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TAC की उपसमिति ने पुलिस अधीक्षकों से मांगी जेलों में बंद आदिवासियों की संख्या की जानकारी

राज्य में आदिवासियों की घटती जनसंख्या को लेकर टीएसी की बनी उपसमिति के कार्य को तीन माह का मिला विस्तार

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Ranchi : राज्य में आदिवासियों की घटती आबादी को लेकर बनी टीएसी की उपसमिति की मंगलवार को बैठक हुई. इसमें उपसमिति के कार्य को तीन माह तक का विस्तार दिया गया है. चार अक्टूबर से समिति पुन: जिलों का दौरा करेगी. बैठक में 1941 से लेकर अब तक की जातिगत जनसंख्या का ब्योरा उपायुक्तों से मांगा गया.  जनसंख्या के विषय पर अध्ययन कर रही टीएसी उपसमिति द्वारा अब तक राज्य के छह जिलों का दौरा पूरा किया जा चुका है, जबकि समिति को कार्य पूरा करने के लिए तीन मह तक की कार्य अवधि का विस्तर दिया गया. इस उपसमिति में मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के अलावा रतन तिर्की, जेबी तुबिद, ताला मरांडी, गंगोत्री कुजूर, टीआरआई के डायरेक्टर रणेंद्र, आदिवासी कल्याण आयुक्त गौरीशंकर मिंज के अलावा शिवशंकर उरांव और हेमलाल मुर्मू शामिल हैं. मंगलवार को हुई बैठक में शिवशंकर उरांव और हेमलाल मुर्मू उपस्थित नहीं हो सके.

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1941 से लेकर अब तक की जाति आधारित जनसंख्या की मांगी जानकारी

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टीएससी की इस उपसमिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि अब तक छह जिलों के पूरे हो चुके कार्य का अध्ययन कर दिसंबर तक उपसमिति टीएसी को रिपोर्ट सौंप देगी. इसके लिए रिपोर्ट तैयार करने के लिए पुन: अपसमिति चार अक्टूबर को खूंटी, पांच अक्टूबर को पश्चिम सिंहभूम व खरसावां, छह अक्टूबर को पूर्वी सिंहभूम का उपसमिति दौरा करेगी. कमिटी द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी किया गया है कि 1941 से लेकर अब तक की जाति आधारित जनसंख्या की जानकारी उपसमिति को उपलब्ध करायें, जिसमें एसटी, एससी, ओबीसी और सामान्य का भी जिक्र हो, एक सप्ताह के भीतर उपसमिति को ब्योरा सौंपें. वहीं, उपसमिति द्वारा राज्य की जेलों में बंद आदिवासियों की संख्या व एसटीएससी एक्ट के तहत दर्ज मामले की स्थिति की रिपोर्ट पुलिस अधीक्षकों से मांग की गयी है.

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आदिवासी में शामिल किये जाने की मांग पर भी टीएसी की उपसमिति ने किया विचार

भुइहर मुंडा, लोहरा-लोहार, चिकबड़ाईक व बड़ाईक द्वारा आदिवासी में शामिल करने की मांग लंबे समय से की जा रही है. इस पर विचार करते हुए उपसमिति ने दस्तावेज और सामाजिक, आर्थिक अवस्था का अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट देने की बात तय की. उपसमिति ने महसूस किया कि यह मामला काफी संवेदनशील है, सभी विषय का अध्ययन करने के उपरांत ही इस पर उपसमिति अपना निर्णय समाज के अगुआ से विचार-विमर्श कर सामने लायेगी.

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