता डॉक्टर अभिजीत बनर्जी ने कहा है कि  मोदी सरकार द्वारा कॉरपोरेट टैक्स में कटौती उचित कदम नहीं कहा जा सकता. द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार अभिजीत  बनर्जी ने यह विचार व्यक्त किये हैं. उन्होंने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती करने के बजाय  जनता की खरीद क्षमता को बढ़ाने …

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NewDelhi : प्रसिद्ध अर्थशास्त्री  नोबेल पुरस्कार विजेता डॉक्टर अभिजीत बनर्जी ने कहा है कि  मोदी सरकार द्वारा कॉरपोरेट टैक्स में कटौती उचित कदम नहीं कहा जा सकता. द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार अभिजीत  बनर्जी ने यह विचार व्यक्त किये हैं. उन्होंने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती करने के बजाय  जनता की खरीद क्षमता को बढ़ाने की बात कही है.

अभिजीत बनर्जी ने द हिंदू को दिये साक्षात्कार में पीएम किसान योजना में भूमिहीन किसानों को भी शामिल करने की बात कही है. साथ ही मनरेगा में मिलने वाली मजदूरी दर बढ़ाने की बात कही.

अभिजीत  बनर्जी ने कहते हैं कि मैं कॉरपोरेट टैक्स में कटौती नहीं करता. हालांकि, वे कहते हैं कि  इसे अब दोबारा बदलना काफी महंगा साबित होगा. लेकिन, इस पर कुछ विचार किया जा सकता है. क्योंकि, वित्तीय घाटे पर ज्यादा बोझ है. यह बेहतर होता कि ज्यादा से ज्यादा पैसा पीएम किसान योजना में खर्च किया जाता.  उन्होंने  मनरेगा की मजदूरी दर में इजाफा करने की बात कही. कहा कि  मनरेगा के जरिए पैसा उन लोगों के हाथ में जाता जो सही में इसे खर्च करते.

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कॉरपोरेट सेक्टर पहले से ही ढेर सारे कैश पर बैठा हुआ है

अभिजीत  बनर्जी के अनुसार  कॉरपोरेट सेक्टर पहले से ही ढेर सारे कैश पर बैठा हुआ है. वह निवेश इसलिए नहीं कर रहा, क्योंकि उसके पास पैसे नहीं है, बल्कि इसलिए नहीं कर रहा, क्योंकि उसके पास डिमांड नहीं है. डॉक्टर बनर्जी ने कहा कि भारत के पास जीएसटी के ऊचे स्लैब में अधिक आइटम होने चाहिए. क्योंकि, आप सिर्फ आय पर टैक्स बढ़ाकर जीडीपी अनुपात में सुधार नहीं कर सकते हैं.

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समर्थन मूल्य आंशिक रूप से श्रम की मांग बढ़ाता है

बनर्जी  ने कहा कि हायर टैक्स से जमा राशि  बड़े विजन वाली स्कीम्स  पीएम किसान योजाना आदि में इस्तेमाल किया जाना चाहिए. डॉक्टर अभिजीत बनर्जी ने  कहा, मुझे लगता है कि भूमिहीन मजदूरों को इससे बाहर किये जाने का कोई कारण नहीं बनता. खास तौर पर यदि आप इसे सपोर्ट प्राइस के विकल्प के रूप में देखते हैं .

बनर्जी के अनुसार समर्थन मूल्य आंशिक रूप से श्रम की मांग को बढ़ाता है, क्योंकि यह अधिक गेहूं उगाने के लिए अधिक लाभदायक है.  इसलिए  गेहूं काटने के लिए अधिक  मजदूरों को किराये पर लिया जायेगा.   उन्होंने उदाहरण दिया,  अगर मैं उत्पादन के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि को हटाता हूं (पीएम किसान योजना के तहत पैसे देकर), तो यह श्रम की मांग को कम करने वाला होगा.

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#RahulGandhi ने #NobelLaureate अभिजीत पर गोयल की टिप्पणी पर कहा, ये कट्टरपंथी घृणा में अंधे हैं   https://newswing.com/rahul-gandhi-said-on-goyals-comment-on-nobel-laureate-abhijeet-he-is-blind-in-fundamentalist-hatred/139496/ Sun, 20 Oct 2019 09:47:16 +0000 https://www.newswing.com/?p=139496 NewDelhi :  कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की टिप्पणी के लिए उन पर निशाना साधते हुए कहा कि ये कट्टरपंथी घृणा में अंधे हैं और उन्हें इस बात का इल्म ही नहीं है कि पेशेवर व्यक्ति क्या होता है. दरअसल केन्द्रीय मंत्री ने पुणे में …

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NewDelhi :  कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की टिप्पणी के लिए उन पर निशाना साधते हुए कहा कि ये कट्टरपंथी घृणा में अंधे हैं और उन्हें इस बात का इल्म ही नहीं है कि पेशेवर व्यक्ति क्या होता है. दरअसल केन्द्रीय मंत्री ने पुणे में संवाददाताओं से बातचीत में बनर्जी को वाम झुकाव वाला व्यक्ति करार दिया था. इसके बाद बनर्जी ने शनिवार को एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा था कि वाणिज्य मंत्री मेरी पेशेवर दक्षता पर प्रश्न उठा रहे हैं.

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लाखों भारतीयों को आप के काम पर गर्व है 

राहुल  गांधी ने पीयूष की टिप्पणी पर बनर्जी के जवाब से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों को टैग करते हुए ट्वीट किया, प्रिय श्री बनर्जी, ये कट्टरपंथी घृणा में अंधे हैं . आप घृणा से भरे इन अंधभक्तों को दशकों के प्रयास के बाद भी प्रोफेशनल होना क्या होता यह नहीं सिखा सकते.  भले ही आप एक दशक तक भी कोशिश करते रहें.

आप इस बात को लेकर आश्वस्त रहें कि लाखों भारतीय आपके काम की वजह से खुद को गर्वांवित महसूस करते हैं , कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, इस बात को ध्यान में रखें कि लाखों भारतीयों को आप के काम पर गर्व है. जान लें कि गोयल ने शुक्रवार को यह भी कहा था कि न्यूनतम आय योजना पर बनर्जी के सुझाव को भारतीय मतदाताओं ने नकार दिया है और जैसा वह सोचते हैं उसे मानने की जरूरत नहीं है.

राहुल  गांधी से पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बनर्जी के संदर्भ में गोयल की टिप्पणी को लेकर शनिवार को सरकार पर तंज कसते हुए कहा था कि सरकार का काम कॉमेडी सर्कस  चलाना नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था में सुधार करना है.

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नोबल पुरस्कार विजेता #OlgaTokarczuk की दो कविताएं https://newswing.com/nobel-prize-winner-olga-tokarczuks-two-poems/137946/ Thu, 17 Oct 2019 08:22:32 +0000 https://newswing.com/?p=137946 2018 के लिए नोबल पुरस्कार विजेता ओल्गा तकारचुक की दो कविताएं आपके लिए. पूर्वी यूरोप की स्लाव भाषाओं में कविता आज भी तुकान्त ही लिखी जाती है. अतुकान्त या मुक्त छन्द में वे ही कवि कविता लिखते हैं, जो यूरोप में चर्चित होना चाहते हैं. तकारचुक की एक कविता तुकान्त है, इसलिए तुकान्त ही अनुवाद …

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2018 के लिए नोबल पुरस्कार विजेता ओल्गा तकारचुक की दो कविताएं आपके लिए. पूर्वी यूरोप की स्लाव भाषाओं में कविता आज भी तुकान्त ही लिखी जाती है. अतुकान्त या मुक्त छन्द में वे ही कवि कविता लिखते हैं, जो यूरोप में चर्चित होना चाहते हैं. तकारचुक की एक कविता तुकान्त है, इसलिए तुकान्त ही अनुवाद भी है. हां, ओल्गा तकारचुक ने कुछ अतुकान्त कविताएं भी लिखी हैं. ओल्गा तकारचुक पोलैण्ड में रहने वाले एक उक्रअईनी भाषी परिवार में पली-बढ़ी हैं. इसलिए वे उक्रअईनी और पोल (पोलिश) दोनों भाषाओं में कविता लिखती हैं.

(एक)

मन्द गति से धड़के हैं दिल, बून्द-बून्द टपके हैं ख़ून,

कितना गहरा प्यार किया है, कितना गहरा उसका जुनून

पर देवदूत ले गया आत्मा, उसकी निश्छल अपने साथ,

बहुत प्यार करती थी वो उसे, जानता है वो भी ये बात

 

इन्तज़ार किया उसने देर तक, राह देखी उसकी बहुतेरी

वादों पर बेहद विश्वास था उसके, पर वादे थे वे हेरा-फेरी

वो राह देखती रही अन्त तक, आंखों से आंसू रही बहाती

न घंटी बजी फ़ोन की उसके, एसएमएस, निकला संघाती

 

अन्धकार छा गया आत्मा पर, भय छाया था, धूल थी छायी

मधुर अतीत था प्रेम का पल वह, दिल पे उसके भूल थी छायी

सब कुछ ख़त्म हो चुका था.. धड़के दिल.. बन्द हो गयीं आंखें

वो ख़ुद देवदूती बन गयी, चली गयी स्वर्ग, खोल दिल की पांखें

 

अब फ़ोन करेगा अगर वो कभी तो उसे घंटी न देगी सुनाई,

देवदूतों के होती नहीं जेबें, न उनके पास होते टेलीफ़ोन, भाई

फ़ोन करेगा अब यदि वो उसे, तो कोई उत्तर वो नहीं पायेगा

चली गयी बिन टिकट जहां पर, वो उससे वहीं मिलने जायेगा

(दो)

काग़ज़ पर लिखे शब्द …

मैं पहले से लिखी पंक्तियां काट दूंगी

शब्द …

वास्तव में शून्य होते हैं, उन्हें चूमो मत, पुच-पुच

शब्द सम्पर्क के लिए …

भेजती हूं वो, जो लिखती हूं

शब्द ..

टिप्पणियां लिखती हूं, पर उनमें होती है सच्चाई कम

उपन्यासों में शब्द…

उनमें धोखा होता है…सिर्फ़ धोखा…

शब्द…

उनमें नन्हीं किरचों में बदल चुके सपने होते हैं

गीतों में शब्द

ये सिर्फ़ काल्पनिक इबारतें होती हैं

शब्द..

सिर्फ़ कड़वाहट..झूठ…लेकिन उन्हें कोई तो गाता है…

दिल से निकले शब्द…

भावनाओं से भरे होते हैं, बुद्धिहीन… झूठ नहीं बोलते

शब्द…

भावनाएं तिरोहित होती हैं, शब्द भी मर जाते हैं

हवा में शब्द…

हम उन्हें यूं ही फेंकते हैं, वे अक्सर हमारे साथ होते हैं

शब्द…

नंगे पैर चलूंगी मैं उन पर

आंखों में शब्द…

लिखे हुए हैं ऐसे, पहुंच जाते हैं सपनों में

शब्द..

धूल से भरे हुए और भूले हुए अवशेष

मुलाकात में शब्द…

सिर्फ़ सामान्य से कुछ वाक्य

शब्द…

मुलाक़ात ख़त्म हुई, भूल गयी…याद आयेंगे अब अगली मुलाक़ात में

प्रेम में शब्द..

झूठ बोला जाता है क्यों इतनी बेशर्मी के साथ…आख़िर

शब्द…

प्रेम बीत जाता है और तुम…तुम बौड़म बन जाते हो

 

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#Nobellaureate अभिजीत बनर्जी ने कहा,  राष्ट्रवाद गरीबी जैसे मुद्दों से ध्यान भटका देता है… https://newswing.com/nobel-laureate-abhijit-banerjee-said-nationalism-distracts-from-issues-like-poverty/138763/ Wed, 16 Oct 2019 09:08:04 +0000 https://newswing.com/?p=138763 NewDelhi : राष्ट्रवाद खासकर भारत जैसे देशों में गरीबी सरीखे बड़े मुद्दों से ध्यान भटका देता है. यह विचार भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री  Nobel Prize विजेता अभिजीत बनर्जी के हैं.  Esther Duflo व Michael Kremer के साथ इकनॉमिक्स में 2019 का नोबल पुरस्कार जीतने वाले अभिजीत विनायक बनर्जी ने इंडिया टुडे टीवी को दिये …

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NewDelhi : राष्ट्रवाद खासकर भारत जैसे देशों में गरीबी सरीखे बड़े मुद्दों से ध्यान भटका देता है. यह विचार भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री  Nobel Prize विजेता अभिजीत बनर्जी के हैं.  Esther Duflo व Michael Kremer के साथ इकनॉमिक्स में 2019 का नोबल पुरस्कार जीतने वाले अभिजीत विनायक बनर्जी ने इंडिया टुडे टीवी को दिये इंटरव्यू में कहा कि राष्ट्रवाद खासकर भारत जैसे देशों में गरीबी सरीखे बड़े मुद्दों से ध्यान भटका देता है.

उन्होंने यह भी कहा देश में न्यूनतम आय गारंटी योजना की सख्त जरूरत है. राजनीतिक गलियारों में अभिजीत की टिप्पणी को एक तरह से मोदी सरकार पर निशाना माना जा रहा है

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 जेएनयू में भारतीय राजनीति को गहराई से समझने में मदद मिली

अपने इंटरव्यू में अभिजीत बनर्जी ने गरीबी को लेकर चिंता जताते हुए बताया कि कैसे जेएनयू  के दिनों ने उन्हें भारतीय राजनीति को गहराई से समझने में मदद की.  अभिजीत ने  बातचीत के दौरान सहकर्मी और पत्नी Esther के साथ रिलेशनशिप और उनके भारतीय व्यंजनों के साथ बंगाली नोबेल कनेक्शन के बारे में भी जानकारी दी.

अपने भारतीय  होने के बारे में  अभिजीत बनर्जी ने कहा, मैं बहुत हद तक भारतीय हूं. मैं जब अपना देश कहता हूं, तो उसका मतलब हमेशा भारत से होता है. ऐसे में मेरे लिए कोई और विकल्प नहीं है. मैं खुद को भारतीयों की नजर से देखता हूं.

जेएनयू और तिहाड़ कांड के बारे में अभिजीत ने अपने अनुभव सुनाये.  उन दिनों ने मुझे यह बताया कि राजनीति की क्या अहमियत है. जेएनयू मेरे लिए बहुत मायने रखता है. मैं कोलकाता से वहां गया था, जहां लेफ्ट वाली राजनीति थी. मुझे उसके अलावा बाकी राजनीति के बारे में कुछ नहीं पता था. इसलिए लोहियावादी मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि मुझे गांधीवाद, संघ के बारे में जानने को मिला.

हमें मिनिमम इनकम पर विचार करना चाहिए

न्यूनतम आय के संबंध में कहा- हमें मिनिमम इनकम पर विचार करना चाहिए, क्योंकि ढेर सारे लोग हैं, जो बड़े स्तर पर जोखिमों का सामना कर रहे हैं. उनके (किसान) जीवन में कभी ढेर सारी बारिश चीजें बर्बाद कर देती है, जबकि कभी कम बरसात से वे परेशान रहते हैं. कभी-कभार कुछ बैंक भी संकट की स्थिति पैदा कर देते हैं और इमारतों का निर्माण भी रुक जाता है. यही वजह है कि ढेर सारे लोग नौकरियां भी गंवा देते हैं. इन सभी जोखिमों की खाई को किसी तरह पाटना होगा.

अभिजीत बनर्जी से पूछा गया कि बंगाली और नोबेल के बीच क्या फर्क है, रवींद्रनाथ टैगोर, अमृत्य सेन और अब आप को नोबेल मिला?  अभिजीत ने जवाब दिया, मैं इस बारे में अधिक नहीं जानता, पर मुझे मेरे संबंध साफगोई से रखने दें. मैं आधा बंगाली और आधा मराठी हूं.

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#Oscar विजेता एक्टर रॉबर्ट ने ट्रम्प को बताया गैंगस्टर राष्ट्रपति, कहा- वे खुद को बचाने के लिए संस्थाओं को खत्म कर रहे https://newswing.com/oscar-winning-actor-robert-told-trump-gangster-president-said-he-is-finishing-institutions-to-protect/137936/ Sat, 12 Oct 2019 11:08:36 +0000 https://newswing.com/?p=137936 Washington: अमेरिका के ऑस्कर विजेता अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर जम कर निशाना साधा. उन्होंने तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गैंगस्टर तक कह डाला.उन्होंने कहा कि ट्रम्प खुद के फायदे के लिए संस्थानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और वह गैंगस्टर राष्ट्रपति हैं. नीरो अपनी नयी फिल्म द आइरिश मैन के प्रीमियर के …

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Washington: अमेरिका के ऑस्कर विजेता अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर जम कर निशाना साधा. उन्होंने तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गैंगस्टर तक कह डाला.उन्होंने कहा कि ट्रम्प खुद के फायदे के लिए संस्थानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और वह गैंगस्टर राष्ट्रपति हैं.

नीरो अपनी नयी फिल्म द आइरिश मैन के प्रीमियर के मौके पर बीएफआइ लंदन फिल्म फेस्टिवल पहुंचे थे. वहां उन्होंने कहा कि आज देश में सब कुछ नीचे जा रहा है और इसके लिए ट्रम्प जिम्मेदार हैं.

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प्रेस की आजादी को बचाये जाने की जरूरत

ऑस्कर पुरस्कार विजेता नीरो ने कहा कि चौथे स्तंभ अर्थात प्रेस की आजादी को बचाये जाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रेस की आजादी को नष्ट कर रहे हैं. इसके पीछे उनका एकमात्र मकसद खुद को बचाये रखना है. हम सभी इस बात से भली भांति परिचित हैं.

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नेटफ्लिक्स पर 27 नवंबर को रिलीज होगी फिल्म ‘द आयरिशमैन’

76 वर्षीय अभिनेता ने ब्रिटेन दौरे पर द गार्जियन अखबार को दिये इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका के पास डर्टी प्लेयर (ट्रम्प) है. हम उन्हें जेल में देखने के लिए और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकते. नीरो की द आयरिशमैन 27 नवंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होनेवाली है. यह ब्रिटेन के चुनिंदा सिनेमाघरों में 8 नवंबर को रिलीज होगी.

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ICC वर्ल्ड कप : विजेता टीम को मिलेंगे 40 लाख डॉलर की इनामी राशि और एक ट्रॉफी https://newswing.com/icc-world-cup-winning-team-will-get-40-million-prize-money-trophy/108822/ Fri, 17 May 2019 10:23:11 +0000 https://newswing.com/?p=108822 London : आइपीएल खत्म होते ही वर्ल्ड कप 2019 की चर्चा और तेज हो गयी है. टीम इंडिया के खिलाड़ी भी आइपीएल की थकान को भूल कर वर्ल्ड कप के लिए बेताब होंगे. 30 मई से क्रिकेट महाकुंभ की शुरुआत होगी. आगामी आईसीसी विश्व कप की विजेता टीम को 40 लाख डॉलर मिलेंगे जो टूर्नामेंट …

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London : आइपीएल खत्म होते ही वर्ल्ड कप 2019 की चर्चा और तेज हो गयी है. टीम इंडिया के खिलाड़ी भी आइपीएल की थकान को भूल कर वर्ल्ड कप के लिए बेताब होंगे. 30 मई से क्रिकेट महाकुंभ की शुरुआत होगी.

आगामी आईसीसी विश्व कप की विजेता टीम को 40 लाख डॉलर मिलेंगे जो टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे बड़ी इनामी राशि है. दस टीमों के टूर्नामेंट के विजेता को एक ट्राफी भी दी जायेगी.

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11 जगहों पर खेला जायेगा टूर्नामेंट 

आईसीसी के बयान के अनुसार टूर्नामेंट की कुल इनामी राशि एक करोड़ डॉलर होगी.  उपविजेता को 20 लाख डॉलर दिये जायेंगे. वहीं सेमीफाइनल हारने वाली दोनों टीम को आठ लाख डॉलर मिलेंगे.

तीस मई से शुरू हो रहा टूर्नामेंट 11 जगहों पर खेला जायेगा. हर लीग मैच के लिये भी इनामी राशि है.

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आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2019 ईनामी राशि

  • विजेता : 40 लाख डालर.
  • उपविजेता : 20 लाख डालर.
  • सेमीफाइनल हारने वाली टीम : आठ आठ लाख डालर.
  • हर लीग मैच के विजेता को : 40000 डालर.
  • लीग चरण से आगे जाने वाली टीम को : एक लाख डालर.

भारत की दावेदारी मजबूत मानी जा रही

उल्लेखनीय है कि 2015 से अब तक भारत का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है. इस दौरान भारत एक दर्जन से ज्यादा सीरीज में अजय रहा है. फिर चाहे वो घरेलू सीरीज हो या फिर विदेशी दौरा. प्रदर्शन शानदार होने की वजह से टीम इंडिया की दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है.

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लोकमंथन कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालयों में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन https://newswing.com/state-level-competition-organized-in-universities-under-the-lokmanthan-program/64975/ Tue, 25 Sep 2018 16:18:06 +0000 https://newswing.com/?p=64975 Ranchi : लोकमंथन कार्यक्रम के तहत पिछले एक सप्ताह से राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच प्रतियोगिता का आयोजन चल रहा है. इस राज्यस्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन प्रज्ञा प्रवाह एवं झारखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है. प्रतियोगिता के माध्यम से राज्य के कुल सात विश्वविद्यालयों में वाद-विवाद, निबंध, चित्रकला …

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Ranchi : लोकमंथन कार्यक्रम के तहत पिछले एक सप्ताह से राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच प्रतियोगिता का आयोजन चल रहा है. इस राज्यस्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन प्रज्ञा प्रवाह एवं झारखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है. प्रतियोगिता के माध्यम से राज्य के कुल सात विश्वविद्यालयों में वाद-विवाद, निबंध, चित्रकला एवं पोस्टर मेकिंग प्रतिायोगिता का आयोजन किया जा रहा था. मंगलवार को चारों प्रतियोगिता में विजयी विद्यार्थियों को रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में पुरस्कार प्रदान किया गया, साथ ही साथ उन्हें पुरस्कार के रूप में नकद राशि भी प्रदान की गयी.

लोकमंथन कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालयों में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन

ज्ञात हो कि प्रज्ञा प्रवाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की संस्था है, जो युवाओं के बीच भारत की संस्कृति एवं सभ्यता के प्रचार-प्रसार पर कार्य कर रही है. राज्य में कॉलेज स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर की प्रतियोगिता के माध्यम से प्रज्ञा प्रवाह युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने की पहल कर रही है. इसी के तहत इस प्रतियोगिता का आयोजन बविगत कई दिनों से विश्वविद्यालयों में किया जा रहा है. कॉलेज स्तर पर विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार के रूप में नकद राशि प्रदान किया जा रहा है. कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता प्रज्ञा वाह के राष्ट्रीय संयोजक जे नंदकुमार (केरल) ने कहा कि लोकमंथन का उद्देश्य भारत बोध समर्पित है. इसके माध्यम से युवाओं में भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता के बारे में अवगत कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में युवा वर्ग भारत के जन, गण और मन के साथ संतुलन बनाने पर जोर दे रहा है.

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लोकमंथन कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालयों में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन

भारत की पहचान यहां की ग्रामीण संस्कृति है : अमर बाउरी

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के कला, संस्कृति एवं खेलकूद मंत्री अमर बाउरी ने कहा कि पहले हमारी पहचान भारतीय है, उसके बाद ही हमारी अन्य पहचान है. भारत की पहचान यहां की ग्रामीण संस्कृति है. कार्यक्रम के दौरान रांची विश्वविद्यालय के सोशल साइंस डीन आईके चौधरी ने विषयवस्तु एवं पुरस्कार वितरण समारोह की अध्यक्षता की. पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान एनएसएस, आरयू के ब्रजेश कुमार, आरयू के को-ऑर्डिनेटर अशोक चौधरी, उपकुलसचिव डॉ प्रीतम कुमार, डॉ आशा लता, डॉ उदय कुमार, डॉ सीमा प्रसाद, डॉ  किरण तिवारी, डॉ सुरभि साहू, डॉ स्मिता, डॉ पुष्पा, डॉ विनोद रंजन आदि उपस्थित रहे. विभिन्न प्रतियोगिताओं की निर्णायक मंडली में डॉ सुशील अंकन, डॉ अभिजीत दत्त, डॉ कुमुद कला मेहता, डॉ धनंजय द्विवेदी, प्रवीण कर्मकार, महेंद्र कुमार अनंता, दिनेश सिंह, विनोद रंजन आदि शामिल रहे.

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राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों के नाम

निबंध प्रतियोगिता

  • प्रथम- कौशल शर्मा, DSPMU,रांची
  • द्वितीय- ककाली दत्ता, BBMKU, Dhanbad
  • तृतीय- सोनल कुमारी मिश्रा, DSPMU,रांची

वाद-विवाद प्रतियोगिता

  • प्रथम- अंजलि मिश्रा, RU, रांची
  • द्वितीय- कल्याणी कुमारी, SKMU, दुमका
  • तृतीय- अमन कुमार, VBU, हजारीबाग

चित्रांकन प्रतियोगिता

  • प्रथम- देवाशीष सिंह सरदार, DSPMU, रांची
  • द्वितीय- नम्रता श्रीवास्तव, CUJ, रांची
  • तृतीय- उषा कुमारी, VBU, हजारीबाग

पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता

  • प्रथम- छवि प्रिया, RU, रांची
  • द्वितीय- शिवा चौधरी, CUJ, रांची
  • तृतीय- रूही तबस्सुम, RU, रांची

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