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कविता

दंगों में अपमानित की जानेवाली बेटियों को समर्पित शरद कोकास की तीन कविताएं

बुरे वक्त में जन्मी बेटियां बेटियां जो कभी जन्मीं ही नहीं वे मृत्यु के दुख से मुक्त रहीं जन्म लिया जिन्होंने इस नश्वर संसार में उन्हें गुजरना पड़ा इस मरणांतक प्रक्रिया से अस्तित्व में आने से लेकर…

कवि और कविता पर आज बाजारवाद हावी, इसलिए मंच में हुआ बदलाव

एक वक्त था जब कवि और कविताओं की अपनी एक अलग रौनक थी. लेकिन बाजारवाद के चकाचौंध में उस रौनक की रोशनी गुम सी गयी है. कभी कवि की एक पंक्ति से एक जमाने का हाल बयां होता था. लेकिन आज पूरी कविता किसी माजरे के लिए फीकी पड़ती दिखती है. आखिर ऐसा…

शरद कोकास की कविता – रोहित वेमुला का आखिरी खत

रोहित वेमुला ने अपनी आत्महत्या से पूर्व जो ख़त लिखा था उसे पढ़ने के बाद जो तकलीफ़ मुझे हुई उसने इस कविता को जन्म दिया- शरद कोकास रोहित वेमुला का आखिरी खत “जब आप यह ख़त पढ़ रहे होंगे मैं इस दुनिया में नहीं होऊंगा” …

सीमा मिश्रा की कविता – एक अजन्मी  बेटी का डर

एक अजन्मी  बेटी का डर हे मां डर लगता है मुझे, तुम्हारी उस दुनिया में आने से मैंने सुना है तुम्हारी उस दुनिया में हैं, कुछ हिंसक दानव रूपी मानव पहले तो मैं थी बेताब लेकिन अब डर लगता है बाहर आने से हे मां कैसे…

अजमल खां की कविता – लिख दो कि एक भारतीय हूं मैं

(फिलिस्तीन के महमूद दरवेश, कश्मीर के आगा साहिद अली और असम के मिया कवियों की कड़ी में) लिख दो कि एक भारतीय हूं मैं लिख दो कि एक भारतीय हूं मैं उसके नीचे लिखो कि मेरा नाम अजमल है एक मुसलमान हूं मैं और भारतीय…

वर्तमान पर टिप्पणी करती शिरोमणि महतो की कविता – जो मारे जाते हैं

जो मारे जाते हैं वे एक हांक में दौड़े आते सरपट गौओं की तरह वे बलि-वेदी पर गर्दन डालकर मुंह से उफ्फ भी नहीं करते बिलकुल भेड़ों की तरह वे मंदिर और मस्जिद में गुरुद्वारे और गिरिजाघर में कोई फर्क नहीं…

इमारतों में मजदूरी करने वाले ईरानी कवि साबिर हका की कविताएं

ईरानी मजदूर साबिर हका की कविताएं तडि़त-प्रहार की तरह हैं. साबिर का जन्म 1986 में ईरान के करमानशाह में हुआ. अब वह तेहरान में रहते हैं और इमारतों में निर्माण-कार्य के दौरान मज़दूरी करते हैं. साबिर हका के दो कविता-संग्रह प्रकाशित हैं और ईरान…

अष्टभुजा शुक्ल की एक कविता जो आज़ भी प्रासंगिक है – गणित का एक सवाल

गणित का एक सवाल किसी धर्मस्थल के विवाद में तीन हजार लोग बम से दो हजार गोली से एक हजार चाकू से और पांच सौ जलाकर मार डाले जाते हैं चार सौ महिलाओं की इज़्ज़त लूटी जाती है और तीन सौ शिशुओं को बलि का बकरा बनाया जाता…

चंडीगढ़ का कवि दरबार और आर चेतनक्रांति की कविता – मर्दानगी

हाल में, चंडीगढ़ में पंजाब यूनिवर्सिटी में एक कवि सम्मेलन आयोजित किया गया था. पंजाबी में उसे कवि दरबार कहते हैं. यह आयोजन वहां के बड़े सम्माननीय प्रोफेसर केसर सिंह केसर की याद में हर बरस किया जाता है. डॉ. सुरजीत पातर की अध्यक्षता में हुए…

आज के समय को परिभाषित करतीं और आज के ‘राजा’ पर तीन कविताएं

बोधिसत्‍व की कविता कलजुग का एक राजा था राजा क्या था बाजा था हरदम निज गुन गाता था भारत भाग्य विधाता था नंगे भूखे चिरकुट जन में सुबरन सूट दिखाता था क्या दूं क्या दूं बोलो बोलो यह मैं यह मैं गाता था कभी डरा सा कभी…