खरीद – NEWSWING https://newswing.com कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें Wed, 15 Jul 2020 10:32:49 +0000 en-GB hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.5.1 https://newswing.com/wp-content/uploads/2020/07/favicon.jpg खरीद – NEWSWING https://newswing.com 32 32 भाजपा का दावा झूठा निकला, PM Cares Fund से नहीं खरीदा गया एक भी वेंटिलेटर, RTI से हुआ खुलासा https://newswing.com/bjps-claim-turned-out-to-be-false-not-a-single-ventilator-purchased-from-pm-cares-fund-revealed-by-rti/190529/ https://newswing.com/bjps-claim-turned-out-to-be-false-not-a-single-ventilator-purchased-from-pm-cares-fund-revealed-by-rti/190529/#comments Wed, 15 Jul 2020 10:32:49 +0000 https://newswing.com/?p=190529 Amit Jha Ranchi :  पीएम केयर्स फंड एक बार फिर चर्चा में है. इस फंड से एक भी वेंटीलेटर अब तक नहीं ख़रीदा गया है. आरटीआइ (Right to Information) से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक इस फंड से 999.941 करोड़ रुपये व्यय किये जा चुके हैं. पर इससे एक रुपये का भी यूज वेंटीलेटर …

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Amit Jha

Ranchi :  पीएम केयर्स फंड एक बार फिर चर्चा में है. इस फंड से एक भी वेंटीलेटर अब तक नहीं ख़रीदा गया है. आरटीआइ (Right to Information) से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक इस फंड से 999.941 करोड़ रुपये व्यय किये जा चुके हैं. पर इससे एक रुपये का भी यूज वेंटीलेटर ख़रीदे जाने में नहीं हुआ है. पिछले दिनों कई भाजपा नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर एक वेंटीलेटर की तस्वीर जारी कर दावा किया गया था कि यह पीएम केयर्स फंड से ख़रीदा गया है. इनमें पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा जैसे नाम भी शामिल थे. उन्होंने 15 जून को एक ट्वीट कर किसी अस्पताल के एक वेंटीलेटर की तस्वीर जारी की थी. दावा किया जा रहा था कि पीएम केयर्स फंड का लाभ मरीजों को मिल रहा है. एनडीएमए (National Disaster Management Authority) से मिली सूचना से उनके दावा झूठा निकला.

बैंक स्टेटमेंट देने से मना किया

आरटीआइ एक्टिविस्ट साकेत गोखले ने एनडीएमए के पास एक आरटीआइ फाइल किया था. इसमें पीएम केयर्स फंड से संबंधित जानकारियां मांगी गयी थीं. 14 जुलाई को एनडीएमए ने श्री गोखले को बताया कि पीएम केयर्स फंड के पैसे प्रवासी मजदूरों की देखभाल संबंधी कार्यों पर खर्च किये गये हैं. दो किस्तों में 999.941 करोड़ रुपये देश के अलग-अलग राज्यों को इसके लिए जारी किये गये हैं. एनडीएमए ने बताया कि पीएम केयर्स फंड से वेंटिलेटर की खरीद पर एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया है. न ही इसकी खरीद के लिए किसी भी कंपनी को पैसे दिये गये हैं. आरटीआइ के जरिये एनडीएमए के बैंक एकाउंट नंबर 39373085710 (एसबीआइ, ब्रांच-सफदरजंग एन्क्लेव, नयी दिल्ली) से संबंधित एक जानकारी भी मांगी गयी थी. इसमें इस खाते में 27 मार्च, 2020 से 24 अप्रैल, 2020 की अवधि के बीच का बैंक स्टेटमेंट मांगा गया था. एनडीएमए ने इसकी सूचना देने से मना कर दिया.

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पीएम केयर्स फंड में है गड़बड़ी

साकेत गोखले ने मिली सूचना के आधार पर कहा है कि पीएम केयर्स फंड से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने में चाल चली जा रही है. उन्होंने ट्वीट करके कहा है कि पूरी जानकारी नहीं देना यह बताता है कि इस फंड के जरिये अकल्पनीय गड़बड़ी की जा रही है. इसमें चालाकी दिखायी जा रही है. विपक्षी दलों को आगे बढ़ कर पीएम केयर्स फंड के मसले पर सरकार से सवाल करना चाहिए. इसकी पूरी वास्तविकता सामने लायी जानी चाहिए.

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Covid-19 संकट से निपटने को बना है PM Cares Fund

कोरोना संकट से निपटने में मदद के लिए केंद्र की पहल पर इसका गठन किया गया था. देश दुनिया से इस खाते में पैसे दिये गये हैं. एनडीएमए, नयी दिल्ली के जरिये इसका संचालन किया जाता है. उसके अनुसार फंड के पैसे प्रवासियों की देखभाल संबंधी कार्यों पर खर्च किये गये हैं. इसके अलावा और किसी तरह के मद में इस फंड के पैसे का उपयोग नहीं किया गया है. इस फंड से अब तक 999.941 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं.

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आरोपः सांसद निशिकांत की पत्नी ने 20 करोड़ की जमीन महज 3 करोड़ नगद देकर खरीदी, सांसद ने कहा- पत्नी से बात करें https://newswing.com/accusation-mp-nishikants-wife-bought-land-worth-20-crores-by-giving-only-3-crores-cash-mp-said-talk-to-wife/188514/ https://newswing.com/accusation-mp-nishikants-wife-bought-land-worth-20-crores-by-giving-only-3-crores-cash-mp-said-talk-to-wife/188514/#comments Mon, 06 Jul 2020 13:02:05 +0000 https://newswing.com/?p=188514 Akshay Kumar Jha Ranchi: गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी अनामिका गौतम पर गंभीर आरोप लगे हैं. आरोप है कि देवघर में एलओकेसी धाम की रजिस्ट्री 29 अगस्त 2019 को की गयी. जिसकी रजिस्ट्री संख्या 770 है. आरोप लगाया जा रहा है कि सांसद निशिकांत दुबे ने अपने राजनीतिक प्रभाव का जोर दिखा कर करीब …

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी अनामिका गौतम पर गंभीर आरोप लगे हैं. आरोप है कि देवघर में एलओकेसी धाम की रजिस्ट्री 29 अगस्त 2019 को की गयी. जिसकी रजिस्ट्री संख्या 770 है. आरोप लगाया जा रहा है कि सांसद निशिकांत दुबे ने अपने राजनीतिक प्रभाव का जोर दिखा कर करीब 20 करोड़ की कीमतवाली प्रॉपर्टी सिर्फ तीन करोड़ में अपनी पत्नी के नाम खरीदी है. ऐसा करने से सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का घाटा हुआ है.

शिकायतकर्ता ने इस बात की शिकायत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से की है. साथ ही मुख्य सचिव और देवघर उपायुक्त को भी शिकायत की कॉपी सौंपी गयी है. देवघर के बम्पास टाउन निवासी विष्णुकांत झा ने यह गंभीर आरोप लगाया है.

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तीन करोड़ नगद भुगतान कर खरीदी प्रॉपर्टी

शिकायतकर्ता ने शिकायत के आवेदन के साथ रकम प्रप्ति की रसीद भी मुहैया करायी है. रसीद में इस बात का उल्लेख है कि प्रॉपर्टी खरीदने के लिए उनकी पत्नी की तरफ से तीन करोड़ नगद रुपये दिये गये. जो कि नियम के विरुद्ध है. नोटबंदी के बाद से दो लाख से ज्यादा नगद देकर किसी भी चीज को खरीदने पर मनाही है. लेकिन सांसद की पत्नी अनामिका गौतम ने एक वेंडर को सात लाख और बाकी आठ वेंडरों को 2.93 करोड़ रुपये नकद देकर जमीन खरीदी है. जिसे शिकायतकर्ता की तरफ से गलत बताया गया है और उच्च स्तरीय जांच की कमेटी बना कर जांच करने को कहा गया है.

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क्या कहा सांसद निशिकांत ने

इस मामले पर न्यूज विंग संवाददाता ने फोन कर सांसद निशिकांत दुबे से बात की. सांसद निशिकांत ने कहा – आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि यह प्रॉपर्टी मेरे नाम पर नहीं है. इसलिए इस मामले पर आप अनामिका गौतम से बात करें. इस मामले पर मैं क्यों जवाब दूंगा. मेरी पत्नी की एक अलग आइडेंटिटी है. इसलिए आप उन्हीं से बात करें. सांसद निशिकांत दुबे से संवाददाता ने उनकी पत्नी का नंबर मांगा तो उन्होंने कहा कि मेरे पास मेरी पत्नी का नंबर नहीं है. जिसने आपको सारी जानकारी दी है, उसी से नंबर भी मांग लें. मुझे किसी मामले की कोई जानकारी नहीं है. अगर किसी ने जांच के लिए आवेदन दिया है, तो उसकी जांच होगी. इसलिए जांच होने दीजिए. इसमें जिसको जो लिखना है लिखता रहे. आप सभी कुछ लिखने के लिए स्वतंत्र हैं. मेरे तरफ से कोई Explanation नहीं है. वो कोई बेनामी संपत्ति नहीं है. मैंने अगर अमित अग्रवाल के ऊपर कोई आरोप लगाया है तो मैंने बेनामी संपत्ति की बात कही है. जिस संपत्ति की चर्चा हो रही है, वो अनामिका गौतम के नाम पर है. वो कोई बेनामी संपत्ति नहीं है. जब बेनामी संपत्ति नहीं है, तो इस बारे में रजिस्ट्रार बतायेगा. रजिस्ट्री सरकार की तरफ से हुई है. इसका मतलब झारखंड में सभी रजिस्ट्री गलत होती होगी. इसलिए आप रजिस्ट्रार से पूछिए. और सबसे बड़ी बात कि यह मामला कोर्ट में है. और जब मामला कोर्ट में होता है तो किसी तरह की कोई शिकायत मामले को लेकर नहीं हो सकती है. कोर्ट में यह मामला आठ महीने से है.

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पहल : साइकिल खरीदने के लिए 4079 रजिस्टर्ड श्रमिकों को मिली राशि, डेढ़ करोड़ रुपये हुए खर्च https://newswing.com/positive-initiative-4079-registered-laborers-got-amount-to-buy-bicycles-rs-1-5-crore-spent/185701/ https://newswing.com/positive-initiative-4079-registered-laborers-got-amount-to-buy-bicycles-rs-1-5-crore-spent/185701/#comments Tue, 23 Jun 2020 09:39:24 +0000 https://newswing.com/?p=185701 Ranchi :  झारखंड भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में निबंधित कमगारों की संख्या झारखंड में 9.5 लाख के करीब है. बोर्ड के द्वारा निबंधित कामगारों को साइकिल खरीद के लिए सहायता मिलती है. साइकिल सहायता योजना के तहत वर्ष 2019-20 के वितीय वर्ष में 4079 कमगारों को बोर्ड की ओर से साइकिल खरीद …

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Ranchi :  झारखंड भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में निबंधित कमगारों की संख्या झारखंड में 9.5 लाख के करीब है. बोर्ड के द्वारा निबंधित कामगारों को साइकिल खरीद के लिए सहायता मिलती है. साइकिल सहायता योजना के तहत वर्ष 2019-20 के वितीय वर्ष में 4079 कमगारों को बोर्ड की ओर से साइकिल खरीद के लिए सहायता दी गयी. जिसमें कुल 1 करोड़ 42 लाख 76 हजार 500 रुपये खर्च किये गये.

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विभिन्न योजनाओं का लाभ श्रमिकों तक पहुंचाने के लिए भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड निबंधन करता है. लेकिन मैनपावर की कमी झेल रहे विभाग और श्रमिकों में जागरूकता के अभाव से योजना का लाभ लेने से श्रमिक चुक जा रहे हैं.

क्या है योजना की पात्रता

साइकिल सहायता योजना के स्वीकृत पदाधिकारी उप श्रमायुक्त होते हैं. वैसे निबंधित श्रमिक जो 1 वर्ष से बोर्ड के सदस्य रहे हों एवं उन्होंने अगले 1 वर्ष का अपना अंशदान बोर्ड में जमा किया हो. साथ ही अन्य किसी योजना से साइकिल प्राप्त नहीं किया हो,  वैसे कामगार को योजना का लाभ मिलता है.

इसके तहत साइकिल खरीद के लिए 3500 तक की सहायता बोर्ड के द्वारा दी जाती है. यह राशि उनके बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर होती है. इस व्यवस्था के तहत 3 माह के भीतर साइकिल खरीद कर रसीद संबंधित श्रम कार्यालय में जमा किया जाना अनिवार्य है.

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किस जिले के कितने श्रमिक हुए लाभान्वित

जिला लाभान्वित श्रमिक कुल खर्च राशि
रांची 256 896000
खूंटी 031 290500
लोहरदगा 082 287000
सिमडेगा 000 000
पलामू 099 346500
गढ़वा 000 000
लातेहार 129 451500
पूर्वी सिंहभूम 316 1106000
प.सिंहभूम 000 000
सरायकेला 000 000
दुमका 476 1666000
देवघर 599 2096500
जामाताड़ा 000 000
गोडडा 328 1448000
साहेबंगज 019 66500
पाकुड़ 265 927500
हजारीबाग 409 1431500
गिरिडीह 000 000
कोडरमा 000 000
रामगढ़ 000 000
बोकारो 118 413000
धनबाद 844 2954000

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MD का पद खाली रहने से डेढ़ लाख आदिवासी परिवारों के रोजगार पर संकट, वनोपज की खरीद बिक्री का काम ठप https://newswing.com/crisis-on-employment-of-one-and-a-half-million-tribal-families-due-to-vacant-post-of-md-work-of-sale-and-purchase-of-forest-produce-stalled/176907/ https://newswing.com/crisis-on-employment-of-one-and-a-half-million-tribal-families-due-to-vacant-post-of-md-work-of-sale-and-purchase-of-forest-produce-stalled/176907/#respond Wed, 13 May 2020 13:49:37 +0000 https://newswing.com/?p=176907 Amit jha Ranchi : झामकोफेड में पिछले 11 महीने से एमडी का पद खाली रहने से कार्य योजना को अंतिम रूप देना संभव नहीं हो पा रहा है. राज्य के डेढ़ लाख से अधिक परिवार लघु वनोपज की बिक्री और प्रसंस्करण कार्यों से जुड़कर आजीविका के कामों में लगे हैं. एमडी के नहीं होने से …

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Amit jha

Ranchi : झामकोफेड में पिछले 11 महीने से एमडी का पद खाली रहने से कार्य योजना को अंतिम रूप देना संभव नहीं हो पा रहा है. राज्य के डेढ़ लाख से अधिक परिवार लघु वनोपज की बिक्री और प्रसंस्करण कार्यों से जुड़कर आजीविका के कामों में लगे हैं. एमडी के नहीं होने से झामकोफेड के हाथ पैर बंधे हैं और इसका खामियाजा इन परिवारों को भी उठाना पड़ रहा है.

जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने 12 मई को लघु वनोपज और इसके जरिये आदिवासी कल्याण योजनाओं के स्थिति की समीक्षा की थी. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और कल्याण मंत्री चम्पई सोरेन ने झारखंड का पक्ष रखा था. इस दौरान झामकोफेड द्वारा 29.30 करोड़ रुपये की कार्य योजना तैयार किये जाने की जानकारी केंद्र को दी गयी थी. फ़िलहाल राज्य में एमडी की आस में झामकोफेड दिन गिन रहा है.

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रघुवर सरकार में नहीं मिल सका था एक एमडी

झारखंड में लघु वनोपज के वैल्यू एडिशन, खरीद बिक्री के मामले में झामकोफेड (झारखंड स्टेट माइनर फारेस्ट प्रोड्यूस को ओपरेटिव सोसाइटी डेवलपमेंट एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड) का अहम रोल है. झामकोफेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) जयदेव प्रसाद सिंह को पिछले साल राज्य सरकार ने वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कार्य नहीं करने के कारण सस्पेंड कर दिया था. उनके जाने के बाद से (जुलाई 2019 से) एमडी का पद खाली ही पड़ा हुआ है. एमडी के नहीं होने से कर्मियों के वेतन भुगतान की भी समस्या खड़ी हो गयी थी जो अब भी बनी हुई है. जे पी सिंह को हटाये जाने के बाद से रघुवर सरकार एक एमडी नहीं तलाश पायी.

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सरकार के पास लंबित है मामला

जानकारी के अनुसार एमडी के रिक्त पड़े पद का मामला राज्य सरकार के संज्ञान में है. 22 अप्रैल को सीएस की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी. इस दौरान झामकोफेड, झासकोलैंप, वन विकास निगम और जेएसएलपीएस (ग्रामीण विकास विभाग) की टीम भी बैठी थी. लघु वनोपज के संग्रहण, बिक्री और वितरण कार्यों और कार्य योजना के संबंध में चर्चा हुई थी.

इस दौरान झामकोफेड ने 29.30 करोड़ रुपये की कार्ययोजना रखी थी जबकि झासकोलैम्प्स की तरफ से 55 करोड़ की योजना रखी गयी. इस दौरान झामकोफेड द्वारा एमडी के नहीं होने इससे योजनाओं के कार्यान्वयन पर असर पड़ने की भी बात सामने आयी थी. बैठक के बाद नए एमडी की नियुक्ति प्रक्रिया संबंधी चर्चा आगे भी बढ़ी पर अब तक कल्याण विभाग के पास औपचारिक सूचना नहीं आ सकी है.

झामकोफेड से डेढ़ लाख परिवारों का नाता

वन क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के रोजी रोजगार का एक बड़ा जरिया वनोत्पाद का संग्रहण और उसकी बिक्री है. इमली. चिरौंजी, महुआ और महुआ डोरी (फूल), किरैता, मधु, करंज, मेडिकल प्लांट्स सहित 50 माईनर फारेस्ट प्रोड्यूस के जरिये जनजातीय परिवार दो पैसे कमा लेते हैं. जंगलों से चुने गए वनोत्पाद को स्थानीय लैम्प्स, पैक्स, समिति या एसएचजी के माध्यम से वे अपने सामानों की बिक्री करते हैं.

10 जिलों में प्रसंस्करण यूनिट के जरिये जुड़कर भी कई परिवारों को आर्थिक राहत मिलती है. जिस दिन कोई परिवार/व्यक्ति बिक्री करता है, उसी दिन उनके खाते में झामकोफेड डीबीटी के जरिये उन्हें भुगतान कर देता है. झामकोफेड के साथ सहयोग करने को 220 से अधिक लैम्प्स, पैक्स और एसएचजी समूह जुड़ा हुआ है. प्रत्यक्ष रूप से झामकोफेड के साथ लगभग 45 हजार परिवार जुड़े हुए हैं जबकि अप्रत्यक्ष तौर पर 1 लाख परिवार.

जिलों में प्रसंस्करण यूनिट के जरिये जुड़कर भी कई परिवारों को आर्थिक राहत मिलती है. वनोत्पाद की बिक्री के अलावा इसके प्रसंस्करण कार्यों से जुड़कर आदिवासी परिवार अर्थोपार्जन करते हैं.

ट्रांसपोर्टिंग की भी समस्या

गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने लॉकडाउन में कृषि कार्यों और वनोपज खरीद बिक्री कार्यों के संबंध में ढील भी दी है. पर वास्तविक रूप से इसका लाभ ग्रामीण परिवारों, लैम्प्स, सहकारी समितियों से जुड़े लोगों को नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में जंगलों से चुने गए वनोत्पाद को नजदीकी बिक्री केन्द्रों तक ला पाना या परिवारों तक पहुँच पाना भी संकट का विषय हो गया है.

फ़रवरी से जून तक के मौसम को वनोपज की खरीद बिक्री के लिहाज से पीक सीजन कहा जाता है. इन सबके बीच एमडी की नियुक्ति, लॉकडाउन और इसके कारण परिवहन सुविधाओं के अभाव ने ट्राइबल परिवारों के लिए सैकड़ों सवाल खड़े कर दिए हैं.

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चीन के केंद्रीय बैंक ने HDFC में एक प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया https://newswing.com/chinas-central-bank-acquires-more-than-one-percent-stake-in-hdfc/170060/ https://newswing.com/chinas-central-bank-acquires-more-than-one-percent-stake-in-hdfc/170060/#respond Sun, 12 Apr 2020 15:10:21 +0000 https://newswing.com/?p=170060 Mumbai : चीन के केंद्रीय बैंक ने आवास ऋण देनेवाले एचडीएफसी लि. में मार्च तिमाही में एक प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ायी है. शेयर बाजार के पास उपलब्ध आंकड़े के अनुसार मार्च महीने के अंत में पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना की एचडीएफसी के 1,74,92,909 इक्विटी शेयर थे जो 1.01 प्रतिशत शेयर पूंजी के बराबर है. इसे भी …

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Mumbai : चीन के केंद्रीय बैंक ने आवास ऋण देनेवाले एचडीएफसी लि. में मार्च तिमाही में एक प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ायी है. शेयर बाजार के पास उपलब्ध आंकड़े के अनुसार मार्च महीने के अंत में पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना की एचडीएफसी के 1,74,92,909 इक्विटी शेयर थे जो 1.01 प्रतिशत शेयर पूंजी के बराबर है.

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चीनी बैंक भारत में निवेश के अवसर तलाश रहे

कोरोना वायरस संक्रमण के फैलने के बीच पिछले दो महीनों में शेयरों में गिरावट आयी है. इससे निवेशकों को कम दाम पर शेयर खरीदने का अवसर मिला है. रिपोर्ट के अनुसार चीनी बैंक भारत में निवेश के नये अवसर तलाश रहे हैं. हालांकि यह नहीं पता चला है कि शेयर किस भाव पर खरीदे गये.

एचडीएफसी शेयर में जनवरी-मार्च के दौरान 33 प्रतिशत नीचे आया. 1 जनवरी को यह 2,433.75 पर था जो 31 मार्च को 1,630.45 रुपये पर था.

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#Bokaro विधायक बिरंची नारायण विधायक निधि से देंगे 10 हजार मास्क और 100 थर्मल स्कैनर के लिए राशि https://newswing.com/bokaro-mla-biranchi-narayan-has-given-funds-from-mla-fund-for-10-thousand-masks-and-100-thermal-scanners/165690/ https://newswing.com/bokaro-mla-biranchi-narayan-has-given-funds-from-mla-fund-for-10-thousand-masks-and-100-thermal-scanners/165690/#respond Mon, 23 Mar 2020 17:08:40 +0000 https://newswing.com/?p=165690 Ranchi: बोकारो विधायक बिरंची नारायण ने कोरोना से बचाव के लिए दस हजार थ्री लेयर मास्क और 100 थर्मल स्कैनर मशीन क्रय करने की अनुशंसा विधायक निधि की राशि से की है. 100 थर्मल स्कैनर मशीनें बोकारो विधासभा अंतर्गत सभी पंचायत, सरकारी कार्यालय व प्रमुख स्थलों में पदस्थापित स्वास्थ्य कर्मियों को उपलब्ध कराने का आग्रह …

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Ranchi: बोकारो विधायक बिरंची नारायण ने कोरोना से बचाव के लिए दस हजार थ्री लेयर मास्क और 100 थर्मल स्कैनर मशीन क्रय करने की अनुशंसा विधायक निधि की राशि से की है.

100 थर्मल स्कैनर मशीनें बोकारो विधासभा अंतर्गत सभी पंचायत, सरकारी कार्यालय व प्रमुख स्थलों में पदस्थापित स्वास्थ्य कर्मियों को उपलब्ध कराने का आग्रह बोकारो डीसी से किया है.

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दूसरे राज्यों से लौट रहे छात्र व नौजवान

विधायक ने कहा कि काफी संख्या में बोकारो के छात्र अध्ययन करने दूसरे राज्यों में गये हैं वे घर वापस आ रहे हैं. साथ विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे नौजवान कोरोना की वजह से अपने घर वापस आ रहे हैं.

कोरोना वायरस के बचाव के लिए थर्मल स्कैनर मशीन क्रय करना अतिआवश्यक है. साथ ही जांच टीम जिस परिवार को जांच करने जा रही, उस परिवार के सावधानी के लिए थ्री लेयर मास्क उपलब्ध करना आवश्यक है.

बिरंची नारायण ने कहा कि कोरोना के कहर की रोकथाम के लिए सावधानी ही सुरक्षा है. हम सभी को सरकार द्वारा जारी निर्दशों का पालन करना चाहिए.

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पांच करोड़ की सामग्री खरीद में घोटाले का आरोप, तत्कालीन नगर आयुक्त समेत तीन पर चल रहा मुकदमा https://newswing.com/the-allegations-of-scam-in-the-purchase-of-five-million-items/123339/ Fri, 02 Aug 2019 13:18:28 +0000 https://newswing.com/?p=123339 Dhanbad : धनबाद नगर निगम अंतर्गत ई-गवर्नेंस कार्य के लिए कम्प्यूटर सामग्री एवं अन्य उपकरणों की खरीदारी की गयी थी. उपकरणों की आपूर्ति में बरती गयी अनियमितता की जांच करने के संबंध में पार्षद निर्मल मुखर्जी ने तत्कालीन सीईओ आईएएस अधिकारी मनोज कुमार सहित सात अधिकारियों पर आरोप दर्ज करवाया है. पार्षद निर्मल मुखर्जी द्वारा …

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Dhanbad : धनबाद नगर निगम अंतर्गत ई-गवर्नेंस कार्य के लिए कम्प्यूटर सामग्री एवं अन्य उपकरणों की खरीदारी की गयी थी. उपकरणों की आपूर्ति में बरती गयी अनियमितता की जांच करने के संबंध में पार्षद निर्मल मुखर्जी ने तत्कालीन सीईओ आईएएस अधिकारी मनोज कुमार सहित सात अधिकारियों पर आरोप दर्ज करवाया है. पार्षद निर्मल मुखर्जी द्वारा विभागीय पत्रांक 1817 दिनांक 5 दिसंबर 2018 को  प्राप्त मंतव्य के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आपराधिक अभियोग चलाने का आग्रह किया गया था.

बता दें कि 4 करोड़ 90 लाख 84 हजार 843 रुपये के घोटाला मामले में 19 जनवरी 2017 को भुगतान किया गया था. इस मामले में नगर निगम के अधिकारी मनीष कुमार,  हरीश चंद्र पाण्डेय, कनीय पर्वेक्षक  अनिल कुमार मंडल, लेखापाल अनिल कुमार यादव, उप नगर आयुक्त, प्रदीप कुमार, अपर नगर आयुक्त और मनोज कुमार नगर आयुक्त पर मामला दर्ज करवाया गया था.

प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने संज्ञान लिया था

प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी शिखा अग्रवाल की अदालत ने पूरे मामले में संज्ञान लिया था. अब इस मामले की सुनवाई चल रही है जिसमें मनोज कुमार  जिला एवं सत्र न्यायाधीश से पेश भी हुए . साथ ही  मनोज कुमार ने न्यायालय से अग्रिम जमानत देने की अपील की है.

पार्षद निर्मल मुखर्जी ने कहा है कि आईएसएस अधिकारी मनोज कुमार सहित सात अधिकारियों की मिलीभगत से ई-गवर्नेंस हेतु   लगभग 5 करोड़ की कम्प्यूटर सहित अन्य सामग्री बिना किसी टेंडर के एक बार में खरीद ली गयी,  जिसमें भारी घोटाला हुआ है, जिसे लेकर हमने मामला दर्ज करवाया था. मामले में कोर्ट ने संज्ञान लिया और फिलहाल 3 अधिकारियों पर मामला चल रहा है जिसमें दोषी अधिकारी पेश भी हो रहे हैं.

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भाजपा सांसद समीर उरांव के भाई के सीएनटी जमीन खरीदने पर कांग्रेस ने बोला जोरदार हमला, कहा- भ्रष्टाचार में लिप्त है रघुवर सरकार https://newswing.com/congress-attacked-the-brother-of-bjp-mp-sameer-oraon-to-buy-cnt-land-said-raghuvar-sarkar-is-involved-in-corruption/117603/ Tue, 02 Jul 2019 13:27:09 +0000 https://newswing.com/?p=117603 Ranchi : बीजेपी सांसद समीर उरांव के भाई अनिल उरांव के द्वारा सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर जमीन खरीदने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. मंगलवार को कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री नियेल तिर्की ने प्रेस वार्ता कर कहा है कि वर्तमान बीजेपी सरकार में आदिवासी-मूलवासी की जमीन अंधाधुंध तरीके से लूटी जा …

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Ranchi : बीजेपी सांसद समीर उरांव के भाई अनिल उरांव के द्वारा सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर जमीन खरीदने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. मंगलवार को कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री नियेल तिर्की ने प्रेस वार्ता कर कहा है कि वर्तमान बीजेपी सरकार में आदिवासी-मूलवासी की जमीन अंधाधुंध तरीके से लूटी जा रही है. जेएमएम कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन पर एक्ट का उल्लंघन करने का आरोप मुख्यमंत्री रघुवर दास लगाते हैं, लेकिन इसके उलट बीजेपी सांसद के भाई ने सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर अरगोड़ा थाना अंतर्गत जमीन ले ली, जो एक्ट की धारा 46 का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि जो रघुवर सरकार भ्रष्टाचार को मिटाने का दावा करती है, वही आज खुद भ्रष्टाचार में लिप्त है.

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न्यूज विंग ने सबसे पहले चलायी थी खबर

मालूम हो कि बीजेपी सांसद समीर उरांव के भाई द्वारा सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर जमीन खरीदने की खबर न्यूज विंग ने सबसे पहले चलायी थी. “भाजपा सांसद समीर उरांव के भाई अनिल ने सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर खरीदी 77 लाख की जमीन, रैयतों को मिले मात्र पांच लाख” शीर्षक से चली खबर में कहा गया था कि बीजेपी भाजपा सांसद समीर उरांव के भाई अनिल उरांव ने जिस जमीन को खरीदा है, उसका पैसा रैयतों को नहीं दिया गया. रैयतों के द्वारा पैसा मांगे जाने पर डराने-धमकाने की बात भी सामने आयी.

पूर्व डीजीपी की पत्नी की जमीन का मामला भी जांच तक रहा सीमित

नियेल तिर्की ने कहा कि आदिवासियों के हितैषी होने का दावा करनेवाली बीजेपी सरकार में आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी हो रही है. जहां इनकी जमीन को लूटा जा रहा है, वहीं खतियान नहीं रहने पर जाति प्रमाण पत्र नहीं बनाने, भूमि बैंक के नाम पर आदिवासी-मूलवासियों को बेदखल करने, चर्च की जमीन की जांच की मांग कराने की पहल बीजेपी द्वारा की गयी है. पूर्व डीजीपी डीके पांडेय की पत्नी के नाम पर गैरमजरुआ जमीन खरीदी गयी. जब मीडिया में यह खबर आयी, तो सरकार ने जांच की बात कह कर मामले को दबाने की कोशिश की.

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योगगुरु स्वामी रामदेव सहित तमाम संस्थाओं की जमीन की जांच की मांग

सिमडेगा के गरजा ग्राम के गुरगुट टोली का जिक्र करते हुए नियेल तिर्की ने कहा कि यहां पर 15 एकड़ 38 डिसमिल जमीन, जो वहां के आदिवासी-मूलवासी किसानों को भू-दान एवं बंदोबस्ती के आधार पर दी गयी थी, वहां दमनात्मक रुख अतियार कर पांच महिलाओं को जेल भेज दिया गया. बीजेपी सांसद समीर उरांव, विधायक शिव शंकर उरांव, गंगोत्री कुजूर व रामकुमार पाहन द्वारा यह कहा जाना कि ईसाई आदिवासियों को जाति प्रमाण पत्र नहीं दिया जायेगा, सही नहीं है. अगर ऐसा है, तो कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि जिन सरना समुदाय से जुड़े लोगों ने अन्य धर्म को स्वीकार किया है, उनके ऊपर भी जांच कर उनका भी जाति प्रमाण पत्र नहीं बनने दिया जाना चाहिए. नियेल तिर्की ने मांग की कि चर्च की जमीन की जांच की मांग करनेवाली तमाम संस्थाओं और योग गुरु स्वामी रामदेव को राज्य सरकार द्वारा दी जमीन की भी जांच की जाये.

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सरयू राय ने सचिव को पत्र लिख कहा- धान बेचनेवाले 3434 किसानों को उनके खून पसीने की कमाई का भुगतान करें https://newswing.com/saryu-rai-wrote-a-letter-to-the-secretary-3434-farmers-who-sell-paddy-to-pay-their-money-for-their-sweat/116209/ Mon, 24 Jun 2019 14:43:03 +0000 https://newswing.com/?p=116209 Ranchi: खाद्य सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के मंत्री सरयू राय ने एक बार फिर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने सरकार को धान बेचनेवाले 3434 किसानों को अब तक भुगतान नहीं किये जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय सचिव को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार …

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Ranchi: खाद्य सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के मंत्री सरयू राय ने एक बार फिर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने सरकार को धान बेचनेवाले 3434 किसानों को अब तक भुगतान नहीं किये जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय सचिव को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा आज समारोह आयोजित कर किया जा रहा है. दूसरी ओर जिन किसानों से उचित मूल्य एवं बोनस के आधार पर धान की खरीद विगत 31 मार्च 2019 के पहले की गयी है उन्हें धान की कीमत और बोनस की राशि का भुगतान नहीं किया गया है. उन्होंने कहा है कि सरकारी खजाने से किसानों को सहायता राशि का भुगतान कर देने में जितनी तत्परता दिख रही है, उतनी ही तत्परता वैसे किसानों को उनकी हकदारी का भुगतान करने में होनी चाहिए जिन्होंने पसीना बहा कर और निजी निवेश कर धान उपजाया है.

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श्री राय ने कहा है कि अब खरीफ की बुआई का समय आ गया है. किसान धान का बिचड़ा डाल रहे हैं. उन्हें खेती के लिए पूंजी की जरूरत है. उनकी अपनी पूंजी उनके किसी कसूर के सरकार के पास फंसी हुई है. 30.05.2019  को हुई विभाग की मासिक बैठक में सख्त हिदायत दी गयी थी कि जिन जिलों में भुगतान नहीं हुआ है, वहां के पदाधिकारी किसानों को धान खरीद के बकाया का भुगतान 10 जून 2019 तक कर दें, अन्यथा उनके विरुद्ध कारवाई होगी. उस दिन की बैठक में दिये गये जिलावार आंकड़ों के अनुसार 7,185 किसानों का लगभग 83 करोड़ रुपये का भुगतान उस दिन तक लंबित था. दिनांक 17.06.2019 की मासिक बैठक में बताया गया था कि 3,434 किसानों के लगभग 45 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है.

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सात दिनों में भुगतान सुनिश्चित करना जरूरी

नियमानुसार जो किसान किसी पैक्स में अपना धान बेचेगा उसका भुगतान सात दिनों में हो जाना चाहिए. प्रक्रिया है कि पैक्स द्वारा किसानों से खरीदा गया धान अविलम्ब पैक्स से उठा कर संबंधित चावल मिल में भेज दिया जाये. धान जैसे ही चावल मिल में प्राप्त कर लिया जायेगा वैसे ही धान की कीमत किसान के खातों में भेज दी जायेगी.

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32247 किसानों ने 2.27 लाख टन से अधिक धान बेची थी

राज्य भर में कुल 34,247 किसानों से इस वर्ष 2,27,858 लाख टन धान की खरीद हुई है जिसमें से 31,409 किसानों को लगभग 396 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. अब भी 2,838 किसानों का लगभग 36 करोड़ का भुगतान लंबित है. कई जिलों में किसानों से खरीदा गया धान अब भी पैक्स में पड़ा है. इसे मिल में नहीं भेजा गया है.

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किसान दर-दर की ठोकरें खा रहे

अनेक मामलों में ऐसा नहीं हो पाया है और किसान भुगतान के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. इसके लिए जिम्मेदारी सुनिश्चित कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू करें. जिन किसानों का धान संबंधित पैक्स ने खरीद लिया है और धान की खरीदगी की रसीद किसान को दे दिया है उस किसान को पैक्स द्वारा दी गई रसीद के आधार पर भुगतान कर दिया जाये. सरकार के गोदाम में अथवा चावल मिल में धान नहीं पहुंचा है तो इसके लिए किसान जिम्मेवार नहीं हैं बल्कि खरीददार दोषी हैं. इसलिए किसान को खरीदे गये धान की कीमत का और इस पर दिये जा रहे बोनस अनुदान का भुगतान त्वरित गति से किया जाये.

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सदर अस्पताल रांची : टेंडर में बरती गयी अनियमितता, खरीद लिये गये बिना गुणवत्ता वाले सामान https://newswing.com/sadar-hospital-ranchi-irregularities-in-tender-poor-quality-goods-purchased/113509/ Sun, 09 Jun 2019 11:28:15 +0000 https://newswing.com/?p=113509 Ranchi : सदर अस्पताल रांची में एनेस्थेसिया वर्कस्टेशन के लिए जिस स्पेशिफिकेशन के सामानों की मांग की गयी थी, उसकी खरीद नहीं करते हुए न्यूनतम दर के हिसाब से बिना गुणवत्ता वाले सामानों की खरीदारी कर ली गयी है. टेंडर के जरिए क्रय टेंडर में निर्धारित स्पेशिफिकेशन तय कर दिया गया था. एनेस्थेसिया वर्कस्टेशन के …

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Ranchi : सदर अस्पताल रांची में एनेस्थेसिया वर्कस्टेशन के लिए जिस स्पेशिफिकेशन के सामानों की मांग की गयी थी, उसकी खरीद नहीं करते हुए न्यूनतम दर के हिसाब से बिना गुणवत्ता वाले सामानों की खरीदारी कर ली गयी है. टेंडर के जरिए क्रय टेंडर में निर्धारित स्पेशिफिकेशन तय कर दिया गया था. एनेस्थेसिया वर्कस्टेशन के लिए USFDA & CE certification vkSj    USFDA &  European CE certification which confirm to EN 60601-2-13  की मांग की गयी थी.

पर जो वर्कस्टेशन में सप्लाई किया गया वो मानक के अनुसार नहीं है. अब प्रश्न यह उठता है कि यदि मानक के अनुसार सप्लाई नहीं किया गया तो विभाग और एनेस्थेसिया के प्रमुख के द्वारा बिना गुणवत्ता वाले सामानों को स्वीकार कैसे किया गया. इसके अलावा सप्लाई करने वालों को भुगतान किस आधार पर किया गया. शशिरंजन कुमार के आरटीआई के जवाब में इस मामले का खुलासा हुआ है. शशिरंजन कुमार ने क्रय समिति और एनेस्थेसिया विभाग के प्रमुख पर भी नियम के विरुद्ध जाकर क्रय करने का आरोप लगाया है.

शशिरंजन कुमार ने बताया कि इस अनियमितता को लेकर वे बहुत ही गंभीर हैं. इस मामले को स्वास्थ्य और निगरानी विभाग के पास इस मुद्दे को रखने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब यह देखना होगा कि इस सिस्टम का भ्रष्टाचार ऐसे ही चलता रहेगा या सरकार इस पर लगाम लगाने में कामयाब हो पायेगी.

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टेंडर प्रक्रिया पूरी किये बिना हो गयी खरीदारी

सदर हॉस्पिटल,रांची के ऑनलाइन टेंडर 2017 HLTH_25489_2 E टेंडर – 1793,डेटेड 15.06.17  में बहुत ही बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतते हुए खरीदारी की गयी है. यह दावा आरटीआई एक्टिविस्ट  शशिरंजन कुमार ने किया है.  शशिरंजन कुमार ने बताया कि उक्त ऑनलाइन टेंडर 2017 का है. अभी भी स्टेटस प्राइस बिड ओपनिंग ही दिख रहा है. अभी प्राइस बिड नहीं खोला गया है .  वेबसाइट में यह स्पष्ट  है कि स्टैण्डर्ड प्रोटोकल में पहले Technical Bid Opening उसके बाद  Technical Evaluation तब Financial Bid Opening के बाद  Financial Evaluation किया जाता है. जिसके बाद देखा जाता है कि  न्यूनतम दर किसके द्वारा दिया गया है और उसके आधार पर आर्डर कॉपी जारी किया जाता है.

बावजूद 2017_HLTH_25489_2 में क्रय समिति द्वारा बिना फाइनेंसियल बिड ओपनिंग और इवैल्यूएशन के ही क्रय आदेश सह सप्लाई स्वीकार कर भुगतान किया गया. जो नियम संगत नहीं है और यह ऑनलाइन टेंडर के प्रोटोकॉल का भी उललंघन है. शशिरंजन के अनुसार https://jharkhandtenders.gov.in की देखभाल रास्ट्रीय एजेंसी नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा की जाती है. उसका भी कहना है कि टेंडर अभी प्राइस बिड ओपनिंग स्टेटस में है और AOC के बाद ही क्रय आदेश दिया जायेगा.

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