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कविता

कवि और कविता पर आज बाजारवाद हावी, इसलिए मंच में हुआ बदलाव

एक वक्त था जब कवि और कविताओं की अपनी एक अलग रौनक थी. लेकिन बाजारवाद के चकाचौंध में उस रौनक की रोशनी गुम सी गयी है. कभी कवि की एक पंक्ति से एक जमाने का हाल बयां होता था. लेकिन आज पूरी कविता किसी माजरे के लिए फीकी पड़ती दिखती है. आखिर ऐसा…

शरद कोकास की कविता – रोहित वेमुला का आखिरी खत

रोहित वेमुला ने अपनी आत्महत्या से पूर्व जो ख़त लिखा था उसे पढ़ने के बाद जो तकलीफ़ मुझे हुई उसने इस कविता को जन्म दिया- शरद कोकास रोहित वेमुला का आखिरी खत“जब आप यह ख़त पढ़ रहे होंगेमैं इस दुनिया में नहीं होऊंगा”…

सीमा मिश्रा की कविता – एक अजन्मी  बेटी का डर

एक अजन्मी  बेटी का डरहे मां डर लगता है मुझे,तुम्हारी उस दुनिया में आने सेमैंने सुना है तुम्हारी उस दुनिया मेंहैं, कुछ हिंसक दानव रूपी मानवपहले तो मैं थी बेताबलेकिन अब डर लगता है बाहर आने सेहे मां कैसे…

अजमल खां की कविता – लिख दो कि एक भारतीय हूं मैं

(फिलिस्तीन के महमूद दरवेश, कश्मीर के आगा साहिद अली और असम के मिया कवियों की कड़ी में)लिख दो कि एक भारतीय हूं मैंलिख दोकि एक भारतीय हूं मैंउसके नीचे लिखोकि मेरा नाम अजमल हैएक मुसलमान हूं मैंऔर भारतीय…

वर्तमान पर टिप्पणी करती शिरोमणि महतो की कविता – जो मारे जाते हैं

जो मारे जाते हैंवे एक हांक मेंदौड़े आते सरपट गौओं की तरहवे बलि-वेदी पर गर्दन डालकरमुंह से उफ्फ भी नहीं करतेबिलकुल भेड़ों की तरहवे मंदिर और मस्जिद मेंगुरुद्वारे और गिरिजाघर मेंकोई फर्क नहीं…

इमारतों में मजदूरी करने वाले ईरानी कवि साबिर हका की कविताएं

ईरानी मजदूर साबिर हका की कविताएं तडि़त-प्रहार की तरह हैं. साबिर का जन्म 1986 में ईरान के करमानशाह में हुआ. अब वह तेहरान में रहते हैं और इमारतों में निर्माण-कार्य के दौरान मज़दूरी करते हैं. साबिर हका के दो कविता-संग्रह प्रकाशित हैं और ईरान…

अष्टभुजा शुक्ल की एक कविता जो आज़ भी प्रासंगिक है – गणित का एक सवाल

गणित का एक सवाल किसी धर्मस्थल केविवाद मेंतीन हजार लोग बम सेदो हजार गोली सेएक हजार चाकू सेऔर पांच सौजलाकर मार डाले जाते हैंचार सौ महिलाओं कीइज़्ज़त लूटी जाती हैऔर तीन सौ शिशुओं कोबलि का बकरा बनाया जाता…

चंडीगढ़ का कवि दरबार और आर चेतनक्रांति की कविता – मर्दानगी

हाल में, चंडीगढ़ में पंजाब यूनिवर्सिटी में एक कवि सम्मेलन आयोजित किया गया था. पंजाबी में उसे कवि दरबार कहते हैं. यह आयोजन वहां के बड़े सम्माननीय प्रोफेसर केसर सिंह केसर की याद में हर बरस किया जाता है.डॉ. सुरजीत पातर की अध्यक्षता में हुए…

आज के समय को परिभाषित करतीं और आज के ‘राजा’ पर तीन कविताएं

बोधिसत्‍व की कविताकलजुग का एक राजा थाराजा क्या था बाजा थाहरदम निज गुन गाता थाभारत भाग्य विधाता थानंगे भूखे चिरकुट जन मेंसुबरन सूट दिखाता थाक्या दूं क्या दूं बोलो बोलोयह मैं यह मैं गाता थाकभी डरा सा कभी…

ममता ने लिखी कविता ‘ठिकाना’ – इतिहास मिटाने की हो रही कोशिश, मीडिया को नियंत्रित किया जा रहा

Kolkata: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर कविता के जरिए केंद्र सरकार पर हमला बोला है. ममता ने गुरुवार को अपनी कविता सोशल साइट पर साझा की है. ट्विटर और फेसबुक पर साझा की गयी इस कविता में उन्होंने दावा किया है कि देश में…