देशों की बातचीत ठहर गयी थी. इसके बाद यह स्वराज और कुरैशी के बीच दोनों देशों की इस तरह की पहली उच्चस्तरीय बैठक होती. मुलाकात के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए

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