केरल – NEWSWING https://newswing.com कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें Tue, 04 Aug 2020 10:53:26 +0000 en-GB hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.5.1 https://newswing.com/wp-content/uploads/2020/07/favicon.jpg केरल – NEWSWING https://newswing.com 32 32 पलामू: पांडू के तीन मजदूरों की केरल में मौत, क्वारेंटाइन सेंटर के बाहर रेलवे पटरी पर मिली लाश  https://newswing.com/palamu-three-laborers-died-in-kerala-body-found-on-railway-track-outside-quarantine-center/194580/ https://newswing.com/palamu-three-laborers-died-in-kerala-body-found-on-railway-track-outside-quarantine-center/194580/#comments Tue, 04 Aug 2020 10:53:26 +0000 https://newswing.com/?p=194580 Palamu: जिले के पांडू प्रखंड क्षेत्र के तीन मजदूरों की संदेहास्पद स्थित में केरल में मौत हो गयी. तीनों की लाश रेलवे पटरी से बरामद की गयी है. जिस जगह पर उन्हें क्वारेंटाइन कर रखा गया था, उसके पास रेलवे पटरी है. केरल पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया में मामला ट्रेन से कटकर मौत होने …

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Palamu: जिले के पांडू प्रखंड क्षेत्र के तीन मजदूरों की संदेहास्पद स्थित में केरल में मौत हो गयी. तीनों की लाश रेलवे पटरी से बरामद की गयी है. जिस जगह पर उन्हें क्वारेंटाइन कर रखा गया था, उसके पास रेलवे पटरी है. केरल पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया में मामला ट्रेन से कटकर मौत होने का प्रतीत होता है. हालांकि केरल पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है. परिजनों ने मामले को हत्या बताया है.

बता दें कि लॉकडाउन में तीनों मजदूर पांडू अपने गांव लौटे थे. इसके बाद अनलॉक होने पर वे फिर केरल लौट गये थे. मजदूरों की पहचान पांडू के भटवलिया गांव के कन्हाई विश्वकर्मा (20), महुगांवा के अरविंद राम (22) और हरिओम (20) के रूप में हुई है.

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ट्रेन की चपेट में आने से मौत की आशंका

केरल में जिस जगह मजदूरों को क्वारेंटाइन कर रखा गया था, वहां के कर्मियों ने फोन पर बताया कि 10 दिन पूर्व 25 मजदूर यहां क्वारेंटाइन किए गए थे. सोमवार को इनमें से 8 मजदूर चिकन खरीदने के लिए सेंटर से बाहर निकले थे. बाद में उनमें से तीन के शवों को पास की रेल पटरी से बरामद किया गया. आशंका व्यक्त की जा रही है कि रेल पटरी की ओर से लौटने के दौरान उनकी किसी ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गयी. मंगलवार को सभी के शव का पोस्टमार्टम किया गया.

परिजन बता रहे हत्या

इधर, परिजनों का कहना है कि 20 दिन पूर्व मजदूरों को पांडू से बस द्वारा काम के लिए केरल ले जाया गया था. कंपनी की ओर से सभी को क्वारेंटाइन किया गया था. 3 अगस्त को सभी की अवधि खत्म हो गयी थी. बुधवार को सभी को काम पर लौटना था. क्वारेंटाइन पीरियड पूरा करने के बाद सोमवार को सेंटर से बाहर टहलने के लिए निकले थे. इन्हें स्थानीय लोगों ने टोका. और स्थानीय लोगों से उनका विवाद हुआ. बाद में तेज धारदार हथियार से उनकी हत्या कर दी गयी. घटना के बाद मजदूरों के परिजनों में कोहराम मच गया है. परिजन दहाड़ मारकर रो रहे हैं. गांव में मातम पसरा हुआ है.

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परिजनों ने बताया कि अनलॉक के दौरान जब वाहन का परिचालन नहीं हो रहा था, तब पांडू के गुआसरई गांव का ठेकेदार अर्जुन यादव ने गाड़ी की व्यवस्था कर लोगों को केरल भेजा था, क्योंकि जहां वे लोग काम करते थे उस कंपनी में काम शुरू हो गया था और बार-बार वहां से मजदूरों का बुलावा आ रहा था.

परिजन बताते हैं कि पलामू में अपने गांव लौटने पर उन्हें कोई काम नहीं मिल पा रहा था. इस कारण भी वे केरल लौट गये. मालूम हो कि लॉकडाउन के दौरान पलामू में 50 हजार से ज्यादा प्रवासी मजदूर वापस अपने घर लौटे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में लोग फिर महानगरों की ओर काम के लिए वापस लौटने लगे हैं. इन तीनों मजदूरों का शव अभी पलामू नहीं लाया जा सका है.

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वन्यजीवों की हत्या के खिलाफ BJD सांसद की याचिका पर SC का बिहार, हिमाचल प्रदेश को नोटिस https://newswing.com/sc-notice-to-bihar-himachal-pradesh-on-petition-of-bjd-mp-against-slaughter-of-wildlife/193663/ https://newswing.com/sc-notice-to-bihar-himachal-pradesh-on-petition-of-bjd-mp-against-slaughter-of-wildlife/193663/#comments Thu, 30 Jul 2020 11:11:17 +0000 https://newswing.com/?p=193663 New Delhi: देश के विभिन्न हिस्सों में खड़ी फसल को जंगली जानवरों के नुकसान पहुंचाने से बचाने के लिये उनका वध करने की अनुमति देने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार और हिमाचल प्रदेश सरीखे राज्यों को नोटिस जारी किये. न्यायालय ने …

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New Delhi: देश के विभिन्न हिस्सों में खड़ी फसल को जंगली जानवरों के नुकसान पहुंचाने से बचाने के लिये उनका वध करने की अनुमति देने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार और हिमाचल प्रदेश सरीखे राज्यों को नोटिस जारी किये. न्यायालय ने कहा कि हमें ‘मनुष्य और जानवरों’ के बीच टकराव पर नियंत्रण पाने के तरीके खोजने होंगे.

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‘समस्या का समाधान चाहिये’

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा की दलीलें सुनीं. लूथरा का कहना था कि फसलों को बर्बाद होने से बचाने के लिये नीलगाय जैसे जंगली पशुओं को बड़ी संख्या में मारने की अनुमति दी गयी है.

पीठ ने इस पर टिप्पणी की, ‘‘हमें समाधान चाहिए. यह कहना समाधान नहीं है कि उन्हें मत मारो. इसके समाधान के बारे में सोचें. हम इस मामले को केरल के हाथी वाले मामले के साथ संलग्न कर रहे हैं. केरल में पटाखों से भरा अनन्नास खाने की वजह से एक हथिनी की मृत्यु हो गयी थी.’’
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‘मनुष्य और जानवरों’ के बीच टकराव पर नियंत्रण जरूरी

पीठ देश में जंगली पशुओं की हत्या की रोकथाम के उपायों के लिये बीजद के सांसद अनुभव मोहंती की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. पीठ ने टिप्पणी की कि जानवरों का वध नहीं करने और फसलों को बर्बाद होने की इजाजत देना तो समाधान नहीं है.

पीठ ने कहा कि जानवरों और मनुष्य के बीच इस टकराव पर नियंत्रण पाने के तरीके खोजने होंगे जिससे न तो जानवरों की हत्या हो और न ही फसलों को नुकसान पहुंचे. लूथरा ने कहा कि जंगली जानवरों के इलाकों तक मानव आबादी का विस्तार इस समस्या की एक वजह है. पीठ ने कहा कि ऐसे जानवरों का वध करने की बजाय उन्हें भगाने के लिये रबर की बुलेट का इस्तेमाल किया जा सकता है. पीठ ने वकील से कहा कि वह इस मसले से निबटने के उपाय सुझायें.

बता दें कि बीजू जनता दल के लोकसभा सदस्य मोहंती ने अपनी याचिका में जंगली जानवरों को मारने और इसके लिये पुरस्कार देने की परंपरा पर अंकुश लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है. याचिका में कहा गया है कि बिहार, हिमाचल प्रदेश और केरल जैसे राज्य नीलगाय जैसे जानवरों को मारने के लिये पुरस्कार दे रहे हैं.

इससे पहले, केन्द्र ने दिसंबर, 2015 में बिहार में नीलगाय और जंगली भालू तथा हिमाचल प्रदेश में बंदरों को मारने को मंजूरी देते हुए उन्हें वन्यजीव संरक्षण कानून, 1972 के तहत हिंसक पशु घोषित कर दिया था.

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केरल, कर्नाटक में ‘काफी संख्या’ में ISIS आतंकवादी मौजूद: संरा रिपोर्ट https://newswing.com/isis-terrorists-present-kerala-karnataka-large-numbers-report/192603/ https://newswing.com/isis-terrorists-present-kerala-karnataka-large-numbers-report/192603/#comments Sat, 25 Jul 2020 08:31:49 +0000 https://newswing.com/?p=192603 United Nations: आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में आगाह किया गया है. केरल और कर्नाटक में ISIS आतंकवादियों की “काफी संख्या” हो सकती है. इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा आतंकवादी संगठन, क्षेत्र में हमले की साजिश रच रहा है. माना जाता है कि इस संगठन में भारत, …

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United Nations: आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में आगाह किया गया है. केरल और कर्नाटक में ISIS आतंकवादियों की “काफी संख्या” हो सकती है. इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा आतंकवादी संगठन, क्षेत्र में हमले की साजिश रच रहा है. माना जाता है कि इस संगठन में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यामां के 150 से 200 आतंकवादी हैं.

ओसामा महमूद है एक्यूआइएस का मौजूदा सरगना

ISIS , अल-कायदा और संबद्ध व्यक्तियों और संस्थाओं से संबंधित विश्लेषणात्मक सहायता और प्रतिबंध निगरानी दल की 26वीं रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआइएस) तालिबान के तहत अफगानिस्तान के निमरूज, हेलमंद और कंधार प्रांतों से काम करता है.

इसमें कहा गया कि खबरों के मुताबिक संगठन में बांग्लादेश, भारत, म्यामां और पाकिस्तान से 150 से 200 के बीच सदस्य हैं. एक्यूआइएस का मौजूदा सरगना ओसामा महमूद है. जिसने मारे गए आसिम उमर की जगह ली है. खबरें हैं कि एक्यूआइएस अपने पूर्व आका की मौत का बदला लेने के लिए क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की साजिश रच रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक एक सदस्य राष्ट्र ने खबर दी है कि 10 मई, 2019 को घोषित, आइएसआइएल के भारतीय सहयोगी (हिंद विलायाह) में 180 से 200 के बीच सदस्य हैं. इसमें कहा गया कि केरल और कर्नाटक राज्यों में आइएसआइएल सदस्यों की अच्छी-खासी संख्या है.

इस्लामिक स्टेट ने नया सूबा स्थापित करने का किया था दावा

पिछले साल मई में, इस्लामिक स्टेट (ISIS, आइएसआइएल और दाएश के तौर पर भी जाना जाता है) आतंकवादी संगठन ने भारत में नया “सूबा” स्थापित करने का दावा किया था. यह कश्मीर में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ के बाद अनोखी तरह की घोषणा थी.

खूंखार आतंकवादी संगठन ने अपनी अमाक समाचार एजेंसी के माध्यम से कहा था कि नयी शाखा का अरबी नाम “विलायाह ऑफ हिंद” (भारत प्रांत) है. जम्मू-कश्मीर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इस दावे को खारिज किया था. इससे पहले, कश्मीर में ISIS के हमलों को इसके तथाकथित खुरासान प्रांतीय शाखा से जोड़ा जाता रहा है. जिसका गठन 2015 में हुआ था. जिसका लक्ष्य “अफगानिस्तान, पाकिस्तान और पास के क्षेत्र” थे.

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कोऑपरेटिव फेडरलिज्म का दावा :  राज्यों के साथ केंद्र के सौतेले रवैये को क्यों भूल जाते हैं पीएम https://newswing.com/claim-of-cooperative-federalism-why-do-the-prime-minister-forget-the-centres-attitude-with-the-states/184353/ https://newswing.com/claim-of-cooperative-federalism-why-do-the-prime-minister-forget-the-centres-attitude-with-the-states/184353/#respond Wed, 17 Jun 2020 08:18:47 +0000 https://newswing.com/?p=184353 Faisal Anurag कोऑपरेटिव फेडरलिज्म का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर मुख्यमंत्रियों से हुई बातचीत में किया है. प्रधानमंत्री का दावा है कि भारत में कोऑपरेटिव फेडरलिज्म का विस्तार हुआ है. और सहयोग की राजनीति ने इसे नया आयाम दिया है. प्रधानमंत्री का यह भी दावा है कि उनके नेतृत्व में केंद्र और …

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Faisal Anurag

कोऑपरेटिव फेडरलिज्म का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर मुख्यमंत्रियों से हुई बातचीत में किया है. प्रधानमंत्री का दावा है कि भारत में कोऑपरेटिव फेडरलिज्म का विस्तार हुआ है. और सहयोग की राजनीति ने इसे नया आयाम दिया है. प्रधानमंत्री का यह भी दावा है कि उनके नेतृत्व में केंद्र और राज्यों के बीच का समन्वय बेहतर है. उसके नतीजे भी आ रहे हैं. प्रधानमंत्री की इन बातों को ले कर एक बार फिर यह सवाल उठता है कि क्या सचमुच भारत में केंद्र और राज्यों के बीच सहकार की भावना प्रबल है.

और केंद्र लोकतांत्रिक मूल्यों को पूरी तत्परता से अमल में लाता है. यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसी बैठक में कई मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री से राज्यों को विशेष प्रोत्साहन पैकेज देने की मांग की. जिस पर विस्तार से कोई चर्चा बैठक में नहीं हुई.

इसके साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह ने तो कोविड 19 और अर्थव्यवस्था गतिरोध से निपटने के लिए एक हाई पावर कमेटी बनाने की भी मांग की. जिसमें मुख्यमंत्रियों को भी शामिल किया जाए. लेकिन इस सवाल को भी नजरअंदाज कर दिया गया.

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वास्तव में यदि कोऑपरेटिव की भावना है तो इन सवालों को नजरअंदाज करने के बजाय इन पर संजीदगी से गौर करने की जरूरत होती. इसका कारण यह है कि कोविड 19 के बाद केंद्र ने जिस तरह के फैसले लिये हैं और अपने दिशानिर्देशों में लगातार बदलाव किया है, उसे ले कर कई राज्यों ने  खुलेआम असंतोष प्रकट किया है. कई गैर भाजपाई मुख्यमंत्रियों की शिकायत भी सार्वजनिक हो चुकी है कि उन्हें बोलने को मौका नहीं दिया जाता है.  मंगलवार की बैठक में भी झारखंड को मौका नहीं मिला. झारखंड उन प्रदेशों में है जिन्हें अब तक प्रधानमंत्री की  वीडियो मीटिंग में अपनी बात कहने का अवसर कम ही मिला है. यह अपने आप में कई तथ्यों को उजागर करता है.

नरेंद्र मोदी जब से प्रधानमंत्री बने हैं खास कर दूसरी जीत के बाद उन्होंने कई बार कोऑपरेटिव फेडरल्जिम की बात की है. लेकिन पिछले छह सालों में देखा गया है कि किस तरह राज्यों के अधिकारों के साथ खेल हुआ है. खास कर आर्थिक मामलों में. बहुत दिन नहीं हुए जब दस राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर राज्यों की  केंद्रीय राशि के बकाए के तुरंत भुगतान की बात कही थी. कई ऐसे राज्य हैं जिनके खजाने बेहद तकलीफ से गुजर रहे हैं. और सरकारों के हाथपांव फुले हुए है. प्रधानमंत्री ने ही बिहार के लिए 1 लाख 25 हजार करोड़ का पैकेज  देने की घोषणा की थी.

और उसे भुला दिया था. बिहार से अब भी इसे देने की मांग उठती रहती है. केंद्रीय योजनाओं में राज्यों की भागीदारी जितनी सीमित हुई है वह भी एक तथ्य है. योजना आयोग के जमाने में राज्यों की ज्यादा बाते सुनी जाती थी. जो नीति आयोग बनने के बाद से नहीं के बराबर है. इसके साथ ही राज्यों से पूछे बगैर ही कई योजनाओं को अमल में लाने के लिए उन पर दबाव डाला गया है.

कोरोना से ही उलझने में केरल जैसे राज्य का जिक्र प्रधानमंत्री ने कभी नहीं किया. जिसने बेहतर तरीके से कामयाबी हासिल की. औऱ जिसकी दुनिया भर में चर्चा हुई. राजस्थान ने भी बिना केंद्रीय मदद के कई नए प्रयोग किए. लेकिन इसे भी प्रधानमंत्री ने चर्चा के लायक नहीं समझा है.

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सहकार का मतलब होता है दूसरे के अस्तित्व को अपने बराबर समझना. यह भारतीय संविधान की भी मूल भावना है. वैसे तो संविधान में गणत्रांतिक संघतात्मता को महत्व दिया गया है. बिना उसके उल्लेख के भी संविधान प्रारूप समिति तथा सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय संविधान को संघात्मक संविधान माना है. भारतीय संविधान की  प्रस्तावना के अनुसार भारत एक सम्प्रुभतासम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य है. इसमें ही फेडरलिज्म के तत्व आतमसात किए गए हैं. प्रस्तावना को संविधान की आत्मा कहा जाता है. भारत में संघीय शासन व्यवस्था लागू है. किन्तु संविधान में कहीं भी फेडरेशन (संघात्मक) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है. संघीय विशेषताओं पर जोर देने के बाद भी इसे एकात्मक बनाए जाने के खतरों के प्रति पिछले छह सालों से देश में बातें की जाती रही हैं.

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प्रधानमंत्री ने इस बैठक में अर्थव्यवस्था खोलने पर जोर दिया है. उनके अनुसार अर्थव्यवस्था में सुधार दिखने लगा है. लेकिन वास्तव स्थिति तो कुछ और ही संकेत देते हैं. बाजार खुलने के बाद भी उसमें दुकानदार परेशान हैं.  दिल्ली के पॉश मार्केट खान मार्केट में तो दुकानदार किराया नहीं चुका पा रहे हैं. और वे अपनी दुकानों को उठाने लगे हैं. इसी तरह उत्पादन इकाइयों को भी संकट का सामना करना पड़ रहा है. क्योंकि उनके लिए बाजार नहीं है. मिंट की एक खबर के अनुसार 30 प्रतिशत लोगों के जीवन भर की बचत इस महीने के अंत तक खत्म हो जाएगी. इससे संकट और गहराएगा.

अर्थव्यवस्था में गति के लिए जरूरी है कि लोगों तक नगद पहुंचाया जाए. जैसा कि अमेरिका सहित यूरोप के कई देशों ने किया है. इन देशों ने बेरोजगारों और मध्यवर्ग तक सीधे धन पहुंचाया है. भारत में 20 लाख करोड़ की बात की गयी. लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है वह कर्ज आधारित है. न कि लोगों की क्रयशक्ति बढाने की क्षमता वाला. कई विशेषज्ञ कह चुके हें कि गरीब और बेरोजगारों तक तुरत 7500 रुपया महीना पहुंचाने की जरूरत है. लेकिन केंद्र सरकार ने इसे महत्व नहीं दिया है.

प्रधानमंत्री का दूसरा जोर कोरोना से लड़ने को ले कर है. जिसमें उनका दावा है कि भारत ने सबसे बेहतर तरीके से इस महामारी ने निपटा है. उन्होंने कम लोगों की मृत्यु को बड़ी सफलता बताया है. लेकिन जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री के इस दावे के तथ्यों की जांच भी जरूरी है. भारत में अब तक 12000 हजार से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो चुकी है. यह आंकड़ा ही भारत को उन 150 देशों, जो कोरोना वायरस से प्रभावित हैं- में आठवें स्थान पर पहुंचा रहा है.

इसी तरह तेजी से बढ़ती मृत्यु दर के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष तीन देशों में है.

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केरल सरकार ने हाथी की मौत मामले की जांच के दिये आदेश, केन्द्र ने मांगी रिपोर्ट https://newswing.com/kerala-government-orders-inquiry-into-elephant-death-case-center-asks-for-report/181476/ https://newswing.com/kerala-government-orders-inquiry-into-elephant-death-case-center-asks-for-report/181476/#respond Thu, 04 Jun 2020 04:25:21 +0000 https://newswing.com/?p=181476 Thiruvananthapuram/Kochi: केरल के पलक्कड़ जिले में एक गर्भवती हथनी की निर्मम हत्या को लेकर देशभर में आलोचना हो रही है. वहीं केरल सरकार ने इसकी जांच के आदेश दे दिये हैं. वहीं केंद्र सरकार ने भी मामले पर सख्ती दिखाते हुए कहा है कि दोषियों को नहीं बख्शा जायेगा. केरल सरकार ने बुधवार को कहा …

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Thiruvananthapuram/Kochi: केरल के पलक्कड़ जिले में एक गर्भवती हथनी की निर्मम हत्या को लेकर देशभर में आलोचना हो रही है. वहीं केरल सरकार ने इसकी जांच के आदेश दे दिये हैं. वहीं केंद्र सरकार ने भी मामले पर सख्ती दिखाते हुए कहा है कि दोषियों को नहीं बख्शा जायेगा.

केरल सरकार ने बुधवार को कहा कि पलक्कड जिले में पिछले माह एक गर्भवती हथनी की निर्मम हत्या मामले की जांच वन्यजीव अपराध जांच दल करेगा. वहीं केन्द्र सरकार ने इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य से रिपोर्ट मांगी है.
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केरल सरकार ने दिये जांच के आदेश

बता दें कि एक गर्भवती हथनी ने साइलेंट वैली जंगल में पटाखों से भरा एक अनानास खा लिया था जो उसके मुंह में फट गया और करीब एक सप्ताह के बाद उसकी मौत हो गई. घटना के बाद लोगों में रोष फैल गया और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि पलक्कड जिले के मन्नारकड़ वन मंडल में हथनी की मौत मामले में प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है.

और पुलिस को घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं. उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि वन्यजीव अपराध जांच दल को जांच के लिए घटनास्थल रवाना किया गया है.

केंद्र ने मांगी रिपोर्ट

इस बीच केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने घटना पर गंभीर रुख अपनाते हुए कहा कि केन्द्र ने इस पर पूरी रिपोर्ट मांगी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा,‘हमने घटना पर पूरी रिपोर्ट मांगी है. दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.’


हथनी की वेल्लियार नदी में 27 मई को मौत हो गई थी. इससे पहले वन्यकर्मियों से उसे नदी से बाहर लाने की बहुत कोशिश की थी मगर उन्हें इसमें कामयाबी नहीं मिली. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि वह गर्भवती थी. उसके जबड़े टूटे हुए थे.
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मामले को लेकर लोगों में रोष

एक गर्भवती हथनी की इस तरह हुई निर्मम हत्या को लेकर देश के खास से आम हर वर्ग में रोष देखा जा रहा है. सोशल साइट पर लोग बेजुबान जानवर को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं.

उद्योगपति रतन टाटा ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए गर्भवती हथनी की हत्या को ‘‘सोचीसमझी हत्या’’ करार दिया और पशु के लिए न्याय की मांग की. उन्होंने ट्वीट किया,‘मैं यह जान कर सदमे में हूं और दुखी हूं कि कुछ लोगों ने निर्दोष,गर्भवती हथनी को पटाखों से भरा अनानास खिला दिया जिससे उसकी मौत हो गई.’

उन्होंने कहा,‘निर्दोष पशुओं के खिलाफ ऐसे आपराधिक कृत्य किसी मनुष्य की सोची समझी हत्या के काम से किसी भी तरह अलग नहीं है.’

घटना के बाद बॉलीवुड कलाकार अक्षय कुमार, अनुष्का शर्मा, श्रद्धा कपूर, रणदीप हुड्डा आदि ने पशुओं के खिलाफ इस प्रकार की क्रूरता के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग की है. वही बीजेपी सांसद मेनका गांधी ने इस मामले पर राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाये हैं.

इसबीच एक शीर्ष वन अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआइ से कहा कि अप्रैल में कोल्लम जिले के पुनालूर मंडल के पथनापुरम वन क्षेत्र में इसी प्रकार की घटना हो चुकी है.

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गुजरात में ‘काल कोठरी” बने अस्पतालों पर हाइकोर्ट की तल्ख टिप्पणी पर लीपापोती शुरू हो गयी है https://newswing.com/in-gujarat-a-conspiracy-has-started-on-the-comments-of-the-high-court-on-the-hospitals-built-in-dungeons/179534/ https://newswing.com/in-gujarat-a-conspiracy-has-started-on-the-comments-of-the-high-court-on-the-hospitals-built-in-dungeons/179534/#respond Tue, 26 May 2020 07:43:18 +0000 https://newswing.com/?p=179534 Faisal Anurag ”जैसा कि हमने पहले कहा कि यह सिविल अस्पताल मरीजों के उपचार के लिए है, लेकिन ऐसा जान पड़ता है कि आज की तारीख में यह काल कोठरी जैसा है. या यूं कहें कि उसे भी बदतर. दुर्भाग्य से गरीब और बेसहारा मरीजों के पास विकल्प नहीं है. गुजरात उच्च न्यायलय की दो …

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Faisal Anurag

जैसा कि हमने पहले कहा कि यह सिविल अस्पताल मरीजों के उपचार के लिए है, लेकिन ऐसा जान पड़ता है कि आज की तारीख में यह काल कोठरी जैसा है. या यूं कहें कि उसे भी बदतर. दुर्भाग्य से गरीब और बेसहारा मरीजों के पास विकल्प नहीं है. गुजरात उच्च न्यायलय की दो सदस्यीय खंडपीठ की यह टिप्पणी है. सख्त लहजे की यह टिप्पणी उस राज्य की है जहां से प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह हैं.

मुख्यमंत्री के तौर पर इन दोनों के ही पसंदीदा विजय रूपाणी मुख्यमंत्री हैं. इस तरह की टिप्पणी यदि गैर भाजपा शासित किसी राज्य के लिए होती तो अभी तक बीजेपी के प्रवक्ताओं, मंत्रियों और आईटी सेल का तीर कमान से निकल चुका होता. वैसे तो पूरे राज्य को ले कर हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर की है, लेकिन अहमदाबाद के अस्पताल पर खास तौर पर कहा गया है.

इसी अहमदाबाद के गांधीनगर सीट से अमित शाह लोकसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं. और नरेंद्र मोदी गांधी नगर में 12 साल बतौर मुख्यमंत्री गुजरात मॉडल का डंका पीटते रहे हैं. अदालत ने यह भी पूछा कि क्या राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को तनिक भी भान है कि अस्पताल में क्या चल रहा है. अदालत ने तो यहां तक कहा है कि अहमदाबाद अस्पताल की हालत काल कोठरी से भी ज्यादा बदतर है.

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कोरोना वायरस और लॉकडाउन पर स्थिति के संदर्भ को जनहित याचिका के रूप में स्वत: संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति आईजे वोरा की खंडपीठ ने टिप्पणी की है. पीठ ने अहमदाबाद के सिविल अस्पताल की दशा पर राज्य सरकार को खूब खरी खोटी सुनाई है.

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में मरीजों की बड़ी संख्या में मौत हुई है. यहां 638 मरीजों में 377 मरीजों की जान चली गयी. यह वहीं गुजरात है जहां एक वेंटिलेटर घोटाले का मामला सामने आ चुका है. जिसे डाक्टर जानलेवा बता रहे हैं. उसके बचाव में पूरी गुजरात सरकार तत्पर है. इस विवाद को ले कर कई तरह के आरोप लग रहे हैं. और अगर सही अर्थों में जांच हुई तो उसमें कई बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं. अहमदाबाद के पत्रकारों के अनुसार राज्य सरकार की लचर स्वास्थ्य सेवा पर की गयी हाईकोर्ट की टिप्पणी बताती है कि राज्य में अस्पतालों के हालात क्या हैं.

गुजरात देश भर में कोरोना संक्रमण के तीन सबसे बड़े केंद्रों में हैं. हाईकोर्ट में तो सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए एक ऐसा तर्क दिया है जिसके बाद लोगों में दहशत भी फैल सकती है. सरकार ने दलील दी है कि यदि वह जांच की प्रक्रिया और गति तेज करेगी तो राज्य की 70 प्रतिशत आबादी पॉजिटीव निकलेगी. यह दलील अपने आप में कोरोना वायस से लड़ने के तरीकों और उस पर सरकारों के रुख को ही दिखता है. प्रति दस लाख पर भारत टेस्ट में क्यों पिछडा हुआ है. इसके कारणों को समझा जा सकता है.

कोरिया और कुछ अन्य देशों ने तो केवल टेस्ट, ट्रेसिंग और ट्रिटमेंट के सूत्र से कोरोना के प्रभाव को थामने की दिशा में कामयाबी हासिल की है. भारत के ही केरल ने इसी सूत्र के आधार पर कोरोना का मुकाबला किया है. शुरूआत में सबसे तेज गति से प्रभावित होने वाला केरल कोरोना के तृफान को थामने में सफल रहा है.

लेकिन देश में केरल मॉडल से भी सीख लेने की जहमत नहीं उठायी गयी है. कोविड 19 के बावजूद राजनीति में जिस तरह गैर भाजपा शासित राज्यों को नीचा दिखाने का प्रयास हुआ है, केरल उसका सबसे बड़ा शिकार है. लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने तो टिप्पणी कर कर बता दिया है, कि रूपाणी सरकार जो कि मोदी के काल से ही गुजरात में सरकारी अस्पतालों की उपेक्षा करते रहे हैं, उसे नाकाम दिखाने की कोशिश करते रहे हैं. इस समय उन्हीं नीतियों के कारण लोगों की जान को खतरे में डाल रहे हैं. गुजरात के कई शहरों में मजूदरों की वापसी के बाद हुई जांच ने गुजरात सरकार की विफलता को ही साबित किया है.

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तत्परता के साथ बंगाल केंद्रीय टीम भेजने वाली मोदी सरकार की गुजरात पर चुप्पी गैर भाजपाई दलों के आरोप को ही प्रमाणित करता प्रतीत होता है. अदालत में गुजरात सरकार ने जांच के बारे में जो कुछ कहा है उससे स्पष्ट हे कि जांच की गति को कम क्यों रखा जा रहा है. दुनिया भर में भारत की जांच गति को ले कर सवाल किए जा रहे हैं. भारत में भी कई डाक्टरों ने जांच गति कम होने को ले कर सवाल किया है. सवाल उठाने पर प्राथमिकी दर्ज कर लोगों को डराया तो सकता है. लेकिन हकीकत पर परदा नहीं डाला जा सकता है.

कोविड से लड़ने का नया तरीका यह निकाला गया है कि हालात की जानकारी देने के लिए होने वाली निमित प्रेसवार्ता को बंद कर दिया गया है. यही नहीं आइसीएमआर को लेकर भी डाक्टरों में बेचेनी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.

क्योंकि उसके निर्देशों को ले कर कई तरह के सवाल डाक्टरों के बीच ही हैं. आइसीएमआर ने अभी तक एक भी शोधपत्र किसी प्रतिष्ठित मेडिकल पत्रिका में प्रकाशित नहीं कराया है. इस पर दुनिया भर के मेडिकल जानकारों में भी सवाल है.

 इस टिप्पणी के बीच ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के एक ताजा बयान पर काफी हंगामा मचा है. इस बयान में उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र से आने वाले श्रमिकों में 75 प्रतिशत कोरोना पॉजिटीव हैं. और दिल्ली से आने वाले 50 प्रतिशत. इसी तरह बाहर से आने वाले 25 प्रतिशत. जबकि राज्य सरकार अब तक कहती रही है कि राज्य में 6000  से कुछ ज्यादा कोरोना पॉजिटीव पाये गये हैं. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने आदित्यनाथ के बयान के बाद कहा है कि मुख्यमंत्री ने किस आधार पर इतनी बड़ा संख्या में पॉजिटीव होने की बात कही है. जबकि इनकी जांच भी नहीं हुई है.

प्रियंका गांधी ने कहा है कि यदि मुख्यमंत्री का बयान तथ्यों पर आधारित है तो राज्य में मरीजों की संख्या दस लाख होनी चाहिए. गुजरात सरकार या आदित्यनाथ ने जो कुछ कहा है उससे तो जाहिर होता है कि मरीजों की संख्या जो बतायी जा रही है, उसे जानबूझ कर कम दिखाया जा रहा है. नागरिकों के हेल्थ के नजरिए से यह एक गंभीर बात है.

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केरल : तीन रेलवे स्टेशनों पर ‘हवाई अड्डा मॉडल’ की तरह की जाएगी जांच, कोरोना संदिग्ध होने पर स्टेशन से ही भेजा जायेगा अस्पताल https://newswing.com/kerala-three-railway-stations-will-be-investigated-like-airport-model-hospital-will-be-sent-from-the-station-if-corona-is-suspected/176535/ https://newswing.com/kerala-three-railway-stations-will-be-investigated-like-airport-model-hospital-will-be-sent-from-the-station-if-corona-is-suspected/176535/#respond Tue, 12 May 2020 07:40:59 +0000 https://newswing.com/?p=176535 Thiruvananthapuram  : भारतीय रेलवे द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे लोगों के लिए मंगलवार से कुछ ट्रेनें चलाने के फैसले के मद्देनजर केरल ने राज्य के तीन रेलवे स्टेशनों पर कोविड-19 की ‘हवाई अड्डा मॉडल’ के तहत जांच करने की योजना बनाई है. ये रेलवे स्टेशन कोझीकोड, एर्नाकुलम और तिरुवनंतपुरम हैं. राज्य मंत्री वी.एस …

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Thiruvananthapuram  : भारतीय रेलवे द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे लोगों के लिए मंगलवार से कुछ ट्रेनें चलाने के फैसले के मद्देनजर केरल ने राज्य के तीन रेलवे स्टेशनों पर कोविड-19 की ‘हवाई अड्डा मॉडल’ के तहत जांच करने की योजना बनाई है. ये रेलवे स्टेशन कोझीकोड, एर्नाकुलम और तिरुवनंतपुरम हैं.

राज्य मंत्री वी.एस सुनील कुमार ने बताया कि किसी भी व्यक्ति में कोई भी लक्षण दिखने पर उसे स्टेशन से ही अस्पताल भेज दिया जाएगा और अन्य को केरल राज्य सड़क परिवहन (केएसआरटीसी) की विशेष बसों से उनके जिले के लिए रवाना किया जाएगा.

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उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ विशेष ट्रेनें केवल तीन स्टेशनों केरल-कोझीकोड, एर्नाकुलम और तिरुवनंतपुरम पर रुकेंगी. रेलवे हमें यात्रियों का पूरा पता मुहैया कराएगा. हम उन्हें उनके जिलों के अनुसार अलग करेंगे और तीन स्टेशनों पर उतरने वाले लोगों की सूची को अंतिम रूप देंगे. स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों की जांच की जाएगी.’’

केन्द्र के दिशा-निर्देशानुसार रेलवे को यह सुनिश्चित करना है कि केवल बिना लक्षण वाले लोग ट्रेन में यात्रा करें.  यात्रियों को स्टेशन के प्रवेश और निकास बिंदु पर हैंड सैनिटाइजर दिया जाएगा और सभी को मास्क पहनने होंगे. उन्होंने बताया कि गन्तव्य पर पहुंचते ही उन्हें राज्य के स्वास्थ्य नियमों का पालन करना होगा.

मंत्री ने कहा कि हवाई अड्डे पर यात्रियों की जांच के लिए लगाए जाने वाले काउंटर इन तीन स्टेशनों पर होंगे.  उन्होंने कहा, ‘‘ हमें हर ट्रेन में कम से कम 1400 लोगों के आने की उम्मीद है और वे तीन अलग-अलग स्टेशनों पर उतरेंगे. बुधवार शाम तक योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा.’’

उन्होंने बताया कि रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की थर्मल जांच भी की जाएगी. अधिक तापमान (बुखार) होने पर यात्री को अलग कर औपचारिक जांच के लिए अस्पताल भेज दिया जाएगा.

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कुमार ने कहा, ‘‘ जिनमें लक्षण दिखाई देंगे उन्हें अस्पताल भेज दिया जाएगा. बिना लक्षण वाले यात्रियों को केएसआरटीसी की बसों में उनके जिले के लिए रवाना कर दिया जाएगा, जहां उन्हें पृथक-वास में रहना होगा.’’

गौरतलब है कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए देशभर में लगाए गए लॉकडाउन के कारण रेल सेवाएं काफी दिन तक बंद रही, जिसे अब आंशिक रूप से शुरू किया जा रहा है. राज्य में कोविड-19 के 519 मामले सामने आए हैं. इनमें से केवल 27 लोगों का इलाज जारी है.

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खूंटी लौटे प्रवासी मजदूरों को भेजा गया 28 दिनों होम के क्वारेंटाइन में, उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई https://newswing.com/khunti-returned-migrant-laborers-sent-for-28-days-in-home-quarantine-action-will-be-taken-for-violation/175242/ https://newswing.com/khunti-returned-migrant-laborers-sent-for-28-days-in-home-quarantine-action-will-be-taken-for-violation/175242/#respond Wed, 06 May 2020 12:25:25 +0000 https://newswing.com/?p=175242 Khunti: बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों के झारखंड आने का सिलसिला जारी है. इन मजदूरों को उचित दिशा मिले, इसके लिए जिला प्रशासन खूंटी अपनी तैयारी को पुख्ता करने में जुटी है. जिला प्रशासन ने गृह सचिव, भारत सरकार द्वारा लॉकडाउन की वजह से विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को गृह जिला में लाने …

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Khunti: बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों के झारखंड आने का सिलसिला जारी है. इन मजदूरों को उचित दिशा मिले, इसके लिए जिला प्रशासन खूंटी अपनी तैयारी को पुख्ता करने में जुटी है. जिला प्रशासन ने गृह सचिव, भारत सरकार द्वारा लॉकडाउन की वजह से विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को गृह जिला में लाने के लिए दिये गये आदेश के बाद सोमवार रात केरला के कोजिकोड, कर्नाटक के बंगलूरु, राजस्थान के नागपुर मंडवा व झारखंड के धनबाद में फंसे 33 प्रवासी मजदूरों को खूंटी लाया गया.

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कहां से कितने मजदूर वापस लौटे

घर लौटने वाले प्रवासी मजदूरों में खूंटी लौटने वाले मजदूरों में धनबाद से 02, केरला के कोजिकोड से 2, केरला के कोजिकोड से मुरहू प्रखंड के 01 और कर्नाटक के बेंगलुरू से मुरहू प्रखंड के 1, केरला के कोजिकोड से कर्रा प्रखंड के 2, कर्नाटक के बेंगलुरू कर्रा प्रखंड के 3, केरला के चकितापुरम से तोरपा प्रखंड के 1, कोजिकोड से तोरपा प्रखंड के 2 और कर्नाटक के बेंगलुरू से तोरपा प्रखंड के 7 और राजस्थान के नागपुर मंडवा से रनिया प्रखंड के 12 मजदूर शामिल हैं.

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जांच के बाद 28 दिनों तक होम क्वारेंटाइन

वहीं लौटे प्रवासी मजदूरों का जिला प्रशासन ने थर्मल स्क्रीनिंग व स्वास्थ्य परीक्षण कराया. उनके भोजन व पेयजल की समुचित व्यवस्था भी की गयी. मंगलवार को सभी मजदूरों को बसों से उनके घर भेजा गया.

वहीं इससे पहले खूंटी डीसी सूरज कुमार द्वारा सभी मजदूरों को 28 दिनों तक होम क्वारेंटाइन में रहने का सख्त निर्देश दिया गया. उन्होंने कहा कि इसके उल्लंघन की स्थिति में संबंधित मजदूर के खिलाफ विधि-सम्मत कार्रवाई करने का प्रावधान है.

जिला प्रशासन द्वारा खूंटी जिले के प्रवासी मजदूरों के अलावा अन्य को लाने के लिए हर संभव  प्रयास किये जा रहे हैं. साथ ही जिला स्तर के नोडल पदाधिकारियों द्वारा अन्य राज्यों व जिलों के नोडल अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्यवाही की जा रही है.

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केरल, राजस्थान और कर्नाटक से 271 मजदूर पहुंचे पलामू, किये गये होम क्वॉरेंटाइन https://newswing.com/271-workers-kerala-rajasthan-karnataka-reached-palamu-home-quarantine/174880/ https://newswing.com/271-workers-kerala-rajasthan-karnataka-reached-palamu-home-quarantine/174880/#respond Tue, 05 May 2020 05:22:09 +0000 https://newswing.com/?p=174880 Palamu: कोविड-19 को लेकर लॉकडाउन थ्री लागू है. इस दौरान देश के अलग अलग राज्यों से मजदूरों का पलामू आना लगातार जारी है. मंगलवार तड़के 271 मजदूरों को केरल, कर्नाटक और राजस्थान से पलामू लाया गया. सभी को होम क्वॉरेंटाइन किया गया है. सभी को 14 दिनों तक संयम बरतते हुए घर में रहने का …

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Palamu: कोविड-19 को लेकर लॉकडाउन थ्री लागू है. इस दौरान देश के अलग अलग राज्यों से मजदूरों का पलामू आना लगातार जारी है. मंगलवार तड़के 271 मजदूरों को केरल, कर्नाटक और राजस्थान से पलामू लाया गया. सभी को होम क्वॉरेंटाइन किया गया है. सभी को 14 दिनों तक संयम बरतते हुए घर में रहने का निर्देश दिया गया है.

सरकार की मदद से मंगलवार की अहले सुबह कोझीकोड (केरल), नागौर (राजस्थान) और कोलार (कर्नाटक) से 271 मजदूर अपने घर पलामू पहुंचे.

मेदिनीनगर के जीएलए कॉलेज में बनाये गये सहायता केंद्र में जिला प्रशासन के पदाधिकारियों ने मजदूरों का स्वागत किया. कोझीकोड, केरल से 19 मजदूर धनबाद के रास्ते, नागौर (राजस्थान) से 162 मजदूर बरकाकाना के रास्ते और कोलार (कर्नाटक) से 90 मजदूर हटिया के रास्ते पलामू पहुंचे.

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सभी मजदूरों की मेडिकल स्क्रिनिंग की गयी

उपायुक्त- सह- जिला दंडाधिकारी डॉ शांतनु कुमार अग्रहरि  के निर्देश पर जिला प्रशासन के द्वारा क्रमशः धनबाद, बरकाकाना और हटिया स्टेशन पर रविवार की रात मजदूरों को लेने के लिए कई बसों को भेजा गया था. पलामू आने के बाद मजदूरों को जीएलए कॉलेज में बनाये गये सहायता केंद्र में चिकित्सकों के द्वारा मेडिकल स्क्रीनिंग की गयी.

इस दौरान चिकित्सकों की टीम के द्वारा इंफ्रारेड थर्मामीटर के माध्यम से मजदूरों के बॉडी टेंपरेचर को नापा गया. साथ ही साथ खासी, बुखार जैसे लक्षण की भी स्क्रीनिंग की गयी. जांच के बाद स्वस्थ पाये जाने पर मजदूरों के हाथों में होम क्वॉरेंटाइन का मोहर लगाकर उन्हें भेजा गया. होम क्वॉरेंटाइन में मजदूरों को 14 दिनों तक रहने का निर्देश दिया गया है.

जिला समाज कल्याण पदाधिकारी आफताब आलम ने बताया कि जीएलए कॉलेज में बनाये गये सहायता केंद्र में दूसरे राज्यों से आ रहे प्रवासी मजदूरों के लिए विभिन्न सुविधाओं की व्यवस्था की गयी. सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन हो, इसके लिए सभी काउंटरों के आगे सामान दूरी पर सर्किल बनाकर चिन्हित किया गया है.

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कहां के कितने मजदूर 

पलामू पहुंचे 271 प्रवासी मजदूरों में सदर मेदिनीनगर के 40, लेस्लीगंज के 8,  तरहसी के 9, पांकी के 25, मनातू के 14, पाटन के 17, पंडवा के 2, छत्तरपुर के 26, नौडीहा बाजार के 1, विश्रामपुर के 9, उंटारी रोड के 4, पाण्डु के 28, हरिहरगंज के 10, नावा बाजार के 1, पिपरा के 3, हुसैनाबाद के 21, हैदरनगर के 16, मोहम्मदगंज के 6, चैनपुर के 14, रामगढ़ के 9 तथा सतबरवा के 8 मजदूर शामिल हैं.

मजदूरों को डॉउनलोड कराया गया आरोग्य सेतु ऐप

मेडिकल स्क्रीनिंग के बाद मजदूरों को संबंधित प्रखंडों के काउंटर भेजा गया, वहां मजदूरों को उनके प्रखंड जाने वाले वाहनों का नंबर बताया गया. इसके अलावा प्रखंड के काउंटरों पर मजदूरों से आरोग्य सेतु एप डॉउनलोड कराया गया.

उसके बाद सभी मजदूरों को उनके प्रखंडों में जिला प्रशासन के द्वारा पहुंचाया गया. इसके लिए जिला प्रशासन के द्वारा 13 बसों को संबद्ध किया गया था.

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प्रवासी मजदूरों से घर वापसी के लिए अधिक किराया वसूलने के पीछे कौन सा गणित और रणनीति काम रही है, इसे समझिये https://newswing.com/understand-which-mathematics-and-strategy-is-working-behind-the-high-rent-for-migrant-laborers-to-return-home/174704/ https://newswing.com/understand-which-mathematics-and-strategy-is-working-behind-the-high-rent-for-migrant-laborers-to-return-home/174704/#respond Mon, 04 May 2020 08:44:35 +0000 https://newswing.com/?p=174704 Faisal Anurag कोरोना वायरस के इस भयावह दौर में राजनीति परवान पर है. लेकिन यह राजनीति विरोधियों को निशाने पर लेने की है. भारत में पिछले छह सालों में देखा गया है कि तमाम सवाल विपक्ष से ही पूछे जा रहे हैं. और सत्तापक्ष की गलतियों को भी उसके मास्टर स्ट्रोक के रूप में पेश …

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Faisal Anurag

कोरोना वायरस के इस भयावह दौर में राजनीति परवान पर है. लेकिन यह राजनीति विरोधियों को निशाने पर लेने की है. भारत में पिछले छह सालों में देखा गया है कि तमाम सवाल विपक्ष से ही पूछे जा रहे हैं. और सत्तापक्ष की गलतियों को भी उसके मास्टर स्ट्रोक के रूप में पेश किया जा रहा है. मुख्यधारा की मीडिया के बड़े तबके और सत्तापक्ष के निशाने पर न केवल विपक्षी दलों की सरकारें हैं बल्कि विपक्ष के नेताओं के सुझाव भी हैं. असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की घरवापसी के सवाल पर भी झारखंड सहित कई प्रदेशों की घटनाएं बताती हैं कि भारतीय जनता पार्टी के नेता श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा में उतर आए हैं. उन सवालों को दरकिनाकर कर जिससे श्रमिक लॉकडाउन के बाद से ही झेल रहे हैं.

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सोनिया गांधी ने मजदूरों की घरवापसी के लिए किराया देने की बात क्या की कि भाजपा आईटी सेल उबल पड़ा है. आखिर रेल मंत्रालय इस संकट के समय इन मजदूरों से किराया वह भी अतरिक्त दर पर क्यों वसूलने की बात कर रहा है. भिवंडी से उत्तर प्रदेश के लिए खुली एक ट्रेन में 90 स्थान खाली रह गए. क्योंकिे मजूदरों के पास पैसे नहीं थे. और स्टेशन आ कर उन्हें निराश लौटना पड़ा है. इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या केंद्र सरकार ने मजूदरों की वापसी की इजाजत बेमन से दी है. सोशल मीडिया पर इसे ले कर कड़ी प्रतिक्रिया वायरल हो रही है.

युवा पत्रकार श्याम मीरा सिंह ने फेसबुक पोस्ट में लिखा है : सोनिया ने कहा है कि “जब सरकार, गुजरात के एक कार्यक्रम भर में खाने-पीने और ट्रांसपोर्ट पर 100 करोड़ रुपए खर्च कर सकती है, जब रेल मंत्रालय प्रधानमंत्री कोरोना फंड में 150 करोड़ रुपए जमा कर करवा सकती है तो मजदूरों के ट्रांसपोर्ट पर खर्च क्यों नहीं किया जा रहा?”

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क्विंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, भिवंडी से उत्तरप्रदेश के गोरखपुर के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई थी. लेकिन इसमें करीब 90 सीटें खाली रह गईं. किसी तरह अपने घर लौटने की आस में स्टेशन पहुंचे 100 से ज्यादा मजदूरों को वापस लौटना पड़ा. इन मजदूरों के पास टिकट खरीदने के पैसे नहीं थे.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 64 फीसदी मजदूरों के पास अब 100 रुपये से भी कम पैसे बचे हैं, अखबार ने ये आंकड़ा ‘स्ट्रैंडेड वर्कर्स एक्शन नेटवर्क (SWAN)’ नाम की एक रिपोर्ट के हवाले से दिए हैं. इस रिपोर्ट को बनाने में 32 दिनों की मेहनती लगी है जिसमें करीब 16,863 मजदूरों से बात की गयी.

अब बात ये है कि रोज कमाने, रोज खाने वाले संकट में फंसी हुई बेचारी गरीब जनता पर आपकी पैसेंजर ट्रेनों के टिकटों के लिए हजार-हजार रुपए चुकाने के लिए कहां से आएं?  यदि किसी परिवार में 6-7 सदस्य हुए तो वे तो वहीं मर जायेंगे!

आप कर्ज में फंसे हुए उद्योगपतियों के पैसे चुका सकते हैं, मजदूरों के क्यों नहीं? क्या इस देश की आर्थिकी में उनका कोई योगदान नहीं है?

मुकेश असीम अर्थशास्त्र के जानकार हैं. उन्होने पीएम केयर फंड पर सवाल उठाते हुए लिखा है : 1200 यात्री दो हजार किमी का औसत लें तो एक ट्रेन पर रेलवे को मजदूरों से भाड़ा वसूली कर मिलेगा – 10 लाख रुपया.

रेलवे ने PM-Cares में दिये 151 करोड़ रुपये. इतने में 1510 गाडियां चलाकर 18 लाख मजदूरों को घर पहुंचाया जा सकता था, बिना कोई भाड़ा वसूले.

लेकिन PM Cares for fund and capitalists, not workers. और ये पूंजीपति क्या चाहते हैं? मजदूरों को शहरों से न जाने देना! क्यों? मजदूर जितने अधिक भूख तकलीफ में रहेंगे, कर्ज सिर पर चढ़ेगा, बाद में और भी कम मजदूरी में अधिक से अधिक घंटे काम करने को उतने ही मजबूर किए जा सकेंगे.

जाहिर है कि पीएम केयर फंड को ले कर सोनिया गांधी ने कुछ सवाल उठाया था. औऱ नरेंद्र मोदी को सुझाव दिया था कि पीएम केयर फंड में आए तमाम धन को पीएम राहत कोष का हिस्सा बनाया जाए. जिसकी निगरानी और ऑडिट सीएजी वैधानिक तरीके से करती है. जबकि केयर फंड को सीएजी के दायरे से बाहर रखा गया है. उसकी पूरी व्यवस्था एक प्राइवेट फंड की तरह है. यह सवाल उठते ही भाजपा आगबबूला हो गयी.

और उसके कई मंत्री कांग्रेस और सोनिया गांधी पर हमला वर हो गये. श्रमिक ट्रेन के विवाद के बाद पीएम केयर फंड को ले कर काफी सवाल उठाए जा रहे हैं. और भाजपा इस अवसर को अपनी राजनीति के लिए इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस को निशाना बना रही है. अमरीका में जिस तरह ट्रंप ने चीन को दुशमन बना कर अपनी राजनीति तेज कर दी है,  ठीक उसी तरह भारत में भाजपा कांग्रेस और विपक्ष को निशाने पर ले रही है. केरल  सरकार के मॉडल से सीखने के बजाय केंद्र की राजनीति केरल को न केवल नजरअंदाज करने की है, बल्कि उसके निर्णयों को प्रभावित करने पर भी है.

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